SIR विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कई राज्यों तक पहुंच गया। दिल्ली में करीब 150 लोग हिरासत में लिए गए। दो चुनाव आयुक्तों की कथित लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट के बीच ECI ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं और प्रक्रिया जारी है।
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नई दिल्ली | 26 सितंबर 2026 | अपूर्वा चौधरी
SIR विवाद के बीच CEC Gyanesh Kumar को लेकर प्रदर्शन तेज
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को लेकर Special Intensive Revision यानी SIR का विवाद शनिवार को और तेज हो गया। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने कई हिस्सों में प्रदर्शन किए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में Gyanesh Kumar के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग शामिल रही। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने ताजा स्पष्टीकरण में कहा है कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
दिल्ली में करीब 150 लोग हिरासत में
दिल्ली में शुक्रवार को जंतर-मंतर और दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के आसपास प्रदर्शन के दौरान करीब 150 नेताओं, छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया और रात करीब आठ बजे उन्हें छोड़ दिया गया।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों की ओर से हालांकि यह दावा किया गया कि उन्होंने पुलिस को अपने कार्यक्रम की जानकारी दी थी। इस दौरान जंतर-मंतर की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और पुलिस बल की तैनाती रही।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से जुड़े लोग शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने SIR पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की और CEC के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन
विवाद केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों ने कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च और प्रदर्शन किए।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया कि कांग्रेस ने दिल्ली के अलावा कम से कम 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि चंडीगढ़ और पटना में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट है।
कर्नाटक में भी SIR के खिलाफ प्रदर्शन हुआ और वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की। झारखंड के रांची में RJD की ओर से भी प्रदर्शन किया गया। इस तरह SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विरोध अलग-अलग राज्यों में दिखाई दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि में क्या है?
मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। Indian Express की एक जांच के अनुसार, Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नामों को हटाने और बहाल करने, चुनावी रोल से जुड़े सॉफ्टवेयर तथा SIR की प्रक्रियाओं जैसे मुद्दों से था। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में दोनों आयुक्तों ने यह सवाल भी उठाया कि कुछ फैसले उनके संज्ञान या अनुमोदन के बिना कैसे लिए गए।
इन रिपोर्टों में दर्ज आपत्तियां चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित असहमति का हिस्सा हैं। इन्हें अपने आप में किसी चुनावी अनियमितता या गैरकानूनी कार्रवाई का न्यायिक रूप से सिद्ध निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
Form 6 को लेकर भी उठा सवाल
विवाद का एक हिस्सा Form 6 से जुड़ा है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी Form 6 को नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने की जानकारी उपलब्ध है।
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल Form 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि नए आवेदकों से पिछले SIR के मतदाता रोल में स्वयं या माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया सीधे मतदाता पंजीकरण से जुड़ी है। हालांकि, Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर आयोग का पक्ष भी सामने आया है और शनिवार को हुई बैठक के बाद चुनाव आयोग ने संबंधित प्रक्रियाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
रिपोर्टों के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने अलग-अलग टिप्पणियों और विचारों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया।
शनिवार को CEC Gyanesh Kumar और Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu तथा Vivek Joshi की बैठक हुई। बैठक में SIR, ECINet, Form 6 और मतदाता दावों-आपत्तियों से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श और अलग-अलग राय को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए। इस तरह एक ओर दो चुनाव आयुक्तों की कथित लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है, वहीं दूसरी ओर आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्या है मुख्य विवाद?
Special Intensive Revision यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसमें पात्र मतदाताओं की जानकारी को अपडेट करना है। मौजूदा विवाद में मुख्य सवाल मतदाता नामों की जांच, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे हैं।
Election Commission की वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध है, जिसमें मतदाताओं के लिए पिछले SIR में नाम खोजने, Enumeration Form भरने और नोटिस से संबंधित दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं दी गई हैं।
विवाद का राजनीतिक पहलू तब और बढ़ा जब विपक्षी दलों ने आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट को आधार बनाकर SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कई नेताओं ने इसे लेकर CEC के इस्तीफे की मांग की है।
NDA के सहयोगी दलों ने भी मांगा स्पष्टीकरण
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने वालों में केवल विपक्षी दल ही नहीं हैं। NDA के सहयोगी दलों LJP (रामविलास), TDP और RLM के नेताओं ने भी आयोग से सामने आई चिंताओं पर स्पष्टता देने की मांग की।
LJP (रामविलास) नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि इस तरह के विवाद से चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हो सकता है और आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। TDP और RLM की ओर से भी आयोग से स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग सामने आई।
इन दलों की प्रतिक्रिया को विपक्ष की मांगों से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इनका मुख्य जोर आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब देने और मतदाता प्रक्रिया को लेकर भरोसा बनाए रखने पर रहा है।
RJD ने रांची में किया प्रदर्शन
झारखंड की राजधानी रांची में भी RJD कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग उठाई। Economic Times के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने SIR और मतदाता सूची में कथित रूप से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर विरोध जताया।
हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से संबंधित राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इस तरह के दावों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बीच अंतर करना जरूरी है।
अभी Gyanesh Kumar के पद को लेकर क्या स्थिति है?
फिलहाल Gyanesh Kumar मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं। उनके इस्तीफे या सरकार की ओर से उन्हें पद से हटाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
उनके खिलाफ राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से इस्तीफे की मांग जरूर तेज हुई है। वहीं चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर SIR और संबंधित प्रक्रियाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया है तथा कामकाज जारी रखा है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को CEC के खिलाफ राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव तथा चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर जारी विवाद के रूप में देखा जा सकता है, न कि पद से हटाए जाने के रूप में।
आगे क्या हो सकता है?
SIR को लेकर विवाद के आगे बढ़ने के साथ चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूची की समीक्षा और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया पर निगाह बनी रहेगी। आयोग ने शनिवार की बैठक में संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर कई स्पष्टीकरण और प्रशासनिक फैसले भी किए हैं।
एक तरफ दो Election Commissioners की कथित लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट ने आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज की है। दूसरी तरफ आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय दोनों पक्षों के सार्वजनिक रिकॉर्ड और आधिकारिक निर्णयों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है। SIR से जुड़े आरोपों, आंतरिक आपत्तियों और आयोग के जवाबों के बीच वास्तविक स्थिति आने वाले प्रशासनिक तथा न्यायिक घटनाक्रम से और स्पष्ट हो सकती है।