यमन में सैन्य तनाव बढ़ने के बीच राशद अल-अलीमी ने नागरिकों से सेना में शामिल होने की अपील की। हूती छोड़कर लड़ाई बंद करने वालों के लिए आम माफी का ऐलान किया गया है।
अदन, यमन | 25 सितंबर 2026
By Mohd Haris
यमन में सैन्य लामबंदी की अपील
यमन में हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने नागरिकों से सरकारी सशस्त्र बलों और सुरक्षा संस्थानों के साथ खड़े होने तथा आधिकारिक माध्यमों से सेना में शामिल होने की अपील की है।
25 सितंबर को दिए गए अपने संबोधन में अल-अलीमी ने राष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी का आह्वान किया। यह अपील ऐसे समय आई है जब हूती समूह ने हाल के सैन्य अभियानों में पश्चिमी यमन के कुछ रणनीतिक इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की है।
हूती छोड़ने वालों के लिए आम माफी
अल-अलीमी ने हूती संगठन से अलग होने वाले लड़ाकों और उससे जुड़े लोगों के लिए भविष्य में आम माफी देने की घोषणा की। उनके मुताबिक, जो लोग हूती समूह छोड़कर उसके लिए लड़ना या काम करना बंद करेंगे, उन्हें प्रस्तावित आम माफी के दायरे में रखा जाएगा।
यमनी सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह माफी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत बाद में जारी की जाएगी। सरकार ने हूती समूह छोड़ने वालों के लिए राज्य की ओर सुरक्षित वापसी का रास्ता खोलने की बात भी कही है।
इस घोषणा का एक अहम पहलू यह है कि माफी तत्काल कानूनी आदेश के रूप में लागू होने के बजाय भविष्य में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाने की बात कही गई है। इसलिए इसे मौजूदा समय में लागू पूर्ण कानूनी माफी के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
जनता से सेना में शामिल होने की अपील
राष्ट्रपति परिषद प्रमुख ने यमन के नागरिकों से सरकारी सेना और सुरक्षा बलों में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने सरकारी संस्थानों और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए सामूहिक लामबंदी की अपील की।
अल-अलीमी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य संस्थानों को फिर से स्थापित करना और पूरे यमन पर सरकारी संप्रभुता कायम करना है। इसमें राजधानी सना भी शामिल है, जिस पर हूती समूह 2014 से नियंत्रण रखता है।
हूतियों के खिलाफ संघर्ष क्यों बढ़ा
यमन में हूती आंदोलन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच संघर्ष एक दशक से अधिक समय से जारी है। 2022 में युद्धविराम के बाद व्यापक स्तर पर लड़ाई में कमी आई थी, लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव के बीच संघर्ष फिर तेज हुआ है।
हाल के हफ्तों में हूती बलों ने पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी यमन में रणनीतिक क्षेत्रों की ओर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। Institute for the Study of War के अनुसार, सितंबर में हूती बलों ने मोक्हा बंदरगाह पर नियंत्रण हासिल किया और लाल सागर के तटीय इलाके में अपनी स्थिति मजबूत की।
इन घटनाक्रमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यमन के पश्चिमी तट के पास बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य स्थित है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
बाब-अल-मंदब पर बढ़ा रणनीतिक दबाव
यमन का संघर्ष केवल घरेलू सत्ता संघर्ष तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदब की रणनीतिक स्थिति के कारण यहां होने वाला सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
हालिया रिपोर्टों में हूती बलों के लाल सागर के तटीय इलाकों में आगे बढ़ने और रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण मजबूत करने का उल्लेख है। इससे यमन के भीतर सैन्य संतुलन और समुद्री सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता बढ़ी है।
सऊदी अरब और क्षेत्रीय समीकरण
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, हूती आंदोलन को ईरान के साथ गठजोड़ रखने वाले समूह के रूप में व्यापक रूप से वर्णित किया जाता है। इस वजह से यमन का संघर्ष क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
सितंबर में हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 सितंबर को अल-अलीमी से फोन पर बातचीत की थी, जिसमें यमन की स्थिति और हूती गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने सीधे सैन्य समर्थन की प्रतिबद्धता नहीं दी।
अल-अलीमी का राजनीतिक संदेश
अल-अलीमी की अपील में दो समानांतर संदेश दिखाई देते हैं। पहला, सरकार समर्थक बलों को सैन्य रूप से मजबूत करने की कोशिश। दूसरा, हूती समूह के भीतर से लड़ाकों और समर्थकों को अलग होने के लिए प्रोत्साहन देना।
सरकारी बयान में इसे यमनी नागरिकों की जान बचाने और बदले तथा प्रतिशोध की कार्रवाई रोकने के प्रयास के रूप में भी पेश किया गया है। सरकार ने कहा है कि हूती समूह छोड़ने वालों के लिए सुरक्षित वापसी का रास्ता खुला है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।