Synopsis
भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद अगस्त 2026 में जुलाई के रिकॉर्ड स्तर से करीब 26% नीचे आ गई। अगस्त में रूसी क्रूड आयात लगभग 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि जुलाई में यह करीब 2.82 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। इस गिरावट के पीछे रूसी तेल की उपलब्धता पर दबाव, चीन की बढ़ी खरीद और कुछ भारतीय रिफाइनरियों में रखरखाव गतिविधियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
भारत का कुल क्रूड आयात भी अगस्त में करीब 8.4% घटकर 4.62 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया। हालांकि, रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है। इसी बीच वेनेजुएला से आयात बढ़कर 2020 के बाद के सबसे ऊंचे मासिक स्तर पर पहुंच गया, जो भारतीय रिफाइनरियों की सप्लाई डायवर्सिफिकेशन की कोशिश को दर्शाता है।
Location: नई दिल्ली
Date: 2 सितंबर 2026
Byline: Apurva Choudhary
भारत के कच्चे तेल आयात में अगस्त 2026 के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला। रूस से आने वाले क्रूड की मात्रा जुलाई के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में करीब 26% कम हो गई। अगस्त में भारत ने रूस से लगभग 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा करीब 2.82 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।
रूसी क्रूड की हिस्सेदारी भी जुलाई के करीब 55.9% से घटकर अगस्त में लगभग 45% रह गई। इसके बावजूद रूस भारत के लिए सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है।
रूसी तेल की सप्लाई पर बढ़ा दबाव
रूस से तेल की उपलब्धता पर कई स्तरों पर दबाव बना है। रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के चलते कुछ रिफाइनिंग और निर्यात गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा, ब्लैक सी क्षेत्र से जुड़े लॉजिस्टिक और शिपिंग जोखिमों ने भी कुछ रूसी कार्गो की लागत और उपलब्धता पर असर डाला है।
ऐसे माहौल में रूस से उपलब्ध क्रूड कार्गो के लिए एशियाई खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
चीन की बढ़ी खरीद ने चुनौती बढ़ाई
भारत के लिए सबसे अहम बदलाव चीन की ओर से रूसी तेल की बढ़ती खरीद है। चीनी रिफाइनरियां उपलब्ध रूसी कार्गो को अधिक मात्रा में हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। खासकर सस्ते रूसी ग्रेड की मांग बढ़ने से भारतीय रिफाइनरों के लिए कुछ कार्गो हासिल करना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।
हालांकि, अगस्त के आंकड़ों को अभी रूसी तेल से भारत की स्थायी दूरी के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। मौजूदा स्थिति बाजार, सप्लाई और शिपिंग परिस्थितियों में बदलाव का नतीजा भी हो सकती है।
भारत का कुल क्रूड आयात भी घटा
रूसी आयात में कमी का असर भारत के कुल क्रूड आयात पर भी पड़ा। अगस्त में भारत का कुल कच्चा तेल आयात करीब 4.62 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई के लगभग 5.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन से 8.4% कम है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज मार्ग से जुड़ी बाधाओं ने भी भारत की क्रूड सप्लाई को चुनौती दी है। भारत की क्रूड जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर है, इसलिए शिपिंग जोखिम बढ़ने पर आयात की लागत और उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
वेनेजुएला से बढ़ी खरीद
रूसी सप्लाई पर दबाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने दूसरे स्रोतों की तरफ भी रुख बढ़ाया है। अगस्त में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात 2020 के बाद के सबसे ऊंचे मासिक स्तर पर पहुंच गया।
यह बदलाव बताता है कि भारतीय रिफाइनरियां मौजूदा भू-राजनीतिक और सप्लाई जोखिमों के बीच अपने क्रूड बास्केट को ज्यादा विविध बनाने की कोशिश कर रही हैं।
भारत के लिए आगे क्या?
रूसी तेल की उपलब्धता में कमी और चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा आने वाले महीनों में भारतीय रिफाइनरों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। अगर रूसी कार्गो कम उपलब्ध होते हैं या उनकी कीमत और शिपिंग लागत बढ़ती है, तो भारत को दूसरे स्रोतों से क्रूड खरीदना पड़ सकता है।
इसका सीधा असर रिफाइनिंग लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत को रूस, वेनेजुएला, पश्चिम एशिया और दूसरे उत्पादक देशों से आने वाले क्रूड की कीमत, उपलब्धता और परिवहन लागत कैसी रहती है।
फिलहाल अगस्त के आंकड़े भारत की क्रूड खरीद में डायवर्सिफिकेशन की बढ़ती जरूरत का संकेत जरूर देते हैं, लेकिन इसे रूसी तेल से किसी स्थायी रणनीतिक बदलाव के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।