एफिल टॉवर पर BAPS प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अलग रखने के आरोपों पर भारत ने इसे संबंधित पक्षों का मामला बताया है।
नई दिल्ली | 09 सितंबर 2026
पेरिस के मशहूर एफिल टॉवर पर एक हिंदू धार्मिक संगठन के प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा को लेकर पैदा हुआ विवाद अब भारत तक पहुंच गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले से सरकार को अलग रखते हुए कहा है कि टॉवर से जुड़ा विवाद संबंधित पक्षों के बीच का मामला है।
विवाद BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के एक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों के कथित तौर पर कार्यस्थलों से हटाए जाने को लेकर पैदा हुआ। फ्रांस में इस मामले की जांच की घोषणा की गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार पेरिस क्षेत्र में BAPS संस्था द्वारा खोले गए मंदिर से परिचित है, लेकिन एफिल टॉवर से जुड़े विशेष विवाद को संबंधित संस्थाओं के बीच का मामला मानती है।
जायसवाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BAPS मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में दिए गए वर्चुअल संबोधन को लेकर भी सवाल किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर प्रधानमंत्री की ओर से शुभकामनाएं देना सामान्य सरकारी प्रथा का हिस्सा है।
इस बयान के जरिए नई दिल्ली ने एफिल टॉवर पर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच हुए विवाद में किसी सरकारी भूमिका से दूरी स्पष्ट की है।
शनिवार को करीब 100 लोगों से जुड़े BAPS प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टॉवर की निजी यात्रा की थी। यह यात्रा पेरिस के आसपास नए हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हुई।
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को अपने कार्यस्थलों से हटने और कुछ इलाकों में नहीं जाने के निर्देश दिए गए। कुछ स्थानों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने का भी आरोप है।
इन आरोपों के बाद एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने विरोध किया और सोमवार को हड़ताल की। इसके कारण स्मारक को एक दिन के लिए बंद रखना पड़ा। मंगलवार को एफिल टॉवर फिर से खुल गया।
BAPS ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के आकार को देखते हुए यात्रा को सामान्य समय की शुरुआत में आयोजित किया गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को परेशानी न हो। संगठन ने कहा कि उसकी जानकारी के मुताबिक किसी व्यक्ति को एफिल टॉवर में प्रवेश से रोका नहीं गया था।
संगठन ने विवाद से पैदा हुई परेशानी और तकलीफ के लिए खेद जताया है। उसने आपसी सम्मान और सेवा के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
इसलिए मौजूदा स्थिति में महिला कर्मचारियों के साथ क्या हुआ, उसकी पूरी जिम्मेदारी और घटनाक्रम को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
एफिल टॉवर का संचालन करने वाली कंपनी एसईटीई ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने के अनुरूप यात्रा की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया था।
कंपनी ने माना कि ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। उसके मुताबिक यह व्यवस्था पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता के सिद्धांतों और संस्था के मूल्यों के अनुरूप नहीं थी।
प्रबंधन ने पूरे मामले की जांच और आवश्यक निष्कर्ष निकालने की बात कही है।
घटना के बाद फ्रांस में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने कर्मचारियों की नाराज़गी को जायज़ बताया और मामले की तत्काल जांच की
बात कही।
फ्रांस की समानता मंत्री ओरोर बर्जे ने भी घटना की आलोचना की। उनका कहना था कि फ्रांस में महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को सीमित करने वाली किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे और अन्य फ्रांसीसी नेताओं ने भी महिला समानता के सिद्धांत को लेकर प्रतिक्रिया दी।
कर्मचारियों के विरोध और प्रबंधन के साथ बैठक के बाद एफिल टॉवर मंगलवार को फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। एक दिन की हड़ताल के कारण पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ा था।
एफिल टॉवर हर साल करीब 7 million visitors को आकर्षित करता है। इसलिए कर्मचारियों से जुड़ा कोई भी विवाद इसके संचालन और सार्वजनिक छवि पर असर डाल सकता है।
यह विवाद पेरिस क्षेत्र में BAPS के नए हिंदू मंदिर के उद्घाटन के तुरंत बाद सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 सितंबर को मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया था।
मोदी ने इस अवसर को भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों से जुड़ी महत्वपूर्ण घटना के तौर पर पेश किया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का संदेश ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर शुभकामनाएं देने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था।
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पहलू हैं। पहला, BAPS प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान वास्तव में कर्मचारियों को क्या निर्देश दिए गए। दूसरा, उन निर्देशों के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
BAPS ने महिला कर्मचारियों को हटाने का आदेश देने की मंशा से इनकार किया है और असुविधा के लिए माफी मांगी है। वहीं एफिल टॉवर की संचालन कंपनी ने स्वीकार किया है कि महिलाओं के साथ बातचीत सीमित करने वाली शर्तें स्वीकार करना उचित नहीं था।
इसलिए जांच की रिपोर्ट इस विवाद में अहम होगी। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किसी एक पक्ष पर अंतिम जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी होगी।
भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। पेरिस में हिंदू मंदिर का उद्घाटन भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क के संदर्भ में देखा गया।
लेकिन एफिल टॉवर का विवाद धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और सार्वजनिक संस्थानों की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल खड़े करता है। भारत सरकार का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि टॉवर से जुड़ा विवाद संबंधित पक्षों के बीच है।
आगे की जांच यह तय करेगी कि निजी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान लिए गए प्रशासनिक फैसलों में किस स्तर पर गलती हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
एफिल टॉवर विवाद ने धार्मिक प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा को अंतरराष्ट्रीय बहस में बदल दिया है। महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अलग रखने के आरोपों के बाद फ्रांस में कर्मचारी विरोध और जांच हुई, जबकि BAPS ने खेद जताते हुए किसी को प्रवेश से रोकने से इनकार किया है।
भारत ने भी मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह संबंधित पक्षों का मामला है। अब निगाहें फ्रांस में चल रही जांच और उसके निष्कर्षों पर हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।