गुरुवार, 09 July 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
SmarterASP.NET Hosting
None

US में भारतीय मूल CEO पर 500 मिलियन डॉलर लोन फ्रॉड का इल्ज़ाम 

None 2025-11-01 12:27:19
US में भारतीय मूल CEO पर 500 मिलियन डॉलर लोन फ्रॉड का इल्ज़ाम 

बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर भारी धोखाधड़ी के आरोप, टेलीकॉम कंपनियों ने दाखिल की दिवालियापन याचिका

अमेरिका में 4,000 करोड़ का लोन फ्रॉड — भारतीय मूल उद्योगपति पर गंभीर आरोप

अमेरिका में भारतीय मूल के उद्योगपति बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर 500 मिलियन डॉलर लगभग ₹4,000 करोड़ के लोन फ्रॉड का आरोप लगा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल, ब्लूमबर्ग, और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपनी टेलीकॉम कंपनियों में नकली ग्राहक खाते और फर्जी इनवॉइस दिखाकर अमेरिकी बैंकों और निजी निवेश फर्मों से भारी कर्ज लिया।
अब उनकी कंपनियाँ दिवालियापन (Chapter-11) की प्रक्रिया में हैं, जबकि अमेरिकी अदालत में यह मामला विचाराधीन है।

📍नई दिल्ली🗓️1 नवंबर 2025 ✍️Asif Khan

 मामला सिर्फ किसी एक व्यक्ति का आर्थिक अपराध नहीं है — यह वैश्विक वित्तीय तंत्र की कमजोरी और भरोसे की चूक की कहानी भी है।

मामले की शुरुआत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंकिम ब्रह्मभट्ट अमेरिका स्थित ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉइस नामक कंपनियों के मालिक हैं।
2020 में HPS Investment Partners नामक फाइनेंस फर्म ने पहली बार उन्हें कर्ज दिया था। शुरुआत में रकम छोटी थी, लेकिन 2024 तक यह बढ़कर लगभग 430 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
इस निवेश का आधा हिस्सा फ्रांसीसी बैंक BNP Paribas ने फाइनेंस किया था।

इन कंपनियों ने दावा किया कि उनके पास हजारों टेलीकॉम क्लाइंट्स हैं, जिनसे भारी इनवॉइस और रिसीवेबल्स आ रहे हैं।
लेकिन जांच में पता चला कि इन क्लाइंट्स में से कई फर्जी थे, और उनके ईमेल-डोमेन भी असली कंपनियों की नकल करके बनाए गए थे।

फर्जी दस्तावेज़ और ईमेल की पोल

वॉल स्ट्रीट जर्नल की जांच में सामने आया कि HPS के एक कर्मचारी को जुलाई 2025 में कुछ संदिग्ध ईमेल मिले।
ईमेल ऐसे डोमेन से आए थे जो देखने में असली लगते थे, लेकिन वे असल में नकली साइट्स से भेजे गए थे।
जब HPS ने यह बात ब्रह्मभट्ट को बताई, तो उन्होंने पहले इसे “सिस्टम की गलती” कहा और बाद में कॉल रिस्पॉन्ड करना बंद कर दिया।

कंपनी के वित्तीय ऑडिट डेलॉयट और CBIZ अकाउंटिंग फर्म ने किए थे। लेकिन फर्जी डेटा और ईमेल पहचानने में उन्हें महीनों लग गए।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि जब जांच टीम न्यू-यॉर्क के गार्डन सिटी स्थित ऑफिस पहुंची, तो वहां ताला लटका हुआ था और कई हफ्तों से कोई स्टाफ नहीं आया था।

दिवालियापन और अदालत की प्रक्रिया

अगस्त 2025 में HPS Investment Partners और अन्य ऋणदाताओं ने अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर किया।
उसी महीने, बैंकिम ब्रह्मभट्ट ने अपनी कंपनियों को Chapter-11 Bankruptcy Protection के तहत पुनर्गठन की याचिका दी।
साथ ही उन्होंने निजी दिवालियापन की अर्जी भी दाखिल की।

रॉयटर्स के अनुसार, इस याचिका में बताया गया कि कंपनियों पर कुल देनदारी लगभग 500 मिलियन डॉलर है।
ब्लैकरॉक (BlackRock), जिसने हाल ही में HPS Investment को अधिग्रहित किया था, अब इस मामले में सबसे बड़ा प्रभावित निवेशक है।

उद्योग और निवेशकों पर असर

यह मामला सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी की बात नहीं है।
यह उस सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, जिसमें बड़े बैंक और फंड बिना पर्याप्त ग्राउंड-चेक के अरबों डॉलर का कर्ज दे देते हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका का प्राइवेट-क्रेडिट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसके ऑडिट और सत्यापन मैकेनिज़्म कमजोर हैं।

वित्तीय जगत में कई विशेषज्ञों ने कहा कि “यह घटना नीरव मोदी और विजय माल्या केस जैसी है — बस लोकेशन बदल गया है।”
फर्जी इनवॉइस और नकली अकाउंट्स के सहारे निवेश हासिल करना भारत-मूल के कुछ कारोबारियों में आम पैटर्न बन चुका है, जो अब वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है।

बैंकिम ब्रह्मभट्ट कौन हैं?

ब्रह्मभट्ट Bankai Group के संस्थापक और चेयरमैन हैं, जो बीते 30 वर्षों से टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग सेवाओं में काम कर रही थी।
उनकी कंपनी एशिया, अफ्रीका और यूरोप में टेलीकॉम ट्रैफिक और इंटरकनेक्ट सेवाएँ देती थी।
उनका LinkedIn प्रोफाइल अब डिलीट हो चुका है, और रिपोर्ट्स कहती हैं कि वे संभवतः अमेरिका छोड़ चुके हैं।

उनके वकील ने सभी आरोपों को “बिना सबूत” बताते हुए कहा कि “यह एक कॉर्पोरेट विवाद है, क्रिमिनल फ्रॉड नहीं।”
हालाँकि अदालत में सुनवाई अभी जारी है।

एडिटोरियल दृष्टिकोण

अब सवाल सिर्फ बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय सिस्टम पर उठता है।
क्या इतने बड़े निवेशक और बैंक केवल डॉक्यूमेंट देखकर भरोसा कर लेते हैं?
क्या तकनीक-आधारित सत्यापन में इतनी कमजोरियाँ हैं कि नकली ईमेल-डोमेन भी पकड़ में न आए?

मेरे नज़र में, यह “कॉरपोरेट गवर्नेंस” की विफलता का मामला है।
HPS और BlackRock जैसे फर्मों की जिम्मेदारी थी कि वे अपनी जोखिम नीति को कड़ा करें।
यह घटना “प्राइवेट लेंडिंग सेक्टर” के लिए चेतावनी है, जहाँ बिना नियामक निगरानी के अरबों डॉलर घूम रहे हैं।

नतीजा 

बैंकिम ब्रह्मभट्ट केस से यह साफ़ होता है कि वित्तीय पारदर्शिता सिर्फ रिपोर्टिंग से नहीं आती, बल्कि नैतिकता से भी जुड़ी है।
अगर यह आरोप साबित होते हैं, तो यह अमेरिका के निजी क्रेडिट सेक्टर का सबसे बड़ा फ्रॉड माना जाएगा।
लेकिन अगर आरोप झूठे हैं, तो यह एक भारतीय-मूल उद्यमी के लिए गंभीर प्रतिष्ठा-हानि का उदाहरण बन जाएगा।

यह कहानी सिर्फ अदालत में नहीं, बल्कि बिज़नेस-एथिक्स की बहस में भी लिखी जा रही है।

ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर