भारत ने अमेरिकी स्टील और एल्युमिनियम टैक्स के जवाब में WTO को प्रस्ताव भेजा। जवाबी टैरिफ से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर असर पड़ सकता है। जानें Shah Times की पूरी रिपोर्ट।
India strikes back Trump-style with counter-tariffs at WTO
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिका द्वारा स्टील और एल्युमिनियम पर भारी आयात शुल्क लगाए जाने के बाद भारत ने अब उसी शैली में जवाब देने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की बातचीत संवेदनशील मोड़ पर है।
अमेरिका ने पहले "राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों" के तहत भारतीय स्टील पर 25% और एल्युमिनियम पर 10% आयात शुल्क लगाया था। 10 फरवरी 2025 को इन शुल्कों में संशोधन किया गया, जो 12 मार्च से प्रभावी हो गया।
भारत का तर्क है कि इन उपायों से करीब $7.6 बिलियन मूल्य के भारतीय उत्पाद प्रभावित हुए हैं, जिन पर $3.82 बिलियन का अतिरिक्त शुल्क लगा।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) को सूचित किया कि वह अमेरिका के इन उपायों के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने का इरादा रखता है। यह प्रस्ताव बुधवार को औपचारिक रूप से WTO को सौंपा गया।
भारत का कहना है कि वह अमेरिका से आयात किए जाने वाले कुछ उत्पादों पर समान राजस्व की वसूली के लिए टैक्स बढ़ाएगा, जिससे व्यापार में संतुलन स्थापित किया जा सके।
“भारत द्वारा प्रस्तावित जवाबी शुल्क अमेरिका से आयात किए गए उन उत्पादों पर लागू होंगे, जिन पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर बराबर राजस्व वसूला जाएगा।” — भारत का WTO में बयान
भारत ने जिन अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने की योजना बनाई है, उनमें शामिल हैं:
पिछले हफ्ते भारत ने ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी विशेष जवाबी शुल्क लगाने का सुझाव दिया था, जिससे अमेरिका के लिए भारत एक महंगा बाजार बन सकता है।
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अमेरिका ने फिलहाल अपने शुल्कों को लागू करने की आखिरी तारीख 1 अगस्त तक बढ़ा दी है। इससे पहले भारत की एक वरिष्ठ अधिकारियों की टीम, जिसमें स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल भी शामिल होंगे, अमेरिका जाकर वार्ता करेगी।
इस वार्ता में कृषि और डेयरी सेक्टर खास फोकस में रहेंगे।
"भारत सरकार के अधिकारियों को व्यापार प्रस्ताव भेजा गया है, और वे अमेरिका के साथ कृषि पर समझौते को लेकर आशावान हैं।"
— इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट
दोनों देशों के बीच एक सीमित व्यापार समझौता (Early Harvest Deal) जल्द हो सकता है।
इस समझौते में भारत अमेरिका के लिए अपने गैर-कृषि उत्पादों जैसे टेक्सटाइल, आईटी और जूते के लिए बाजार खोलने को तैयार है, जबकि अमेरिका से डेयरी और कृषि को बाहर रखा गया है।
अमेरिका ने हाल में ब्राज़ील, बांग्लादेश, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे 20 देशों पर 25-50% टैक्स लगाए हैं, लेकिन अभी तक यूरोपीय संघ और भारत को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है।
“हम भारत के साथ एक ट्रेड डील के बहुत करीब हैं।”
— डोनाल्ड ट्रंप
यह बयान दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन भारत को सहयोगी के रूप में देखता है, लेकिन व्यापारिक मामलों में ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति अब भी सक्रिय है।
भारत की WTO में की गई यह कार्यवाही न सिर्फ अमेरिका को सशक्त संदेश देती है, बल्कि वैश्विक व्यापार मंचों पर भारत की नीतिगत स्पष्टता और जवाबदेही को भी दर्शाती है।
इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल "नरम कूटनीति" के भरोसे नहीं है, बल्कि ट्रंप के अंदाज में ट्रंप को जवाब देने में भी सक्षम है।
भारत का यह कदम दिखाता है कि वह अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से सोचने और अपने हितों की रक्षा करने में तत्पर है। WTO में जवाबी टैरिफ का प्रस्ताव एक सशक्त कूटनीतिक चाल है, जिससे अमेरिका को यह संदेश जाता है कि भारत भी अब वैश्विक मंच पर बराबरी से खेलने को तैयार है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।