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ईरान में महंगाई विरोध प्रदर्शन तेज़,कई शहरों में हिंसा 

None 2026-01-09 11:00:11
ईरान में महंगाई विरोध प्रदर्शन तेज़,कई शहरों में हिंसा 

ईरान में 13वें दिन भी प्रदर्शन, इंटरनेट बंद, गिरफ़्तारियाँ बढ़ीं

 डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा अमेरिका हस्तक्षेप के लिए तैयार

ईरान में महंगाई और आर्थिक दबाव के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी रहे। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार विरोध 100 से अधिक शहरों तक फैल गया है।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

ईरान में महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन और आर्थिक हालात को लेकर शुरू हुआ विरोध 13 दिनों से जारी है। यह आंदोलन 28 दिसंबर को तब शुरू हुआ, जब तेहरान में दुकानदार अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले ईरानी रियाल की तेज़ गिरावट के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे। बीते एक साल में रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुँचा है और महंगाई लगभग 40 फ़ीसदी तक बताई जा रही है। इन परिस्थितियों ने अलग-अलग तबक़ों में असंतोष को बढ़ाया।

प्रदर्शन का फैलाव

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मॉनिटरिंग समूहों के अनुसार विरोध अब ईरान के सभी 31 प्रांतों के 100 से ज़्यादा शहरों और क़स्बों तक फैल चुका है। तेहरान, मशहद, इस्फ़हान, तबरीज़, बाबोल, देज़फुल और अन्य शहरों से बड़े जमावड़ों की रिपोर्ट सामने आई है। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सड़कें ब्लॉक कीं और आगज़नी की घटनाएँ भी दर्ज की गईं।

https://youtube.com/shorts/rQ0hEt44SsE?si=5gMvBzlnL4LPxJNU

नारे और मांगें

वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारियों को देश की धार्मिक सत्ता के ख़िलाफ़ नारे लगाते देखा गया। कुछ स्थानों पर सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई को हटाने की मांग के नारे सुनाई दिए। कई शहरों में देश के आख़िरी शाह के निर्वासित बेटे रज़ा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगे। कुछ समूहों ने “यह आख़िरी लड़ाई है” जैसे नारे लगाए।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंध

स्थिति बिगड़ने के बाद देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। इंटरनेट पर नज़र रखने वाली संस्था नेटब्लॉक्स ने बताया कि ईरान इस समय व्यापक इंटरनेट शटडाउन की स्थिति में है। तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद किया गया और सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है।

हिंसा और हताहत

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत की रिपोर्ट है, जिनमें आठ बच्चे शामिल बताए गए हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी ने अलग आंकड़े जारी करते हुए 34 प्रदर्शनकारियों की मौत की बात कही है। बीबीसी फ़ारसी ने 22 मौतों की पुष्टि की है।
इसके अलावा सुरक्षाबलों के भी हताहत होने की जानकारी है। रिपोर्टों के अनुसार आठ सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या की गई, जबकि कुछ जगह गोलीबारी की घटनाएँ भी सामने आईं।

गिरफ़्तारियाँ

अधिकारियों और मानवाधिकार समूहों के मुताबिक़ 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। कई शहरों में रात के समय छापेमारी की भी खबरें हैं। सरकारी मीडिया ने कुछ मामलों में प्रदर्शन के पैमाने को कम बताते हुए ख़ाली सड़कों के वीडियो दिखाए हैं।

वीडियो और ज़मीनी हालात

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मशहद की मुख्य सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चलते दिखे। पूर्वी और उत्तरी तेहरान से भी इसी तरह के फुटेज सामने आए हैं। कुछ वीडियो में लोग ओवरब्रिज पर चढ़कर निगरानी उपकरण हटाते नज़र आते हैं।
इस्फ़हान में “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे सुनाई दिए, जबकि तबरीज़ और बाबोल में “डरो मत, हम सब साथ हैं” जैसे नारे लगाए गए।

कुर्द बहुल इलाक़े

पश्चिमी प्रांत इलाम, केरमनशाह और लोरेस्तान के कुर्द बहुल शहरों में भी विरोध तेज़ रहा। कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव के अनुसार इन इलाक़ों में कम से कम 17 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। कई शहरों में आम हड़ताल के चलते दुकानें बंद रहीं।

सरकारी बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने सुरक्षाबलों से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से निपटने में संयम बरतने की अपील की। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि किसी भी तरह के ज़बरदस्ती वाले व्यवहार से बचा जाना चाहिए।
सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने पहले कहा था कि अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए, लेकिन उपद्रव करने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जाती है तो अमेरिका हस्तक्षेप के लिए तैयार है।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक टीवी इंटरव्यू में ईरान की मौजूदा स्थिति पर बयान दिया। उनके बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। ईरानी अधिकारियों ने इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

अर्थव्यवस्था और कारण

विशेषज्ञ रिपोर्टों के अनुसार ईरान की अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों, सरकारी बदइंतज़ामी और भ्रष्टाचार का असर पड़ा है। परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिबंधों के कारण विदेशी निवेश और व्यापार प्रभावित हुआ है। इन कारणों से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा, जो विरोध का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

समाज के अलग वर्ग

इन प्रदर्शनों में दुकानदारों के बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हुए। कई शहरों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी देखी गई। बीबीसी को भेजे गए संदेशों में कुछ महिलाओं ने आर्थिक असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता जताई।

ऐतिहासिक संदर्भ

यह आंदोलन 2022 के उस विरोध के बाद सबसे व्यापक माना जा रहा है, जो हिरासत में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुआ था। उससे पहले 2009 में विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।

मौजूदा स्थिति

गुरुवार रात तक कई शहरों में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और हालात पर नज़र रखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों को लेकर स्पष्टता नहीं है, जबकि अलग-अलग संगठनों के आंकड़े अलग हैं।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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