मुजफ्फरनगर में आबकारी विभाग ने मदिरा दुकानों पर स्टॉक, पीओएस बिक्री और क्यूआर कोड जांचे। विभाग के मुताबिक, तय कीमत पर बिक्री जांचने के लिए गोपनीय टेस्ट परचेज भी कराए गए।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 21/10/2026
✍️ Wasi Siddiqui
मदिरा दुकानों पर बिक्री और स्टॉक की पड़ताल
मुजफ्फरनगर में आबकारी विभाग ने मदिरा दुकानों का निरीक्षण कर बिक्री प्रक्रिया, उपलब्ध स्टॉक और निर्धारित कीमतों की जांच की। डीएम वार रूम से साझा विभागीय प्रेस नोट के मुताबिक, जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी निरीक्षकों ने यह निरीक्षण किया। इसका मकसद बिक्री संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना था।
प्रेस नोट में निरीक्षण के लिए “विगत दिवस” लिखा गया है। विज्ञप्ति जारी होने की तारीख़ उपलब्ध नहीं होने से निरीक्षण की सटीक तारीख़ तय नहीं होती।
पीओएस से बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश
विभाग के अनुसार, दुकानों पर पीओएस मशीन से 100 प्रतिशत मदिरा बिक्री सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मौके पर उपलब्ध स्टॉक का स्टॉक रजिस्टर में दर्ज विवरण से भौतिक मिलान भी किया गया।
हालांकि, प्रेस नोट में यह नहीं बताया गया कि कितनी दुकानों का निरीक्षण हुआ और स्टॉक मिलान में कोई अंतर मिला या नहीं।
तय कीमत जांचने के लिए गोपनीय खरीद
आबकारी विभाग के मुताबिक, मदिरा निर्धारित मूल्य पर बिक रही है या नहीं, इसकी पड़ताल के लिए गोपनीय टेस्ट परचेज कराए गए। इस प्रक्रिया में खरीद के ज़रिए वसूली जा रही कीमत की जांच की गई।
विज्ञप्ति में टेस्ट परचेज के नतीजे नहीं दिए गए हैं। इसलिए अधिक कीमत वसूलने या सभी दुकानों पर सही कीमत मिलने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बोतलों के क्यूआर कोड भी जांचे
विभागीय जानकारी के अनुसार, स्टॉक में से कुछ बोतलें रैंडम तरीके से चुनी गईं। उन पर लगे क्यूआर कोड विभागीय ऐप से जांचे गए।
दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को लगातार चालू रखने के निर्देश भी दिए गए। प्रेस नोट में कैमरे बंद मिलने या क्यूआर कोड में गड़बड़ी सामने आने का उल्लेख नहीं है।
निरीक्षण से जुड़े अहम तथ्य
• विभाग के मुताबिक, जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी निरीक्षक जांच में शामिल रहे।
• पीओएस मशीन से 100 प्रतिशत बिक्री सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
• उपलब्ध स्टॉक का रजिस्टर से भौतिक सत्यापन हुआ।
• निर्धारित कीमत की जांच के लिए गोपनीय टेस्ट परचेज कराए गए।
• चुनी गई बोतलों के क्यूआर कोड विभागीय ऐप से जांचे गए।
• सीसीटीवी कैमरों को लगातार चालू रखने के निर्देश दिए गए।
विभाग ने किसके निर्देशों का दिया हवाला?
प्रेस नोट के अनुसार, निरीक्षण अपर मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के निर्देशों के क्रम में हुआ। विभाग ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरनगर के निर्देशन का भी उल्लेख किया है।
विज्ञप्ति में संबंधित अधिकारियों के व्यक्तिगत नाम नहीं दिए गए हैं। कोई अलग प्रत्यक्ष बयान या विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
प्रेस नोट में बिक्री के रिकॉर्ड, स्टॉक, कीमत और सीसीटीवी की निगरानी पर जोर है। हालांकि, इसमें किसी खास शिकायत, पिछले उल्लंघन या विशेष अभियान की अवधि का उल्लेख नहीं है। किसी अधिनियम या नियम की धारा भी उद्धृत नहीं की गई है।
विभागीय सूचना में शिकायत के लिए जन शिकायत ऐप डाउनलोड करने का लिंक साझा किया गया है। इस लिंक की तकनीकी प्रामाणिकता और ऐप की उपलब्धता की स्वतंत्र जांच इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
आंकड़ों और तारीख़ों की स्थिति
प्रेस नोट में 100 प्रतिशत बिक्री पीओएस से सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसे हासिल हो चुका परिणाम नहीं बताया गया है।
निरीक्षित दुकानों की संख्या, जांची गई बोतलों की संख्या, निरीक्षण की तारीख़ और किसी जुर्माने या नोटिस का विवरण उपलब्ध नहीं है।
आगे की कार्रवाई पर क्या जानकारी है?
अगले निरीक्षण की तारीख़ या किसी प्रस्तावित कार्रवाई का ऐलान प्रेस नोट में नहीं है। जांच के नतीजे स्पष्ट होने के लिए दुकानवार विवरण, टेस्ट परचेज के परिणाम और स्टॉक सत्यापन की रिपोर्ट अहम होगी।
फिलहाल विभागीय सूचना निरीक्षण और निर्देशों की पुष्टि करती है। इससे किसी दुकानदार के खिलाफ उल्लंघन साबित होने या सभी दुकानों को क्लीन चिट मिलने का निष्कर्ष नहीं निकलता।
रिकॉर्ड और मौके के स्टॉक का मिलान अहम
पीओएस रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक की तुलना बिक्री के हिसाब की पड़ताल में मदद करती है। गोपनीय टेस्ट परचेज का मकसद ग्राहक से वसूली जा रही कीमत जांचना है। प्रेस नोट इन प्रक्रियाओं का उल्लेख करता है, लेकिन उनके परिणाम नहीं बताता।
नतीजों का खुलासा जवाबदेही बढ़ाएगा
निरीक्षण की प्रभावशीलता समझने के लिए केवल जांच होने की सूचना पर्याप्त नहीं है। कितनी दुकानों में क्या मिला और उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह जानकारी भी ज़रूरी है। उपलब्ध सामग्री के आधार पर किसी कारोबारी के खिलाफ आरोप या पूरे जिले में नियमों के पालन का दावा उचित नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।