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2026 में निवेश की राह: शेयर, सोना, प्रॉपर्टी पर ताजा तस्वीर

None 2026-01-04 18:36:21
2026 में निवेश की राह: शेयर, सोना, प्रॉपर्टी पर ताजा तस्वीर

निवेश प्लानिंग 2026: म्यूचुअल फंड से एफडी तक विकल्प


नया साल शुरू होने के साथ ही निवेशकों के सामने कई विकल्प मौजूद हैं।
पिछले साल के रिटर्न और मौजूदा बाजार संकेतों के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास पर नजर डाली जा रही है।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan

नया साल और निवेश की शुरुआत

नया साल 2026 शुरू हो चुका है और इसके साथ ही निवेश को लेकर योजना बनाने का सिलसिला भी तेज हो गया है। बड़ी संख्या में लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बीते साल के प्रदर्शन के बाद इस साल कौन से विकल्प बेहतर रह सकते हैं। पिछले साल 2025 में अलग-अलग एसेट क्लास ने अलग तरह का रिटर्न दिया, जिससे निवेशकों की सोच भी बदली है।

निवेश से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी एक साल का प्रदर्शन अगले साल की गारंटी नहीं होता। इसी वजह से निवेश से पहले मौजूदा हालात, आंकड़े और बाजार की स्थिति को देखना जरूरी माना जा रहा है।

शेयर बाजार की स्थिति

साल 2025 में शेयर बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने करीब 8 से 10 फीसदी के बीच रिटर्न दिया। कई सेक्टर में सीमित तेजी देखने को मिली, जबकि कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई।

बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार डिफेंस सेक्टर, मेटल सेक्टर और बैंकिंग सेक्टर में 2026 को लेकर उम्मीद जताई जा रही है। देश में मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जिससे इन सेक्टरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

आईटी सेक्टर की बात करें तो पिछले साल इसमें दबाव देखने को मिला। ग्लोबल डिमांड में सुस्ती और लागत बढ़ने जैसे कारणों से आईटी शेयरों में सीमित प्रदर्शन रहा। वहीं देश की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले साल तेज उछाल देखा गया और इसमें करीब 25 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।

डिफेंस और बैंकिंग सेक्टर पर फोकस

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश डिफेंस प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नई डील, घरेलू उत्पादन और निर्यात पर जोर से इस सेक्टर में गतिविधि बढ़ी है।

बैंकिंग सेक्टर में भी बैलेंस शीट मजबूत होने और एनपीए में कमी की रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी और निजी दोनों बैंकों के नतीजों पर निवेशकों की नजर है।

प्रॉपर्टी बाजार की तस्वीर

रियल एस्टेट सेक्टर में बीते कुछ सालों में तेज बदलाव देखा गया है। स्क्वायर यार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले छह साल में मुंबई, बेंगलुरु, एनसीआर और पुणे जैसे बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें 97 से 115 फीसदी तक बढ़ीं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 में प्रॉपर्टी की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। हालांकि ब्याज दरों में संभावित कटौती से होम लोन सस्ते होने की उम्मीद है, जिससे मांग बढ़ सकती है।

ग्रेटर नोएडा, नवी मुंबई और उभरते शहरी इलाकों में निवेश को लेकर गतिविधि बढ़ी है। डेवलपर्स और ब्रोकरों के मुताबिक इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का असर दिख रहा है।

सोना और चांदी का हाल

कीमती धातुओं ने 2025 में निवेशकों को बड़ा रिटर्न दिया। सोने की कीमत में 70 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी ने करीब 170 फीसदी का रिटर्न दिया।

साल के आखिरी महीनों में दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई। चांदी एक समय 2.50 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंची, लेकिन बाद में यह 2.25 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे आ गई।

बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अनिश्चितता और निवेश की मांग की वजह से इन धातुओं में रुचि बनी हुई है। खासकर चांदी के मामले में औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति को अहम वजह माना जा रहा है।

म्यूचुअल फंड की स्थिति

साल 2025 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने उतार-चढ़ाव भरे बाजार के बावजूद मजबूती दिखाई। नवंबर 2025 तक कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट 80 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 19 फीसदी ज्यादा था।

एसआईपी के जरिए हर महीने करीब 29,000 करोड़ रुपये का निवेश आया। विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद घरेलू निवेश से इंडस्ट्री को सहारा मिला।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। निवेशक कम लागत और लंबे समय के नजरिए से इन फंड्स में रुचि दिखा रहे हैं।

क्रिप्टोकरेंसी पर नजर

क्रिप्टोकरेंसी के लिए 2025 का साल उतार-चढ़ाव भरा रहा। बिटकॉइन में साल के दौरान ऑल टाइम हाई दर्ज किया गया, जब कीमत 1.20 लाख डॉलर के पार गई। हालांकि साल के अंत तक इसमें करीब 6 फीसदी की गिरावट देखी गई और कीमत 90 हजार डॉलर के आसपास रही।

कुछ छोटी क्रिप्टोकरेंसी ने सीमित समय में तेज रिटर्न दिया, लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का असर इस बाजार पर पड़ता दिखा है।

फिक्स्ड डिपॉजिट का विकल्प

रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला रिटर्न सीमित हुआ है। दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद आगे भी दरों में कमी की संभावना जताई जा रही है।

इसके बावजूद फिक्स्ड रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए एफडी को सुरक्षित विकल्प माना जाता है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह अब भी एक अहम साधन बना हुआ है।

छोटी बचत योजनाएं

सरकार ने मार्च तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर रखा है। सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम पर 8.2 फीसदी ब्याज जारी है।

पीपीएफ पर 7.1 फीसदी, एनएससी पर 7.7 फीसदी और किसान विकास पत्र पर 7.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। सेविंग्स डिपॉजिट और टाइम डिपॉजिट की दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इमरजेंसी फंड की जरूरत

निवेश से पहले इमरजेंसी फंड बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। आर्थिक संकट या अचानक खर्च के समय यह फंड सहारा बनता है।

जानकारों के मुताबिक इमरजेंसी फंड कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर होना चाहिए और इसे ऐसी जगह रखा जाना चाहिए, जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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