अमेरिकी अधिकारियों के दरमियान ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चा चल रही है। इसी बीच ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया है।
📍 Washington ✍️ Asif Khan
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन में वरिष्ठ अधिकारी ईरान को लेकर विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। इन बैठकों में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दी गई चेतावनियों के विचारात्मक पहलुओं को कैसे अमल में लाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चर्चाओं का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने हमला करने का अंतिम निर्णय ले लिया है, बल्कि यह केवल प्लानिंग और कंटिंजेंसी विकल्पों तक सीमित है।
रिपोर्ट के अनुसार इन बैठकों में यह भी देखा जा रहा है कि ईरान के किन मिलिटरी लोकेशंस को टारगेट किया जा सकता है। एयर स्ट्राइक के विकल्पों पर चर्चा हुई है, हालांकि किसी भी तरह की ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट की पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका की ओर से अभी तक न तो कोई वेपन सिस्टम भेजा गया है और न ही किसी फोर्स को मूव किया गया है।
व्हाइट हाउस की स्थिति
व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रशासन ईरान की मौजूदा सिचुएशन पर क्लोज मॉनिटरिंग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के जरिए ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि ईरान एक ऐसी फ्रीडम की ओर बढ़ रहा है जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा, और अमेरिका मदद के लिए तैयार है।
इन पोस्ट्स के बाद इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पब्लिक स्टेटमेंट में प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लेख किया है। हालांकि अमेरिका की ओर से यह भी कहा गया है कि किसी भी मिलिटरी स्टेप से पहले सभी डिप्लोमैटिक और स्ट्रैटेजिक पहलुओं को देखा जाएगा।
वॉशिंगटन से आने वाले बयान इस आग में एक अलग तरह का ईंधन डाल रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह कहना कि अमेरिका ईरानी लोगों की मदद के लिए तैयार है, बाहर से देखने में समर्थन लगता है। लेकिन ईरान के भीतर इसे विदेशी दखल के तौर पर देखा जाता है।
यहां एक दिलचस्प विरोधाभास है। एक तरफ अमेरिका खुद को आजादी का समर्थक बताता है, दूसरी तरफ उसका हर बयान ईरानी सरकार को यह कहने का मौका देता है कि यह सब बाहर की साजिश है। यह वही पुरानी कहानी है जहां एक तरफ लोग बदलाव चाहते हैं और दूसरी तरफ सत्ता उन्हें देशद्रोह से जोड़ देती है।
ईरान में बढ़ते विरोध
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध अब एक बड़े राजनीतिक मूवमेंट का रूप ले चुके हैं। शुरुआती प्रदर्शन महंगाई, बेरोजगारी और ईरान की करेंसी की गिरती वैल्यू को लेकर थे, लेकिन अब ये सीधे इस्लामिक गवर्नमेंट की वैधता को चुनौती देने लगे हैं। तेहरान, तबरेज़, मशहद और कुर्दिश इलाकों सहित 100 से ज्यादा शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
शनिवार 10 जनवरी को सरकार की तरफ से बयानबाजी तेज हो गई। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति को “ईश्वर का शत्रु” माना जा सकता है और उसे मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है। ईरानी स्टेट टेलीविजन ने भी यह कहा कि दंगाइयों की मदद करने वालों पर वही आरोप लगाए जाएंगे।
इंटरनेट और संचार पर रोक
स्थिति को कंट्रोल में लाने के लिए ईरान सरकार ने 7 जनवरी से देशभर में इंटरनेट और मोबाइल सर्विसेज को बंद कर दिया है। इंटरनेशनल कॉलिंग भी लगभग पूरी तरह से रोकी गई है। इसके चलते बाहर की दुनिया के लिए ईरान के अंदर की स्थिति की जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिन्हें इंटरनेशनल मीडिया ने वेरिफाई किया है।
सरकारी मीडिया का दावा है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में शांति है, लेकिन इन वीडियो में कई शहरों में बड़ी भीड़ और हिंसा के सीन दिखाई दे रहे हैं।
हताहतों और गिरफ्तारियों का आंकड़ा
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 78 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें लगभग 50 प्रदर्शनकारी और 15 सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। इंटरनेशनल मीडिया का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है, क्योंकि कई अस्पतालों से बड़ी संख्या में घायल और मृत लोगों के मामले सामने आए हैं।
तेहरान के कुछ हॉस्पिटल्स में एक ही रात में सैकड़ों लोगों के इलाज और शव लाए जाने की जानकारी दी गई है, हालांकि सरकारी आंकड़ों में इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
सड़कों पर हालात
सीएनएन से बात करने वाले कई लोगों ने बताया कि तेहरान की सड़कों पर बड़ी भीड़ के साथ-साथ हिंसा भी देखी गई। एक महिला ने अस्पताल में “एक-दूसरे पर ताबूतों की तरह पड़े हुए शव” देखने का दावा किया है।
शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें तेहरान के पुनक स्क्वायर में हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ नजर आई। वीडियो में लोग सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए और बर्तन बजाते हुए दिखे। कड़ाके की ठंड के बावजूद वहां मौजूद लोग लंबे समय तक मैदान में डटे रहे।
सर्वोच्च नेता और सरकार की प्रतिक्रिया
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के साथ जुड़े होने का आरोप लगाया है। सरकारी टेलीविजन पर उन्होंने कहा कि देश के अंदर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है।
खामेनेई ने तत्काल कार्रवाई की बात कही है और सुरक्षा एजेंसियों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कई शहरों में अरेस्ट ड्राइव तेज की गई है।
विदेशी हस्तक्षेप के आरोप
ईरानी मीडिया ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया है कि वे इन विरोधों को हवा दे रहे हैं। सरकार समर्थक चैनलों पर यह कहा गया कि विदेशी एजेंसियां सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों को भड़का रही हैं।
इसी बीच ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की इंटेलिजेंस ब्रांच ने एक विदेशी नागरिक को इजरायल के लिए जासूसी के शक में गिरफ्तार करने की सूचना दी है। अर्ध-आधिकारिक तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति पर ईरान के सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक इंटरेस्ट के खिलाफ काम करने का आरोप है।
निर्वासित क्राउन प्रिंस की अपील
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने और पुराने शाही प्रतीकों का इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि मौजूदा सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का समय है।
पहलवी ने यह भी दावा किया है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए भाड़े के सैनिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है और कई सुरक्षा बल आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
अमेरिका की भूमिका पर नजर
अमेरिका की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प की पोस्ट और विदेश मंत्री रुबियो के बयान के बाद ईरानी सरकार ने अपनी चेतावनियां तेज कर दी हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी तरह की मिलिटरी मूवमेंट नहीं हुई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लानिंग का मतलब सीधे एक्शन नहीं होता। इसके बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी से इंटरनेशनल मार्केट्स और डिप्लोमैटिक सर्किल्स में हलचल बढ़ी है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन ईरान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मानवाधिकार समूहों ने इंटरनेट बंदी और व्यापक गिरफ्तारियों पर चिंता जताई है।
फिलहाल ईरान के अंदर हालात तेजी से बदल रहे हैं और बाहर से मिलने वाली जानकारी सीमित है। अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से आने वाले अगले बयानों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।