ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। भले ही दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन ज़मीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में इजरायल की ओर से किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों में 138 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है। जवाब में, ईरान ने शनिवार रात को इजरायल के हाइफा शहर पर मिसाइल हमले किए, जिससे यह तनाव खुली जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।
शनिवार रात, ईरान ने इजरायल के हाइफा शहर की ओर एक साथ 70 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन हमलों में 14 इजरायली नागरिक घायल हुए, और एक महिला की मौत की खबर भी सामने आई, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। ईरान का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई थी, जो इजरायली आक्रामकता के विरुद्ध थी।
ईरानी हमलों से पहले ही सरकारी टेलीविजन पर चेतावनी जारी कर दी गई थी, जिसके बाद इजरायल ने अपनी सुरक्षा कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। नागरिकों को बंकरों में जाने की अपील की गई और डिफेंस अलर्ट को रेड जोन तक पहुंचा दिया गया।
ईरानी हमले के जवाब में इजरायल ने तेहरान में एक ऑयल डिपो और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के निवास क्षेत्र को निशाना बनाया। इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पर भी हमला हुआ। वहीं, यमन की राजधानी सना में इजरायल ने एक हूती नेता को निशाना बनाकर मार गिराया, जिससे यह संघर्ष क्षेत्रीय सीमा पार कर गया।
ईरान ने दावा किया कि उसने इजरायल के दो F-35 स्टील्थ फाइटर जेट मार गिराए और एक महिला पायलट को बंदी बना लिया है। हालांकि, इजरायल ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक सूचना युद्ध (Information Warfare) का हिस्सा हो सकता है, जैसा भारत-पाक युद्ध के समय पाकिस्तान ने किया था।
13 जून को, इजरायल ने 'ऑपरेशन राइजिंग लॉयन' के तहत ईरान के चार परमाणु संयंत्रों और एक बैलिस्टिक मिसाइल बेस पर हमला किया। करीब 200 फाइटर जेट के इस हमले में ईरान के टॉप मिलिट्री कमांडर्स और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया गया, जिससे ईरान को रणनीतिक नुकसान पहुंचा।
इस संकट के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर बातचीत हुई। पुतिन ने संघर्ष रोकने की अपील की, जबकि ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर टिप्पणी करते हुए उसे पहले खत्म करने की सलाह दी। इसी दौरान ईरान के राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोआन से भी बातचीत की।
इजरायल का दावा है कि ईरान ने 15 परमाणु बम तैयार कर लिए थे, जिससे उसके सामने "अस्तित्व का संकट" खड़ा हो गया था। इसलिए उसके पास सैन्य कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। वहीं, ईरान की ओर से भी इस दावे का खंडन नहीं किया गया है।
ईरान और इजरायल के बीच चल रही यह तनावपूर्ण स्थिति अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। इसके दुष्परिणाम मध्य पूर्व के समस्त क्षेत्र को झकझोर सकते हैं। इस समय वैश्विक नेताओं की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस संघर्ष को टालने के लिए तुरंत और निर्णायक कदम उठाएं। वरना, यह जंग न केवल राजनीतिक बल्कि मानवीय त्रासदी में बदल सकती है।
तेहरान/हाइफा: ईरान और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। शनिवार देर रात एक बार फिर दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइलों की बारिश कर दी। बीते 48 घंटों में यह संघर्ष अब भीषण युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है।
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने तेहरान स्थित ईरानी रक्षा मंत्रालय, बुशहर ऑयल डिपो, और गैस रिफाइनरियों समेत 150 से अधिक सामरिक ठिकानों को टारगेट किया है। इनमें कई न्यूक्लियर फैसिलिटीज भी शामिल हैं।
अब तक की लड़ाई में 138 ईरानी नागरिकों और सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में 9 न्यूक्लियर वैज्ञानिक और 20 से ज्यादा हाई-रैंकिंग कमांडर भी शामिल हैं। ईरान ने तेहरान सहित 7 प्रांतों में एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में 150 से ज्यादा मिसाइलें इजराइल की ओर दागीं। इन हमलों में 7 इजराइली नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 130 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उन्होंने इजराइल के 3 अत्याधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।