ईरान-इजरायल युद्ध में बड़ा मोड़, इजरायल ने अराक न्यूक्लियर रिएक्टर पर हमला कर प्लूटोनियम उत्पादन को किया तबाह। पढ़ें पूरा विश्लेषण।
ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। बीते कुछ हफ्तों में जिस तरह से इजरायल ने ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों को टारगेट किया है, उससे यह सवाल उठना लाज़िमी है — क्या ईरान का परमाणु हथियार बनाने का सपना अधूरा रह जाएगा? विशेष रूप से अराक रिएक्टर पर इजरायल का ताजा हमला इस दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
अराक रिएक्टर:
ईरान का यह हेवी वाटर न्यूक्लियर रिएक्टर वर्षों से अंतरराष्ट्रीय नजरों में रहा है। 1997 में इसका निर्माण शुरू हुआ था और इसका मूल उद्देश्य प्लूटोनियम-239 का निर्माण था — जो परमाणु बम के लिए जरूरी होता है।
इजरायल का हमला:
आईडीएफ (Israel Defense Forces) ने खुफिया सूचना के आधार पर अराक रिएक्टर पर हमला किया। इस हमले में 40 से अधिक फाइटर जेट्स ने 100 से ज्यादा बम गिराए। प्लूटोनियम उत्पादन के लिए जिम्मेदार यूनिट्स को निशाना बनाया गया, जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तगड़ा झटका लगा।
ईरान ने अब तक कई न्यूक्लियर फैसिलिटीज खड़ी की थीं:
इन सभी केंद्रों को अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियां “थ्रेट प्वाइंट्स” मानती रही हैं।
2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) में अराक रिएक्टर को निष्क्रिय करने की शर्त रखी गई थी — जिसे ईरान ने आंशिक रूप से माना लेकिन अब दोबारा एक्टिवेशन की कोशिशें हो रही थीं। यही कारण है कि यह इजरायली हमले का प्रमुख टारगेट बना।
ईरान से इजरायल की दूरी: 1,300-1,500 किमी
बैलिस्टिक मिसाइल (Fateh-1, Sejjil):
क्रूज मिसाइल (Ya-Ali, Sumar):
ड्रोन्स और UAVs:
Iron Dome:
David’s Sling:
Arrow-2 और Arrow-3:
प्रभाव:
ईरान द्वारा छोड़ी गई 370 मिसाइलों में से ज़्यादातर को इन सिस्टम्स ने रास्ते में ही रोक लिया।
| पक्ष | फाइटर जेट्स | कुल एयरक्राफ्ट | स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट | अटैक हेलीकॉप्टर |
|---|---|---|---|---|
| अमेरिका | 1790 | 13,000+ | 647 | 1002 |
| इजरायल | 240 | 611 | 19 | 48 |
| ईरान | 188 | 551 | 10 | 13 |
विश्लेषण:
ईरान के पास स्ट्रैटेजिक लॉन्ग रेंज मिसाइलों की भारी कमी है। Jericho-3 और Minuteman जैसी मिसाइलों के मुकाबले Sejjil-2 कहीं नहीं टिकती।
ईरान की मिसाइलों को इजरायल पहुंचने के लिए इन देशों से होकर गुजरना होता है:
ये सभी देश ईरानी मिसाइलों के लिए चुनौती हैं, क्योंकि इनमें से कुछ की सीमाएं अमेरिका और इजरायल समर्थित हैं।
इजरायल का 'Earth-Penetrating Weapon' यानी बंकर बस्टर ईरान के पर्वतीय इलाकों में बने परमाणु ठिकानों को तबाह करने की क्षमता रखता है।
ईरान की चुनौती:
इजरायल-अमेरिका की रणनीति:
ईरान तकनीकी रूप से परमाणु बम के काफी करीब है। लेकिन लगातार होती इजरायली स्ट्राइक्स, अमेरिकी खुफिया सपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने उसके इस मिशन को लगभग अधर में लटका दिया है।
अराक, फोर्डो और नतांज जैसे स्थलों पर हमले यह संकेत देते हैं कि इजरायल ने अब कूटनीति को किनारे कर सैन्य विकल्प को प्राथमिकता दे दी है।
ऐसे में सवाल यह है — क्या ईरान परमाणु शक्ति बनेगा? जवाब है — शायद नहीं, कम-से-कम निकट भविष्य में तो नहीं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।