अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली अधिकारी और बाशिंदों की घुसपैठ पर ईरान और मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने निंदा की है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने तत्काल रोक की मांग की।
यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली अधिकारी और कुछ बाशिंदों की मौजूदगी को लेकर क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने अल-अक्सा समेत इस्लामी पवित्र स्थलों से जुड़ी कार्रवाइयों की निंदा की है, जबकि मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने ताजा घुसपैठ को रोकने की मांग की है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव और मुस्लिम उलेमा परिषद के अध्यक्ष शेख मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा ने कहा कि अल-अक्सा के प्रांगण में हुई कार्रवाई तनाव बढ़ाने वाली है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियां निभाने की अपील की।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के आधिकारिक बयान के मुताबिक, एक इजरायली अधिकारी और कुछ चरमपंथी बाशिंदों ने इजरायली सुरक्षा बलों की सुरक्षा में अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में प्रवेश किया। संगठन ने इसे पवित्र स्थल की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति से जुड़े मौजूदा प्रबंध के खिलाफ बताया।
अल-ईसा ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां दुनियाभर के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काती हैं। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसी घटनाओं को तत्काल रोकने की मांग की है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने अपनी प्रतिक्रिया में अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों तथा फिलिस्तीनी क्षेत्रों में पवित्र स्थलों की स्थिति से जुड़े नियमों का भी हवाला दिया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने 21 सितंबर को जारी बयान में गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति के साथ अल-अक्सा मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम पर भी इजरायल की आलोचना की। तेहरान ने अल-अक्सा के खिलाफ कार्रवाई और बुराक दीवार से जुड़े घटनाक्रम की निंदा की।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा रोकने और फिलिस्तीनी इलाकों में कब्जे तथा भूमि अधिग्रहण को समाप्त करने के लिए कार्रवाई की अपील की है। यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से पहले आया है।
इससे पहले 18 सितंबर को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा था कि इस्लामी पवित्र स्थलों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर मक्का, मदीना और अल-अक्सा मस्जिद का उल्लेख किया था।
बकाई ने पवित्र स्थलों के मुद्दे को राजनीतिक या सुरक्षा संबंधी तनाव बढ़ाने के लिए इस्तेमाल न करने की अपील भी की थी। उनका बयान उस समय आया था जब क्षेत्र में पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी थे।
अल-अक्सा मस्जिद परिसर यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है और इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल है। यह स्थल यहूदी धर्म में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और वहां की धार्मिक व्यवस्था लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के सबसे संवेदनशील मुद्दों में रही है।
परिसर की स्थिति को लेकर ऐतिहासिक व्यवस्था में बदलाव की आशंका क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक चिंता पैदा करती रही है। अगस्त में जॉर्डन ने भी अल-अक्सा को लेकर अरब और इस्लामी देशों की आपात बैठक बुलाई थी।
अल-अक्सा परिसर में इजरायली अधिकारियों और बाशिंदों की गतिविधियों को लेकर पहले भी अरब और मुस्लिम देशों ने विरोध दर्ज कराया है। जुलाई में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन, कतर, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और तुर्किये समेत कई देशों ने ऐसी कार्रवाइयों की निंदा की थी।
उस समय क्षेत्रीय देशों ने कहा था कि ऐसी कार्रवाइयां पवित्र स्थल की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने तनाव कम करने और धार्मिक स्थलों तक पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की थी।
21 सितंबर को सऊदी अरब ने भी अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में इजरायली अधिकारी और बाशिंदों के प्रवेश की निंदा की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे मुसलमानों के लिए उकसावे वाली कार्रवाई बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की।
कतर भी इससे पहले 15 सितंबर को अल-अक्सा में लगातार हो रही बाशिंदों की घुसपैठ पर विरोध दर्ज करा चुका है। कतर ने ऐसी कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के तौर पर पेश किया।
अल-अक्सा मस्जिद का मुद्दा इजरायल और फिलिस्तीन के बीच राजनीतिक विवाद से आगे बढ़कर पूरे पश्चिम एशिया में संवेदनशील धार्मिक और कूटनीतिक विषय बन चुका है।
ईरान की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में पहले से कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी फिलिस्तीनी मुद्दे को उठाने की तैयारी की है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग की प्रतिक्रिया का फोकस धार्मिक स्थल की सुरक्षा और मौजूदा स्थिति को बनाए रखने पर है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
अब निगाह इस बात पर है कि अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली प्रशासन की आगामी कार्रवाइयां क्या रहती हैं और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।
मौजूदा बयानों में ईरान और मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने अलग-अलग स्तर पर विरोध दर्ज कराया है, लेकिन दोनों प्रतिक्रियाओं का केंद्र अल-अक्सा मस्जिद की स्थिति और धार्मिक स्थलों से जुड़े तनाव को रोकना है।
इस घटनाक्रम का असर फिलिस्तीन मुद्दे पर होने वाली कूटनीतिक बातचीत पर भी पड़ सकता है। खासकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अल-अक्सा, यरुशलम और फिलिस्तीनी इलाकों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय बहस के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।