इजराइल-ईरान युद्ध में मोसाद पर हमले से बदले समीकरण | ऑपरेशन राइजिंग लॉयन बनाम ट्रू प्रॉमिस 3 | 100 घंटे में क्या बदला?
मिडिल ईस्ट एक बार फिर जंग के मुहाने पर है। इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी यह ताजा लड़ाई केवल दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे हैं क्षेत्रीय वर्चस्व, वैश्विक शक्ति संतुलन, परमाणु हथियार की रेस, और खुफिया तंत्र के टकराव की पूरी पटकथा।
12 जून से शुरू हुए इस संघर्ष ने 100 घंटों में जो विनाश मचाया है, उसने सिर्फ जमीनी स्थिति ही नहीं बदली, बल्कि रणनीतिक समीकरण भी हिला दिए हैं।
इजराइल ने ‘Operation Rising Lion’ के तहत ईरान के न्यूक्लियर और मिलिट्री ठिकानों पर हमला शुरू किया। इसमें उन्होंने Natanz, Fordow और Arak जैसे संवर्धन स्थलों को टारगेट किया, जो ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का आधार माने जाते हैं।
इजराइल ने:
13 जून को ईरान ने ‘True Promise 3’ के नाम से जवाबी हमला शुरू किया। इसके तहत:
| पक्ष | मृतक | घायल | निशाने | मुख्य हानि |
|---|---|---|---|---|
| ईरान | 224+ | 1,481+ | सैन्य ठिकाने, वैज्ञानिक | डिप्टी कमांडर, वैज्ञानिक, एयरबेस |
| इजराइल | 24+ | 600+ | मोसाद HQ, नागरिक क्षेत्र | मोसाद व AMAN नुकसान, नागरिक क्षति |
इजराइल की रक्षा प्रणाली - आयरन डोम, एरो और डेविड स्लिंग ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया, जिससे उनके यहां हताहत कम रहे।
मोसाद (Mossad) और ईरान की IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) के बीच दशकों से छिपी जंग अब सार्वजनिक हो गई है। मोसाद को अब तक दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियों में शुमार किया जाता रहा है, लेकिन इस बार उनके ही मुख्यालय पर हमला उनकी कमजोरी भी दर्शाता है।
ईरान का यह दावा, कि उसने मोसाद के कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है, इजराइल के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है।
भारत सहित अन्य एशियाई देशों ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में अशांति का सीधा असर तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की मानें तो यह लड़ाई अभी पारंपरिक हथियारों तक सीमित है, लेकिन अगर दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार रहा, तो परमाणु टकराव की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर उसके न्यूक्लियर साइट्स पर दोबारा हमला हुआ, तो उसका जवाब "निर्णायक और परम" होगा।
मगर जितना बड़ा यह युद्ध है, उससे कहीं ज्यादा गंभीर इसके असर हैं। यह केवल मिसाइलों और ड्रोन की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता, ऊर्जा नीति, वैश्विक शांति और कूटनीतिक संतुलन की लड़ाई है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।