ईरान ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबद्धताओं और तेहरान की शर्तों के पूरा होने तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। अमेरिका के साथ पिछली बातचीत की प्रक्रिया में लौटने से भी इनकार किया गया है।
तेहरान | 21 सितंबर 2026
By Mohd Haris
होर्मुज़ पर ईरान का सख्त रुख
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से सामान्य आवाजाही के लिए खोलने और अमेरिका के साथ पिछली बातचीत की रूपरेखा में लौटने से इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक मौजूदा स्थिति में बदलाव की गुंजाइश नहीं है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि तेहरान ने अपनी मांगें मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। उनके मुताबिक बातचीत की बहाली और होर्मुज़ को खोलने का फैसला इन शर्तों की पूर्ति से जुड़ा हुआ है।
क्या कहा ईरान ने
मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के बयान के मुताबिक ईरान पहले की बातचीत की व्यवस्था में तब तक वापस नहीं जाएगा, जब तक ईरानी पक्ष के मुताबिक उसके अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता।
यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान होने की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन बातचीत की अगली रूपरेखा को लेकर सहमति नहीं बनी है।
होर्मुज़ क्यों अहम है
होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल है। इस रास्ते पर आवाजाही में लंबे समय तक रुकावट रहने से तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति, समुद्री परिवहन और बीमा लागत पर असर पड़ सकता है।
मौजूदा तनाव के दौरान जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ऊर्जा बाजार पहले से ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री सुरक्षा संकट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अमेरिका की नाकेबंदी और समुद्री दबाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने 20 सितंबर तक 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला है। अमेरिका के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकेबंदी को लागू कराने के लिए की गई।
इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इसे अमेरिकी सैन्य पक्ष का दावा मानकर देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ ईरान की चेतावनी
ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने भी चेतावनी दी है कि ईरान पर नए अमेरिकी सैन्य हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरानी सैन्य बयान में क्षेत्र के उन देशों को भी चेतावनी दी गई है जो किसी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मदद करते हैं। यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य तनाव के और फैलने की आशंका को सामने रखता है।
ईरान की शर्तों में क्या शामिल है
ईरानी सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रज़ाई के अनुसार, तेहरान ने क़तर की मध्यस्थता के जरिए बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं।
रिपोर्टों में इन शर्तों में सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकना, ईरानी जमे हुए धन को मुक्त करना और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी समाप्त करना शामिल बताया गया है। हालांकि सभी शर्तों का आधिकारिक विस्तृत दस्तावेज सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है।
बातचीत की राह क्यों मुश्किल है
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ी समस्या भरोसे की कमी है। दोनों पक्ष पिछले समझौतों और सैन्य कार्रवाइयों की अलग-अलग व्याख्या करते हैं।
ईरान का कहना है कि उसके खिलाफ दबाव और सैन्य कार्रवाई के बीच सामान्य बातचीत की स्थिति बहाल नहीं हो सकती। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान पर दबाव बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
चीन की कूटनीतिक पहल
इस गतिरोध के बीच चीन ने ईरान और अमेरिका से संयम बरतने और जून में हुए अंतरिम समझौते की ओर लौटने की अपील की है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 16 सितंबर को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात के दौरान होर्मुज़ को दोबारा खोलने की जरूरत पर जोर दिया था। चीन ने बातचीत के जरिए तनाव कम करने की वकालत की है।
ऊर्जा बाजार पर असर
होर्मुज़ में लंबे समय तक व्यवधान का सबसे बड़ा असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले से ही पश्चिम एशिया के सैन्य तनाव पर नजर रख रहे हैं।
21 सितंबर को बाजार रिपोर्ट के अनुसार ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे पश्चिम एशिया की आपूर्ति और सुरक्षा स्थिति प्रमुख कारकों में शामिल है।
आगे क्या होगा
अब निगाहें अमेरिका और ईरान के अगले कूटनीतिक कदम पर हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के बीच किसी संभावित संपर्क की संभावना पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
ईरान ने बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी शर्तों को प्राथमिकता दी है। अमेरिका की ओर से इन शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह तय करेगा कि बातचीत का रास्ता खुलता है या होर्मुज़ को लेकर मौजूदा गतिरोध लंबा खिंचता है।
निष्कर्ष
होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब केवल ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का मुद्दा नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है।
ईरान का ताजा रुख बताता है कि तेहरान होर्मुज़ खोलने को कूटनीतिक प्रक्रिया और अमेरिकी प्रतिबद्धताओं से जोड़कर देख रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी समुद्री दबाव और सैन्य चेतावनियां तनाव को कम करने के बजाय बातचीत की राह को और जटिल बना रही हैं।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि दोनों पक्ष अपनी शर्तों में कितनी गुंजाइश रखते हैं और क्या मध्यस्थ देशों की कोशिशें होर्मुज़ तथा व्यापक क्षेत्रीय तनाव पर किसी व्यावहारिक समझौते तक पहुंच पाती हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।