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‘अंबेडकर की संवैधानिक व्यवस्था को कम्युनल कहना क्या उचित?’ मायावती....

None 2024-08-16 12:04:48
‘अंबेडकर की संवैधानिक व्यवस्था को कम्युनल कहना क्या उचित?’ मायावती....

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की मुखिया मायावती ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है।

Gopi Saini

शाह टाइम्स। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की मुखिया मायावती ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को पीएम मोदी ने लाल किले से दिए गए अपने भाषण में यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत पर बल देते हुए मौजूदा व्यवस्था को कम्युनल यानी सांप्रदायिक कहा। अब मायावती ने इस मामले को सीधे संविधान निर्माता कहे जाने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से जोड़कर पीएम मोदी को घेर लिया है।

https://twitter.com/Mayawati/status/1824279198736801935?t=YOqOnuUxgJ5bleQpA7oe3w&s=08

मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर लिखा, 'पीएम द्वारा कल 15 अगस्त को लाल क़िले से बाबा साहेब डा। भीमराव अम्बेडकर द्वारा सभी धर्मों का एक-समान सम्मान के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्त की संवैधानिक व्यवस्था को ’कम्युनल’ कहना क्या उचित? सरकार संविधान की मंशा के हिसाब से सेक्युलरिज्म का पालन करे यही सच्ची देशभक्ति व राजधर्म।'

अच्छे दिन कब आएंगे: मायावती

उन्होंने आगे लिखा, 'इतना ही नहीं बल्कि पीएम द्वारा देश की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, महंगाई व पिछड़ेपन आदि की ज्वलन्त राष्ट्रीय समस्याओं पर इससे प्रभावित करीब सवा सौ करोड़ लोगों में उम्मीद की कोई नई किरण नहीं जगा पाना भी कितना सही? लोगों के ’अच्छे दिन’ कब आयेंगे?'

जानिए पीएम मोदी ने ऐसा क्या कह दिया कि भड़क गईं मायावती

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लगातार 11वीं बार लाल किले पर तिरंगा फहराने के बाद धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता को देश की मांग बताया। मोदी ने इस संबंध में मौजूदा कानूनों को सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘‘देश का एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि जिस नागरिक संहिता को लेकर हम लोग जी रहे हैं, वह सचमुच में साम्प्रदायिक और भेदभाव करने वाली संहिता है। मैं चाहता हूं कि इस पर देश में गंभीर चर्चा हो और हर कोई अपने विचार लेकर आए।’’ पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि यह देश की मांग है कि भारत में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता होनी चाहिए। हम सांप्रदायिक नागरिक संहिता के साथ 75 साल जी चुके हैं। अब हमें धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की ओर बढ़ना होगा। तभी धर्म आधारित भेदभाव खत्म होगा। इससे आम लोगों का अलगाव भी खत्म होगा।’’

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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