लोकेशन: नई दिल्ली
सोर्स: शाह टाइम्स डिजिटल
मीडिया सेक्शन: हेल्थ एवं लाइफस्टाइल
सोया सॉस आज भारतीय रसोई में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है। नूडल्स, फ्राइड राइस, मंचूरियन और कई दूसरी डिशेज में इसका इस्तेमाल स्वाद और उमामी फ्लेवर बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सोया सॉस को सेहत के लिए फायदेमंद माना जा सकता है या फिर इसका स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है? दरअसल, सोया सॉस एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसमें सोयाबीन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इसके पोषण संबंधी प्रभाव को समझने के लिए सिर्फ सोयाबीन को देखना पर्याप्त नहीं है। इसमें नमक की मात्रा, निर्माण प्रक्रिया, अन्य सामग्री और सेवन की मात्रा भी मायने रखती है। भारत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने भी सोयाबीन सॉस को किण्वित सोयाबीन से तैयार उत्पाद के रूप में परिभाषित किया है, जिसमें नमक और अन्य अनुमत सामग्री शामिल हो सकती हैं।
सोया सॉस आखिर बनती कैसे है?
पारंपरिक सोया सॉस मुख्य रूप से सोयाबीन को किण्वित करके तैयार की जाती है। कुछ पारंपरिक प्रक्रियाओं में सोयाबीन के साथ गेहूं का भी इस्तेमाल होता है। किण्वन के दौरान सूक्ष्मजीव सोयाबीन और अन्य कच्चे पदार्थों में मौजूद घटकों को बदलते हैं, जिससे अलग-अलग अमीनो अम्ल, पेप्टाइड और दूसरे यौगिक बनते हैं और सोया सॉस को उसका विशिष्ट स्वाद मिलता है। शोध समीक्षाओं में किण्वित सोया खाद्य पदार्थों में जैव सक्रिय यौगिकों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। यही वजह है कि सोया सॉस को केवल नमकीन तरल समझना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। हालांकि, इसमें मौजूद संभावित जैव सक्रिय घटकों का मतलब यह नहीं है कि सोया सॉस को किसी बीमारी का इलाज या विशेष स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ माना जाए।
क्या सोया सॉस में पोषण संबंधी फायदे होते हैं?
सोयाबीन में प्रोटीन और आइसोफ्लेवोन जैसे यौगिक पाए जाते हैं। किण्वन के दौरान सोया खाद्य पदार्थों में कुछ आइसोफ्लेवोन अधिक जैवउपलब्ध रूप में बदल सकते हैं। वैज्ञानिक समीक्षाओं में किण्वित सोया उत्पादों से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर चर्चा हुई है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। सोया खाद्य पदार्थों के संभावित फायदे और सोया सॉस के फायदे को एक समान नहीं माना जा सकता। सोया सॉस आम तौर पर भोजन में कम मात्रा में इस्तेमाल की जाती है और इसका मुख्य उद्देश्य स्वाद बढ़ाना होता है। इसलिए इसे प्रोटीन या आइसोफ्लेवोन का प्रमुख स्रोत मानना उचित नहीं होगा।
सबसे बड़ी चिंता है नमक
सोया सॉस के मामले में सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहलू इसकी सोडियम मात्रा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए प्रतिदिन दो ग्राम से कम सोडियम यानी करीब पांच ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। अधिक सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ने और हृदय संबंधी जोखिमों से जुड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोया सॉस को भी ऐसे खाद्य पदार्थों में शामिल किया है जिनसे भोजन में नमक की मात्रा बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि सोया सॉस को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। असल मुद्दा कितनी मात्रा में और कितनी बार इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से ही नमक, अचार, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, सॉस और दूसरे नमकीन खाद्य पदार्थ अधिक हैं, तो सोया सॉस अतिरिक्त सोडियम का स्रोत बन सकती है।
क्या कम सोडियम वाली सोया सॉस बेहतर विकल्प है?
बाजार में अलग-अलग प्रकार की सोया सॉस उपलब्ध हैं और उनके पोषण मान अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल सामने लिखे ‘लाइट’ या ‘हेल्दी’ जैसे शब्दों पर निर्भर करने के बजाय पैकेट के पोषण लेबल को देखना ज्यादा उपयोगी है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन भी उपभोक्ताओं को सोडियम की मात्रा देखने और अलग-अलग उत्पादों के लेबल की तुलना करने की सलाह देता है। ध्यान रखें कि ‘लाइट’ का अर्थ हमेशा कम सोडियम होना जरूरी नहीं है, इसलिए पैकेट पर वास्तविक सोडियम मात्रा जरूर देखें।
ग्लूटेन से जुड़ी सावधानी भी जरूरी
एक और महत्वपूर्ण पहलू है गेहूं। पारंपरिक सोया सॉस की कई किस्मों में गेहूं इस्तेमाल होता है। इसलिए सीलिएक रोग या ग्लूटेन से संबंधित संवेदनशीलता वाले लोगों को हर सोया सॉस को ग्लूटेन-मुक्त नहीं मानना चाहिए। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार सोया सॉस की संरचना उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है और गेहूं से बनी सामान्य सोया सॉस ग्लूटेन-मुक्त नहीं मानी जाती। ऐसे लोगों को पैकेट पर ग्लूटेन-मुक्त होने का स्पष्ट उल्लेख देखकर ही उत्पाद चुनना चाहिए। कुछ उत्पाद गेहूं के बिना तैयार किए जाते हैं, लेकिन केवल नाम देखकर उनकी संरचना तय नहीं की जानी चाहिए।
सोया से एलर्जी है तो रहें सावधान
सोया स्वयं भी कुछ लोगों के लिए एलर्जी पैदा करने वाला खाद्य पदार्थ हो सकता है। सोया सॉस सोया से बनी होने के कारण सोया एलर्जी वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। सोया एलर्जी में त्वचा पर चकत्ते, सूजन, पेट संबंधी परेशानी, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं और कुछ मामलों में गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया भी संभव है। इसलिए यदि सोया या सोया से बने किसी उत्पाद के सेवन के बाद बार-बार असामान्य प्रतिक्रिया होती है तो स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
किण्वित होने का मतलब यह नहीं कि जितना चाहें उतना खाएं
सोया सॉस के बारे में यह धारणा भी सही नहीं है कि चूंकि यह किण्वित उत्पाद है, इसलिए इसका अधिक सेवन नुकसान नहीं करेगा।
किण्वित सोया खाद्य पदार्थों पर प्रकाशित समीक्षाओं में संभावित जैव सक्रिय यौगिकों के साथ-साथ उच्च नमक और कुछ किण्वन-जनित जैविक अमीन जैसे घटकों से संबंधित चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, सामान्य भोजन में सोया सॉस की मात्रा आमतौर पर कम होती है, इसलिए इन संभावित जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना भी उचित नहीं होगा। संतुलित आहार और नियंत्रित मात्रा यहां महत्वपूर्ण हैं।
फिर कितनी सोया सॉस लेना सही है?
इसका कोई एक सार्वभौमिक चम्मच-आधारित नियम सभी लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि व्यक्ति के पूरे आहार में सोडियम की मात्रा अलग-अलग होती है।
बेहतर तरीका यह है कि—
* सोया सॉस को स्वाद बढ़ाने के लिए सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें।
* भोजन में अतिरिक्त नमक कम रखें।
* पैकेट पर सोडियम की मात्रा जरूर देखें।
* कम सोडियम वाले विकल्प उपलब्ध हों तो उनकी तुलना करें।
* सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता होने पर ग्लूटेन-मुक्त लेबल देखें।
* सोया एलर्जी होने पर सोया सॉस से बचें।
* अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन के साथ बार-बार सोया सॉस लेने से बचें।
तो क्या सोया सॉस फायदेमंद है या नुकसानदायक?
सच्चाई बीच में है। सोया सॉस को न तो कोई चमत्कारी स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ माना जा सकता है और न ही सामान्य मात्रा में सेवन करने वाले हर व्यक्ति के लिए इसे हानिकारक कहना सही होगा। इसमें किण्वित सोयाबीन से जुड़े कुछ जैव सक्रिय घटक हो सकते हैं, लेकिन दूसरी ओर इसकी उच्च सोडियम मात्रा सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक चिंता है। इसलिए सोया सॉस का सही इस्तेमाल यही है कि इसे मुख्य खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि स्वाद बढ़ाने वाले मसाले या कंडिमेंट की तरह सीमित मात्रा में लिया जाए।
निष्कर्ष
सोया सॉस का स्वाद भोजन को जरूर बेहतर बना सकता है, लेकिन इसे सेहत का शॉर्टकट समझना सही नहीं है। खासकर जिन लोगों के आहार में पहले से नमक अधिक है, उन्हें इसकी मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
शाह टाइम्स की सलाह
किसी भी पैकेज्ड सोया सॉस को खरीदने से पहले सामग्री सूची और सोडियम की मात्रा पढ़ें। यदि आपको उच्च रक्तचाप, किडनी संबंधी बीमारी, सोया एलर्जी या ग्लूटेन से जुड़ी समस्या है, तो अपने चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार विकल्प चुनना बेहतर है।