अमेरिका के सदर डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्राइल और लेबनान के दरमियान 10 दिन के सीज़फायर का ऐलान किया है, जो गुरुवार शाम 5 बजे से लागू होगा। यह कदम मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम मोड़ माना जा रहा है। जहां एक तरफ अमेरिका बैकग्राउंड में ईरान के साथ अमन समझौते की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह सीज़फायर उस बड़ी रणनीति का हिस्सा नजर आता है। मगर सवाल उठता है, क्या यह वाकई अमन की शुरुआत है या सिर्फ एक टैक्टिकल पॉज़?
डोनाल्ड ट्रम्प का यह ऐलान अचानक आया, मगर इसके पीछे कई दिनों की डिप्लोमैटिक हलचल छुपी थी। ट्रम्प ने खुद बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की।
यहां सवाल उठता है, क्या दोनों मुल्क खुद इस फैसले पर राज़ी थे, या यह फैसला उन पर थोपा गया?
एक सीनियर इस्राइली अफसर ने साफ कहा, “ट्रम्प ने यह सीज़फायर पुश किया।”
यह बयान दिखाता है कि अमेरिका की भूमिका सिर्फ मीडिएटर की नहीं, बल्कि दबाव बनाने वाले खिलाड़ी की भी थी।
इस्राइल की सिक्योरिटी कैबिनेट की मीटिंग के दौरान ही ट्रम्प का ऐलान सामने आ गया।
मतलब साफ है
फैसला अभी चर्चा में था
लेकिन एलान पहले हो गया
यह डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल से हटकर कदम है।
तो क्या इस्राइल पर इंटरनेशनल प्रेशर बढ़ रहा था?
कुछ फैक्ट्स देखें:
हाल के हमलों में बड़ी संख्या में सिविलियन हताहत हुए
इंटरनेशनल कम्युनिटी में आलोचना तेज हुई
ईरान के साथ ट्रूस का मामला अलग से चल रहा है
इस्राइल शायद एक “ब्रेक” चाहता था
लेकिन इसे “कमजोरी” नहीं दिखाना चाहता
लेबनान की सरकार इस ऐलान से हैरान रह गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
राष्ट्रपति आउन इस स्टेज पर नेतन्याहू से बात करने को तैयार नहीं थे
उन्हें यह कदम जल्दबाज़ी लगा
यहां एक अहम पॉइंट है
लेबनान सीधे इस्राइल से बात करने से बचता रहा है
ऐसे में यह सीज़फायर उनके लिए
एक डिप्लोमैटिक ट्रैप भी हो सकता है
यह पूरा मामला सिर्फ इस्राइल और लेबनान तक सीमित नहीं है
असल कहानी ईरान के साथ जुड़ी है
ईरान का दावा:
इस्राइल के हमले ट्रूस का उल्लंघन हैं
अमेरिका और इस्राइल का जवाब:
लेबनान ऑपरेशन उस ट्रूस में शामिल नहीं
यहां एक बड़ा सवाल उठता है
क्या यह “दो अलग ट्रैक” सच में अलग हैं?
या फिर यह एक ही बड़ी रणनीति का हिस्सा है?
अमेरिका एक तरफ अमन की बात करता है
दूसरी तरफ मिलिट्री सपोर्ट जारी रखता है
यह नई बात नहीं है
लेकिन इस बार फर्क यह है:
ट्रम्प खुद सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं
पर्सनल डिप्लोमेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं
उन्होंने कहा कि वह दोनों लीडर्स को व्हाइट हाउस बुलाएंगे
यह 1983 के बाद पहली बार होगा
यह लाइन बहुत अहम है
क्योंकि 1983 के बाद
दोनों मुल्कों के रिश्ते लगभग फ्रीज़ रहे हैं
सीधा जवाब: नहीं
इतिहास देखें:
ज्यादातर सीज़फायर अस्थायी साबित हुए
ग्राउंड रियलिटी नहीं बदलती
10 दिन में क्या होगा?
बातचीत शुरू हो सकती है
तनाव थोड़ा कम हो सकता है
लेकिन जड़ कारण खत्म नहीं होंगे
लेबनान की पॉलिटिक्स में हीज़बुल्लाह एक बड़ा खिलाड़ी है
और वह ईरान के करीब माना जाता है
अगर वह इस सीज़फायर को नहीं मानता
तो पूरा प्लान फेल हो सकता है
यह वही पॉइंट है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है
यह कदम सिर्फ फॉरेन पॉलिसी नहीं है
यह घरेलू सियासत से भी जुड़ा है
ट्रम्प के लिए:
यह “पीसमेकर” इमेज बनाने का मौका है
इंटरनेशनल स्टेज पर वापसी दिखाने का मौका है
तीन संभावनाएं हैं
यह एक असली शांति प्रक्रिया की शुरुआत हो
यह सिर्फ टेंपरेरी ब्रेक हो
यह बड़ा कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने से पहले का शांत पल हो
तीनों में से कौन सही होगा
यह अगले 10 दिनों में साफ हो जाएगा
आपको यह समझना जरूरी है
सीज़फायर का मतलब:
जंग खत्म नहीं
सिर्फ रुकी है
अगर जमीनी हालात नहीं बदले
तो यह फिर शुरू होगी
इन पॉइंट्स पर नजर रखें:
क्या दोनों देश शर्तों का पालन करते हैं
क्या हीज़बुल्लाह शामिल होता है
क्या ईरान बातचीत में आगे बढ़ता है
क्या व्हाइट हाउस मीटिंग होती है
अमन सिर्फ ऐलान से नहीं आता
उसके लिए भरोसा चाहिए
और मिडिल ईस्ट में
सबसे बड़ी कमी यही है
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।