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इजरायल का लोकतंत्र ‘एक मज़ाक’, वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों ने चुनावी अधिकारों पर उठाए सवाल

Harish Qureshi • 2026-10-14 13:49:12
इजरायल का लोकतंत्र ‘एक मज़ाक’, वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों ने चुनावी अधिकारों पर उठाए सवाल
  • इजरायली चुनावों में हमारी आवाज़ क्यों नहीं? वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों ने उठाया सवाल

  • ‘जैसे हमारा कोई वजूद ही नहीं’, इजरायल की चुनावी व्यवस्था पर फिलिस्तीनियों की नाराज़गी

  • वेस्ट बैंक में लोकतंत्र और मतदान के अधिकार पर बहस, फिलिस्तीनियों ने जताया विरोध


  • वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों ने इजरायल की चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मतदान का अधिकार न होने और रोजमर्रा की जिंदगी पर इजरायली नियंत्रण के कारण लोगों में नाराज़गी है।


    जबल अल-बाबा, कब्ज़े वाला वेस्ट बैंक | 14 अक्टूबर 2026

    By Mohd Haris


    इजरायल के चुनाव से पहले फिलिस्तीनियों में नाराज़गी

    जबल अल-बाबा, वेस्ट बैंक। इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों ने लोकतंत्र और राजनीतिक अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इजरायली सरकार की नीतियां उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं, लेकिन सरकार चुनने की प्रक्रिया में उनकी कोई हिस्सेदारी नहीं है। स्थानीय निवासियों ने आवाजाही पर पाबंदियों, बस्तियों के विस्तार, मकानों को गिराए जाने और जबरन विस्थापन के ख़तरे को अपनी प्रमुख चिंताओं में शामिल किया है। इन हालात में कुछ फिलिस्तीनियों ने इजरायल के लोकतांत्रिक दावों को ‘एक मज़ाक’ बताया है।


    करीब 30 लाख फिलिस्तीनियों के पास मतदान का अधिकार नहीं

    14 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में करीब 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। इनमें से अधिकांश इजरायल के संसदीय चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। इसके उलट वेस्ट बैंक और कब्ज़े वाले पूर्वी यरुशलम में रहने वाले करीब 7 लाख इजरायली यहूदी बसने वालों को इजरायली नागरिक होने के कारण मतदान का अधिकार प्राप्त है। इस अंतर ने चुनावी प्रतिनिधित्व और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस तेज़ कर दी है।


    ‘हमारे साथ ऐसा व्यवहार होता है, जैसे हमारा कोई वजूद नहीं’

    पूर्वी यरुशलम के नज़दीक स्थित जबल अल-बाबा के सामुदायिक प्रतिनिधि अतल्लाह अल-जाहालिन ने अपनी आबादी के हालात पर नाराज़गी जताई।

    उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों को मकान बनाने, सड़क तैयार करने और स्कूल स्थापित करने जैसी बुनियादी गतिविधियों में भी गंभीर पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। अल-जाहालिन ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी बस्ती में 100 से अधिक बार ढहाने की कार्रवाइयां हुई हैं। इसके बाद निवासियों को अपने घर दोबारा बनाने पड़े। जबल अल-बाबा में करीब 450 लोग रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या बेदुइन समुदाय से संबंधित परिवारों की है।


    वेस्ट बैंक के एरिया C में इजरायल का नियंत्रण

    1990 के दशक में हुए ओस्लो समझौतों के तहत वेस्ट बैंक को एरिया A, B और C में विभाजित किया गया था।

    एरिया C वेस्ट बैंक के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में फैला है। यहां नागरिक प्रशासन और सुरक्षा पर इजरायल का सीधा नियंत्रण है।

    स्थानीय फिलिस्तीनी निवासियों का कहना है कि पानी, बिजली, निर्माण अनुमति और एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने जैसे मामलों में उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्टॉप द वॉल अभियान से जुड़े जुमा ने भी आवाजाही, सीमाओं और बुनियादी सुविधाओं पर इजरायली नियंत्रण को लेकर आपत्ति जताई है।


    इजरायली चुनाव से क्या बदलेगा?

    27 अक्टूबर का चुनाव इजरायल की अगली सरकार के गठन के लिए अहम होगा। हालांकि वेस्ट बैंक के कई फिलिस्तीनी निवासियों को इससे अपने हालात में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। उनकी चिंता यह है कि चुनाव का नतीजा चाहे जो भी हो, नई सरकार की नीतियां उनके जीवन को प्रभावित करती रहेंगी, जबकि सरकार के गठन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होगी। यहां एक अहम अंतर समझना ज़रूरी है। इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों और कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के उन फिलिस्तीनियों की कानूनी स्थिति अलग है, जिनके पास इजरायली नागरिकता नहीं है। इजरायली नागरिकों को चुनाव में मतदान का अधिकार है, जबकि गैर-नागरिक फिलिस्तीनी निवासियों को सामान्यतः यह अधिकार प्राप्त नहीं है।


    अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता मानकों के आधार पर संपादकीय विश्लेषण

    यह विवाद लोकतंत्र की एक बुनियादी बहस से जुड़ा है। जब किसी सरकार के फैसले बड़ी आबादी की आवाजाही, आवास, संसाधनों और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं, तो उन लोगों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। फिलिस्तीनी निवासियों की आलोचना इसी असमान राजनीतिक स्थिति पर केंद्रित है। दूसरी ओर, इजरायल की चुनावी व्यवस्था औपचारिक रूप से नागरिकता के आधार पर मतदान का अधिकार निर्धारित करती है। इसलिए यहां केवल चुनाव कराने या न कराने का सवाल नहीं है। बहस का केंद्र सैन्य कब्ज़े, नागरिकता, राजनीतिक अधिकारों और सरकारी जवाबदेही के बीच संबंध है।

    वीडियो देखें

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    Harish Qureshi

    Harish Qureshi

    Shah Times Reporter

    शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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