"हमें मार्च में ही पता चल गया था कि जंग होगी..." – ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई का यह बयान सिर्फ एक पूर्वाभास नहीं बल्कि एक कूटनीतिक और सामरिक संदेश भी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने समय रहते अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर लिया था। इस बयान से इजरायल और अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इजरायल और ईरान के बीच दशकों से चल रही टकराव की जड़ें गहरी हैं। इजरायल को हमेशा से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आपत्ति रही है। हालिया संघर्ष में इजरायल ने ईरान की कई न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया – नतांज, अराक, इस्फहान और खोंडब जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाया गया।
परंतु IRGC के पूर्व कमांडर रेजाई के दावे ने इस पूरे सैन्य अभियान की उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उनका दावा है कि इजरायली हमलों से पहले ही संवर्धित यूरेनियम हटा लिया गया था।
रेजाई के बयान में जिस "न्यूक्लियर मटेरियल" की बात हो रही है, वह दरअसल संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) है।
इसलिए अगर इजरायल को लगा था कि उसने ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है, तो रेजाई के बयान ने इस धारणा की जड़ें हिला दी हैं।
रेजाई का कहना है कि मार्च 2025 में ही ईरान को युद्ध की आशंका हो गई थी, और इसी पूर्वानुमान के आधार पर यूरेनियम को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया।
मोहसिन रेजाई पूर्व में भी अपने विवादास्पद बयानों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि अगर इजरायल ईरान पर परमाणु हमला करता है, तो पाकिस्तान भी जवाबी हमला करेगा।
हालांकि पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने इस दावे को स्पष्ट रूप से नकार दिया। इससे रेजाई की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर उठे, लेकिन इस बयान से एक बात साफ है— ईरान पाकिस्तान को भी युद्ध-रणनीति में प्रतीकात्मक रूप से शामिल दिखाना चाहता है।
इजरायल द्वारा किए गए हमले में मुख्यतः नतांज और इस्फहान जैसी न्यूक्लियर साइट्स प्रभावित हुईं।
“हमारी सैन्य क्षमताओं का अभी सिर्फ 30% इस्तेमाल हुआ है, हम धीरे-धीरे युद्ध को आगे बढ़ा रहे हैं।”
यह इशारा करता है कि ईरान लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहा है, न कि त्वरित बदला लेने की।
रेजाई का यह बयान भी उल्लेखनीय है कि "इजरायल इस समय कमजोर स्थिति में है।"
ऐसे में युद्धविराम की किसी भी पहल को वे खतरनाक मानते हैं, क्योंकि इससे दुश्मन को दोबारा सक्रिय होने का मौका मिलेगा।
ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की सोच अमेरिका और इजरायल की कॉमन स्ट्रैटेजी रही है। लेकिन अगर रेजाई के दावे सही हैं, तो इसका मतलब है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम अभी भी सुरक्षित है।
रेजाई के इस बयान ने एक बात तो साफ कर दी है – ईरान रणनीतिक धैर्य और तैयारी के मामले में किसी भी मोर्चे पर कमजोर नहीं है। उसकी सैन्य और कूटनीतिक योजनाएं अब सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक दिशा में अग्रसर हैं।
ईरानी जनरल मोहसिन रेजाई का यह बयान न केवल इजरायल के सैन्य अभियान को चुनौती देता है, बल्कि अमेरिका की नीति निर्धारण की भी पोल खोलता है। यह एक साधारण चेतावनी नहीं बल्कि Strategic Signaling है – एक ऐसा संकेत जो युद्धक्षेत्र की दिशा बदल सकता है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।