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देश सहित दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा हैं आईवीएफ का बिजनेस

None 2024-07-30 15:42:41
देश सहित दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा हैं आईवीएफ का बिजनेस

यह मेडिसिन जगत और विज्ञान की बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह कमाल किया था गायनेकोलॉजिस्ट पैट्रिक स्टेप्टो और साइंटिस्ट रॉबर्ट एडवर्ड्स ने।

~Neelam Saini

(शाह टाइम्स)। 25 जुलाई सन 1978 की रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे इंग्लैंड के मैनचेस्टर जिला अस्पताल के बाहर भीड़ जमा थी। इस भीड़ में मरीज और उनके परिजन नहीं बल्कि डॉक्टर और पत्रकार थे। लेबर रूम से खबर आई कि लड़की हुई है। सभी खुशी से उछल पड़े। अगले दिन पूरे दुनिया के अखबारों की हेडलाइन थी "दुनिया के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म।"तब से 25 जुलाई को विश्व एंब्रियोलॉजिस्ट डे के रूप में मनाया जाता है।

आपको बता दें कि यह मेडिसिन जगत और विज्ञान की बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह कमाल किया था गायनेकोलॉजिस्ट पैट्रिक स्टेप्टो और साइंटिस्ट रॉबर्ट एडवर्ड्स ने। उन्हें 10 साल में 282 असफलताओं के बाद यह सफलता मिली थी। लड़की का नाम लुइस ब्राउन रखा गया।

एक वो दिन था और एक आज है कि हर साल 5 लाख से ज्यादा टेस्ट ट्यूब के जरिए बच्चे पैदा होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार साल 2018 तक दुनिया में 80 लाख से ज्यादा टेस्ट ट्यूब बेबीज की डिलीवरी हो चुकी थी। यह सिलसिला तेजी से बढ़ता जा रहा है। विज्ञान ने ऐसे बहुत से लोगों को माता-पिता बनने का सुख दिया है, जिनके लिए प्राकृतिक सीमाओं के चलते यह संभव नहीं था। लेकिन कहीं न कही ये बात भी सच है कि पूरी दुनिया में गिर रहे फर्टिलिटी रेट के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हमारी आदतें और खराब लाइफस्टाइल भी है।

दुनियां में कितना बढ़ा आईवीएफ का आंकड़ा

•एलाइड मार्केट रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 तक वैश्विक IVF सर्विस बाजार का बिजनेस 1.6 लाख करोड़ रुपये का था।

•अनुमान है कि साल 2033 तक यह बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।

•इसका मतलब है कि इस दौरान यह बिजनेस 9.3% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ेगा। इस रिपोर्ट में IVF सर्विस बिजनेस बढ़ने के पीछे कई कारक भी बताए गए हैं, जिस वजह से लोगों में इनफर्टिलिटी बढ़ रही है।

देश में आईवीएफ का आंकड़ा

•एलाइड मार्केट रिसर्च के मुताबिक, साल 2020 में भारत में IVF बिजनेस लगभग 664 करोड़ रुपये का था।

•अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2027 तक यह बढ़कर 10 हजार करोड़ से भी अधिक का हो जाएगा।

•साल 2032 तक इसके 40 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचने का अनुमान है।

•इसका मतलब है कि इस दौरान भारत में IVF का बिजनेस 18.08% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ेगा।

आईवीएफ बिजनेस बढ़ने के कारण

दरअसल बीते कुछ सालों में IVF का बिजनेस तेजी से बढ़ने का कारण है हमारी खराब लाइफस्टाइल, खराब खानपान, लो फिजिकल एक्टिविटी और शराब और सिगरेट की लत है। इसके अलावा एक बड़ा कारण जागरुकता भी है। पहले इनफर्टिलिटी होने पर लोग इसके ट्रीटमेंट के लिए जागरुक नहीं थे। वे IVF के जरिए बच्चा कंसीव करना परंपरा और धर्म के खिलाफ मानते थे। समय के साथ लोगों में जागरुकता बढ़ी है और वे ट्रीटमेंट के लिए आगे आ रहे हैं। इसी के साथ पुरुष और महिला दोनों में इनफर्टिलिटी की अलग वजहें होती हैं। स्त्री-पुरुष दोनों में से किसी एक में या दोनों में इनफर्टिलिटी की समस्या है तो प्राकृतिक रूप से बच्चा कंसीव करना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में IVF तकनीक का सहारा लेना पड़ता है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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