
तौसीफ कुरैशी
नई दिल्ली । कर्नाटक में मिली करारी हार से उभर नहीं पा रहा जनता दल सेक्युलर हारने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जेडीएस मोदी की भाजपा से हाथ मिलाकर अपना बिखरा सियासी जनाधार इकट्ठा करने का प्रयास करेगा वही हुआ आखिरकार जेडीएस ने एनडीए में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करते हुए मोदी की भाजपा के साथ मिलकर 2024 के आम चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस को इनके साथ मिलकर चुनाव लड़ने से नुकसान होगा या फायदा यह तो चुनावों के बाद साफ़ हो पाएगा लेकिन सियासी पंडित अपने नजरिए से समीक्षा करते हुए कह रहे हैं कि इनके साथ मिलकर चुनाव लड़ने से कांग्रेस को फायदा होगा।
कांग्रेस इसके लिए पहले से ही तैयार थी क्योंकि जेडीएस के पास जो भी वोट था वह ज्यादातर कांग्रेस के पाले में ट्रांसफर हो जाएगा।
NDA में शामिल हुई JDS, कर्नाटक हार के बाद अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी इसलिए BJP-JDS साथ आये, लोकसभा साथ लड़ेंगे। कांग्रेस के नेता और उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार कर्नाटक ही पूरे दक्षिण को संभाल रहे हैं उनका लक्ष्य दक्षिण भारत से साम्प्रदायिकता की दुकान को बंद करने का है। मोदी की भाजपा डीके शिवकुमार इसी रणनीति से भयभीत नज़र आ रही है और वह लगातार प्रयास करती दिखाई दे रही है दक्षिण भारत में कम से कम नुकसान हो लेकिन कोई भी सियासी चाल सही नहीं पड़ रही है महिला आरक्षण कानून पास हो जाने के बाद भी लाभ मिलता नहीं दिख रहा है क्योंकि मोदी की भाजपा की महिलाओं को आरक्षण देने की नियत में खोट नजर आ रहा है वैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सभी सियासी पांसे उल्टे पड़ रहें हैं ऐसा सियासी पंडित मान रहे हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।