केरल के तिरुवनंतपुरम के मन्नंथला में कक्षा 9 की छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। स्कूल काउंसलिंग के दौरान छात्रा ने घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिवार और पुलिस को सूचना मिली। पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पॉक्सो कानून के तहत जांच शुरू की।
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तिरुवनंतपुरम, केरल | 25 सितंबर 2026 | अपूर्वा चौधरी
काउंसलिंग के दौरान सामने आया मामला
केरल के तिरुवनंतपुरम के मन्नंथला इलाके में कक्षा 9 की छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संरक्षण कानून यानी पॉक्सो एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी छात्रा के परिचित थे और कथित घटना मन्नंथला इलाके में हुई।
मामला उस समय सामने आया जब स्कूल में हुई काउंसलिंग के दौरान छात्रा ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल के शिक्षकों और काउंसलरों ने छात्रा की स्थिति को देखते हुए उससे बातचीत की, जिसके बाद उसने कथित उत्पीड़न के बारे में बताया। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने उसके परिवार को जानकारी दी और पुलिस तक मामला पहुंचा।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की और आरोपियों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, छात्रा का बयान दर्ज किया गया है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
आरोपियों की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट
मामले में आरोपियों की उम्र को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अंतर सामने आया है। कुछ स्थानीय मलयालम समाचार रिपोर्टों में तीनों आरोपियों को 16 और 17 वर्ष की उम्र के नाबालिग छात्र बताया गया है। इन रिपोर्टों के अनुसार, तीनों अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं और छात्रा से पहले से परिचित थे।
वहीं, पीटीआई से प्रकाशित एक रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि तीन आरोपियों में दो 19 वर्षीय युवक हैं, जबकि तीसरा आरोपी नाबालिग है। द साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट भी दो 19 वर्षीय आरोपियों की गिरफ्तारी और एक नाबालिग को हिरासत में लिए जाने की जानकारी देती है।
इसलिए आरोपियों की उम्र और उनकी कानूनी श्रेणी को लेकर अंतिम स्थिति पुलिस की आधिकारिक जांच और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। समाचार रिपोर्टों में सामने आए इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत शुरू की कार्रवाई
पुलिस ने छात्रा के बयान के आधार पर पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया है। यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने और ऐसे मामलों में विशेष कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस घटना की परिस्थितियों, आरोपियों और छात्रा के बीच पहले से मौजूद परिचय तथा कथित घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि घटना के बाद छात्रा पर किसी तरह का दबाव, धमकी या अन्य उत्पीड़न तो नहीं हुआ।
पीटीआई-आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा का बयान मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज किया गया है। वहीं नाबालिग आरोपी के संबंध में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
छात्रा ने कई समय बाद बताई घटना
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रा ने घटना के बारे में तुरंत जानकारी नहीं दी थी। द साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रा ने कई महीनों तक कथित घटना के बारे में किसी को नहीं बताया और बाद में स्कूल में उसकी स्थिति को देखते हुए मामला सामने आया।
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों ने छात्रा में अवसाद जैसे संकेत देखे थे। इसके बाद काउंसलिंग के दौरान उसने कथित घटना की जानकारी दी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले घटना की सभी परिस्थितियों और आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई की और आरोपियों को हिरासत में लिया। अब जांच एजेंसियां उपलब्ध बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही हैं।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने होगी प्रक्रिया
यदि किसी आरोपी की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम पाई जाती है, तो उसके मामले में किशोर न्याय कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया लागू होती है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए नाबालिगों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
वहीं यदि किसी आरोपी की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है, तो उसके खिलाफ वयस्क आरोपी के रूप में संबंधित न्यायिक प्रक्रिया लागू होगी। यही वजह है कि इस मामले में आरोपियों की वास्तविक उम्र का दस्तावेजी सत्यापन महत्वपूर्ण है।
पुलिस जांच के दौरान घटना की तारीख, स्थान, आरोपियों की भूमिका और छात्रा के बयान से जुड़े अन्य पहलुओं की पुष्टि की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन संवेदनशील
नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की पहचान की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नाम, तस्वीर, पता, स्कूल, परिवार या ऐसी कोई अन्य जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए जिससे उसकी पहचान सीधे या परोक्ष रूप से उजागर हो।
ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में मीडिया संस्थानों के लिए भी पीड़िता की निजता और गरिमा की रक्षा महत्वपूर्ण कानूनी तथा पत्रकारिता संबंधी जिम्मेदारी है। इसी कारण इस रिपोर्ट में छात्रा की पहचान से जुड़ी कोई व्यक्तिगत जानकारी शामिल नहीं की गई है।
मामला अभी जांच के चरण में है। इसलिए आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
पुलिस जांच पर टिकी आगे की कार्रवाई
मन्नंथला पुलिस अब मामले से जुड़े साक्ष्यों और बयानों की जांच कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नाबालिग आरोपी के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रक्रिया और वयस्क आरोपियों के लिए अदालत की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
फिलहाल मामले में किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष की घोषणा नहीं हुई है। आरोपों की पुष्टि जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
यह मामला एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, नियमित काउंसलिंग और ऐसी घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग की जरूरत को सामने लाता है। हालांकि इस मामले से व्यापक निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना अधिक उचित होगा।