भारत में टैक्स सिस्टम को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अब फर्जी क्लेम्स और गलत जानकारी देने वालों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। टैक्सपेयर्स द्वारा रिटर्न फाइल करते समय छोटे-छोटे झूठे दावों की कीमत अब काफी भारी हो सकती है। हालिया मामलों में यह सामने आया है कि रिफंड पाने की कोशिश में की गई एक छोटी सी गलती भी आपको सात साल तक की जेल और 200% तक के जुर्माने की ओर ले जा सकती है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में कई टैक्सपेयर्स द्वारा किए गए झूठे क्लेम्स और कटौतियों का पर्दाफाश किया है। इन मामलों में खास तौर पर HRA, हेल्थ इंश्योरेंस, दान और एजुकेशन या होम लोन पर ब्याज जैसी पॉपुलर धाराें के तहत झूठे दावे किए गए थे।
इसके लिए डिपार्टमेंट ने डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर टैक्स रिटर्न की जांच की है। इस जांच के दायरे में वे रिटर्न एजेंट्स भी आए हैं जो फर्जी TDS क्लेम कर टैक्स रिफंड हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
पिछले चार महीनों में लगभग 40,000 टैक्सपेयर्स ने ITR-U फॉर्म का उपयोग किया है। यह फॉर्म ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए है जो पहले फाइल किए गए ITR में गलती सुधारना चाहते हैं। डिपार्टमेंट की कार्रवाई के बाद अब तक 1,045 करोड़ रुपये की गलत कटौतियों को वापस लिया जा चुका है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन गलतियों के नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं। टैक्स कानून की विभिन्न धाराओं के तहत निम्नलिखित दंड लग सकते हैं:
धारा 270A: जानबूझकर या गलत रिपोर्टिंग पर देय टैक्स पर 200% तक जुर्माना।
धारा 234B और 234C: टैक्स डिफॉल्ट पर सालाना 24% तक ब्याज।
धारा 276C: जानबूझकर टैक्स चोरी साबित होने पर अधिकतम 7 साल तक की जेल।
इन नियमों के मद्देनजर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नए ITR फॉर्म्स में अतिरिक्त डिसक्लोजर अनिवार्य कर दिए हैं। अब HRA कैलकुलेशन, हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की डिटेल्स, लोन सैंक्शन और खाते की जानकारी जैसी डिटेल देना जरूरी हो गया है।
यदि आपको लगता है कि आपके रिटर्न में कोई गलती हुई है या आपने गलत कटौती का दावा किया है, तो ITR-U फॉर्म के जरिए आप खुद ही सुधार कर सकते हैं। यह सुविधा टैक्सपेयर्स को 5 साल तक उपलब्ध रहती है।
इसके अलावा टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी थर्ड-पार्टी एजेंट पर निर्भर न रहें। अपनी फॉर्म 26AS या Annual Information Statement (AIS) को ध्यानपूर्वक देखें और उसी के आधार पर टैक्स रिटर्न फाइल करें।
टैक्स सीजन में सबसे आम सवाल यह उठता है कि कौन सा ITR फॉर्म भरना चाहिए? ITR-1 और ITR-2 के बीच सही चुनाव करना जरूरी है ताकि आप गलत फॉर्म भरने की गलती से बच सकें।
यदि आपकी कुल सालाना आय 50 लाख रुपये से कम है और आपकी आमदनी केवल इन स्रोतों से आती है:
वेतन या पेंशन
एक हाउस प्रॉपर्टी से किराया
बैंक इंटरेस्ट या डिविडेंड
अधिकतम ₹5,000 की कृषि आय
तो आप ITR-1 फॉर्म भर सकते हैं। नया बदलाव यह है कि अब 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) वाले लोग भी ITR-1 भर सकते हैं, जो पहले संभव नहीं था।
ITR-1 किनके लिए नहीं?
जिनकी आय ₹50 लाख से अधिक है
जिनको 1.25 लाख से अधिक LTCG है
यदि आप किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं
यदि आपके पास अनलिस्टेड कंपनी के शेयर हैं
अगर आपकी विदेशी संपत्ति या विदेशी आय है
अगर आपकी आय सैलरी या पेंशन के अलावा कई स्रोतों से आती है, जैसे:
दो हाउस प्रॉपर्टी से किराया
शेयर, म्यूचुअल फंड या डिविडेंड से लाभ
विदेश से आमदनी
तो ITR-2 आपके लिए उपयुक्त रहेगा। ध्यान रहे कि यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनका कोई व्यवसाय नहीं है।
फ़ॉर्म
किसके लिए
इनकम की सीमा
जटिलता
ITR-1
आयकर विभाग की सख्ती का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को भयभीत करना नहीं, बल्कि टैक्स प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। यदि आप ईमानदारी से अपनी इनकम रिपोर्ट करते हैं, सही फॉर्म चुनते हैं और किसी भी प्रकार की झूठी कटौती से बचते हैं, तो न केवल आप कानूनी संकटों से बच सकते हैं, बल्कि देश की टैक्स व्यवस्था को भी मजबूत कर सकते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।