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इमरजेंसी को जानकर, युवा पीढ़ी समझेगी लोकतंत्र के मायने

None • 2023-06-19 08:02:11
इमरजेंसी को जानकर, युवा पीढ़ी समझेगी लोकतंत्र के मायने

पीएम मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 102 वें संस्करण में कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों और अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (narendra modi) ने आजादी के अमृत महोत्सव के बीच आपातकाल(emergency) जैसे देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों की चर्चा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आज कहा कि इससे आज की युवा पीढी़ को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में ज्यादा आसानी होगी।

पीएम मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 102 वें संस्करण में कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों और अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं। इसलिए हम 25 जून को भी कभी भुला नहीं सकते। यह वही दिन है जब हमारे देश पर आपातकाल थोपा गया था। उन्होंने कहा कि यह भारत के इतिहास का काला दौर था। लाखों लोगों ने आपातकाल का पूरी ताकत से विरोध किया था। लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएं दी गईं कि आज भी, मन, सिहर उठता है।

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पीएम मोदी ने कहा कि इन अत्याचारों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई सजाओं पर बहुत सी पुस्तक लिखी गई हैं। उन्हें भी ‘संघर्ष में गुजरात’ नाम से एक किताब लिखने का उस समय मौका मिला था। कुछ दिनों पहले ही आपातकाल पर लिखी एक और किताब आई जिसका शीर्षक है - भारत में राजनीतिक कैदियों की प्रताड़ना। आपातकाल के दौरान छपी इस पुस्तक में वर्णन किया गया है, कि कैसे, उस समय की सरकार, लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी। इस किताब में ढेर सारे शोध अध्ययन हैं, बहुत सारे चित्र हैं। मैं चाहूंगा कि, आज, जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरूर अवलोकन करें, इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी। पीएम मोदी ने विभिन्न प्रदेशों के राज भवनों में हुए दिलचस्प आयोजनों का उल्लेख किया कि अब देश में राजभवन की पहचान, सामाजिक और विकास कार्यों से होने लगी है। आज, हमारे राजभवन, टीबी मुक्त भारत अभियान के, प्राकृतिक खेती से जुड़े अभियान के, ध्वजवाहक बन रहे हैं। बीते समय में गुजरात हो, गोवा हो, तेलंगाना हो, महाराष्ट्र हो, सिक्किम हो, इनके स्थापना दिवस को, अलग-अलग राजभवन ने जिस उत्साह के साथ मनाया, वह अपने आप में एक मिसाल है। यह एक बेहतरीन पहल है जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाती है।

#Shah Times

पीएम मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 102 वें संस्करण में कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों और अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (narendra modi) ने आजादी के अमृत महोत्सव के बीच आपातकाल(emergency) जैसे देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों की चर्चा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आज कहा कि इससे आज की युवा पीढी़ को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में ज्यादा आसानी होगी।

पीएम मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 102 वें संस्करण में कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों और अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं। इसलिए हम 25 जून को भी कभी भुला नहीं सकते। यह वही दिन है जब हमारे देश पर आपातकाल थोपा गया था। उन्होंने कहा कि यह भारत के इतिहास का काला दौर था। लाखों लोगों ने आपातकाल का पूरी ताकत से विरोध किया था। लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएं दी गईं कि आज भी, मन, सिहर उठता है।

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पीएम मोदी ने कहा कि इन अत्याचारों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई सजाओं पर बहुत सी पुस्तक लिखी गई हैं। उन्हें भी ‘संघर्ष में गुजरात’ नाम से एक किताब लिखने का उस समय मौका मिला था। कुछ दिनों पहले ही आपातकाल पर लिखी एक और किताब आई जिसका शीर्षक है - भारत में राजनीतिक कैदियों की प्रताड़ना। आपातकाल के दौरान छपी इस पुस्तक में वर्णन किया गया है, कि कैसे, उस समय की सरकार, लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी। इस किताब में ढेर सारे शोध अध्ययन हैं, बहुत सारे चित्र हैं। मैं चाहूंगा कि, आज, जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरूर अवलोकन करें, इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी। पीएम मोदी ने विभिन्न प्रदेशों के राज भवनों में हुए दिलचस्प आयोजनों का उल्लेख किया कि अब देश में राजभवन की पहचान, सामाजिक और विकास कार्यों से होने लगी है। आज, हमारे राजभवन, टीबी मुक्त भारत अभियान के, प्राकृतिक खेती से जुड़े अभियान के, ध्वजवाहक बन रहे हैं। बीते समय में गुजरात हो, गोवा हो, तेलंगाना हो, महाराष्ट्र हो, सिक्किम हो, इनके स्थापना दिवस को, अलग-अलग राजभवन ने जिस उत्साह के साथ मनाया, वह अपने आप में एक मिसाल है। यह एक बेहतरीन पहल है जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाती है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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