कूनो में फिर गूंजी चीतों की किलकारी
श्योपुर, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्मी 32 महीने की मादा चीता KJP21 ने 5 अक्टूबर 2026 को पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इन नए मेहमानों के आने के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। यह जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अपडेट में दी गई है।
KJP21 बनी मां, पांच शावकों का जन्म
KJP21 कूनो में जन्मी मादा चीता है और अब वह भारत में जन्म लेने के बाद यहीं शावकों को जन्म देने वाली तीसरी मादा चीता बन गई है। इससे पहले मुख़ी और KGP12 भारत में जन्म लेने के बाद प्रजनन कर चुकी हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार KJP21 के पांचों शावक स्वस्थ बताए गए हैं। इनके जन्म ने प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में विकसित हो रही अगली पीढ़ी के लिए एक अहम उपलब्धि दर्ज की है।
बोत्सवाना की वंशावली भी जुड़ी
इस जन्म की एक और खास बात है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इन पांच शावकों के पिता बोत्सवाना से लाया गया नर चीता है। यानी इन शावकों के जरिए भारत में बोत्सवाना की आनुवंशिक वंशावली की शुरुआत हुई है। इससे देश में बढ़ रही चीता आबादी में एक नई आनुवंशिक लाइन जुड़ती है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि को प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया और इससे जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ तथा अन्य टीमों के प्रयासों की सराहना की।
60 हुआ भारत में चीतों का कुनबा
पांच शावकों के जन्म के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 60 पहुंच गई है। इनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम अब केवल विदेश से चीतों को लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में प्रजनन के जरिए नई पीढ़ी भी तैयार हो रही है। इससे पहले मार्च 2026 में कूनो में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया था। उस समय भारत में चीतों की कुल संख्या 53 पहुंची थी।
2022 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट चीता
भारत में चीतों को फिर से बसाने के लिए प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। पहले चरण में नामीबिया से आठ चीते कूनो लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत पहुंचे। 2026 में बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से स्थापित करना और उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित करना है। कूनो को इसके लिए प्रमुख स्थल के रूप में विकसित किया गया है।
आगे क्या होगा?
KJP21 के पांच शावकों का जन्म निश्चित रूप से प्रोजेक्ट चीता के लिए सकारात्मक घटनाक्रम है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण में केवल जन्म ही पर्याप्त नहीं होता। आने वाले समय में इन शावकों का स्वास्थ्य, जीवित रहने की क्षमता, प्राकृतिक व्यवहार और उनके आवास में अनुकूलन महत्वपूर्ण रहेगा।सरकारी स्तर पर कूनो के साथ अन्य संभावित चीता आवासों को विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में चीता आबादी को व्यापक और टिकाऊ प्राकृतिक परिदृश्य उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष
कूनो नेशनल पार्क में KJP21 के पांच शावकों का जन्म भारत में चीता संरक्षण की कहानी का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। 60 चीतों का आंकड़ा और उनमें 41 का भारत में जन्म लेना इस कार्यक्रम के प्रजनन पक्ष में दर्ज हुई उल्लेखनीय प्रगति को दिखाता है। अब इन नन्हे शावकों का सुरक्षित विकास और लंबे समय तक टिकाऊ चीता आबादी का निर्माण आगे की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।