📍 मोहाली 🗓️ 22 सितंबर 2026 ✍️ Wasi Siddiqui
प्रवर्तन निदेशालय ने GMADA कार्यालय में तलाशी लेकर रेमीगेट और CLU मामलों के रिकॉर्ड खंगाले। 3 मंजिलें सील कर वरिष्ठ अफसरों से पूछताछ की गई।
पंजाब के मोहाली में Greater Mohali Area Development Authority से जुड़े मामलों की जांच अब और गहराती दिख रही है। 22 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने GMADA के कार्यालय में तलाशी अभियान चलाया और कई अहम रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। कार्रवाई के दौरान कार्यालय की कम से कम 3 मंजिलें सील किए जाने की जानकारी सामने आई है।
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ED की टीम CRPF जवानों के साथ GMADA कार्यालय पहुंची। एजेंसी ने रेमीगेट मामले से जुड़े दस्तावेजों के अलावा निजी बिल्डरों को कथित तौर पर गलत तरीके से दिए गए Change of Land Use यानी CLU अनुमोदनों से संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले।
जांच के दौरान GMADA के वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। इनमें एस्टेट ऑफिसर, एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर और चीफ इंजीनियर शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों से हाउसिंग विभाग के सचिव के कमरे में पूछताछ की गई। शीर्ष अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जांच टीम ने अपने कब्जे में लिए। कुछ अधिकारियों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इस संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि सामने नहीं आई है।
ED की मौजूदा कार्रवाई का दायरा केवल एक प्रॉपर्टी विवाद तक सीमित नहीं बताया गया है। एजेंसी कथित तौर पर जमीन अधिग्रहण, CLU मंजूरियों, निजी रियल एस्टेट कंपनियों को दिए गए संभावित लाभ और प्रॉपर्टी नीलामी से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।
इनमें रेमीगेट से जुड़ा मामला खास तौर पर जांच के केंद्र में है। मामला मोहाली के सेक्टर 62 में करीब 1.13 एकड़ की जमीन पर प्रस्तावित फूड कोर्ट साइट से संबंधित है।
ED पहले से ही रेमीगेट को दी गई 40 करोड़ रुपये से अधिक की कथित छूट से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। यह जमीन वर्ष 2015 में नीलामी के जरिए आवंटित की गई थी। GMADA के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, साइट को लगभग 32.50 करोड़ रुपये की कीमत पर आवंटित किया गया था।
बाद में इस साइट को लेकर बकाया रकम, निर्माण संबंधी शुल्क और ब्याज का विवाद सामने आया। फरवरी 2026 में लगभग 40 करोड़ रुपये की देनदारी और दंडात्मक ब्याज से जुड़ी राहत का मामला सामने आया था। पंजाब के वित्त विभाग ने इस प्रक्रिया को लेकर प्रक्रियागत और कानूनी आपत्तियां भी दर्ज की थीं।
ED ने जुलाई और अगस्त 2026 में इस मामले से जुड़े दस्तावेज और अधिकारियों से जानकारी मांगी थी। जांच एजेंसी ने GMADA अधिकारियों को दिल्ली बुलाकर रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था।
GMADA से जुड़े मामलों में ED की कार्रवाई पहले भी सामने आती रही है। मई 2026 में एजेंसी ने मोहाली और चंडीगढ़ में करीब 12 ठिकानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई कथित तौर पर CLU लाइसेंस हासिल करने में धोखाधड़ी और रियल एस्टेट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का हिस्सा थी।
इसी जांच से जुड़े एक अन्य मामले में Royale Estate Group और Chandigarh Royale City Promoters Pvt Ltd से संबंधित परिसरों पर भी तलाशी हुई थी। इस मामले में GMADA को करीब 32.67 करोड़ रुपये की कथित वैधानिक देनदारी और चेक बाउंस से जुड़े आरोपों की जांच का हिस्सा बनाया गया था।
CLU यानी भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया है। किसी जमीन के निर्धारित उपयोग को बदलने की अनुमति इसी प्रक्रिया से जुड़ी होती है।
ED यह देख रही है कि क्या कुछ मामलों में CLU मंजूरियों, जमीन अधिग्रहण या अन्य प्रशासनिक फैसलों के जरिए निजी रियल एस्टेट कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। फिलहाल ये जांच के आरोप और संदेह हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
GMADA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, सेक्टर 62 में फूड कोर्ट साइट की नीलामी सितंबर 2015 में हुई थी। दस्तावेजों में साइट की बिक्री कीमत करीब 32.50 करोड़ रुपये दर्ज है। बाद में साइट के कब्जे, सुविधाओं और देनदारियों को लेकर विवाद सामने आया।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, GMADA की ओर से साइट को पूरी तरह बाधामुक्त स्थिति में उपलब्ध कराने को लेकर विवाद रहा। इसी पृष्ठभूमि में बकाया शुल्क और ब्याज से संबंधित रकम में राहत का मामला उठा।
ED अब इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजी फैसलों, अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जांच रही है।
ताजा तलाशी के बाद एजेंसी के पास GMADA के प्रशासनिक और प्रॉपर्टी संबंधी रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा पहुंचा है। इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और निजी पक्षों से आगे पूछताछ हो सकती है।
अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो ED Prevention of Money Laundering Act के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि जांच जारी है।
GMADA मोहाली और आसपास के इलाके में शहरी विकास, जमीन अधिग्रहण, प्लानिंग और प्रॉपर्टी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक काम करता है। इसलिए इसके फैसलों से जुड़े किसी भी कथित वित्तीय या नियामकीय उल्लंघन की जांच का असर सरकारी राजस्व, निजी निवेशकों और जमीन मालिकों पर पड़ सकता है।
ताजा ED कार्रवाई इसी वजह से महत्वपूर्ण है। जांच का अगला चरण यह स्पष्ट करेगा कि सामने आए रिकॉर्ड केवल प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करते हैं या इनके पीछे वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग की कोई स्थापित कड़ी भी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि ED ने GMADA कार्यालय में तलाशी ली है, 3 मंजिलें सील की गई हैं और रेमीगेट समेत कई मामलों के दस्तावेज जांच के दायरे में हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।