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UP में माफिया को लेकर CM योगी का बड़ा बयान, बोले 2017 से पहले हर जिले में चलता था समानांतर राज

Mohammad Naved • 2026-10-01 12:56:20
UP में माफिया को लेकर CM योगी का बड़ा बयान, बोले 2017 से पहले हर जिले में चलता था समानांतर राज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले यूपी में माफिया के प्रभाव और अराजकता का दावा किया। बयान 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र देने के कार्यक्रम में आया।


📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

🗓️ 28 सितंबर 2026

✍️Mohd Naved



उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और माफिया का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में 2017 से पहले की स्थिति को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश के हर जिले में माफिया सक्रिय था और उनकी समानांतर सरकार चलती थी।

मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक संदर्भ में आया। इसलिए इसमें किए गए आरोपों को मुख्यमंत्री के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।


जरूरी तथ्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह टिप्पणी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपने के कार्यक्रम के दौरान की। उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने भी इस कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी जारी की थी।

कार्यक्रम का मुख्य विषय रोजगार और ग्रामीण प्रशासन से जुड़ा था। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक माहौल पर अपना राजनीतिक दृष्टिकोण रखा।


मुख्यमंत्री का मुख्य दावा

योगी आदित्यनाथ के अनुसार 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल था। उन्होंने कहा कि हर जिले में माफिया सक्रिय था और उनकी समानांतर सरकार चलती थी। मुख्यमंत्री ने मौजूदा व्यवस्था को इससे अलग बताते हुए कहा कि आज प्रदेश कर्फ्यू, दंगे, माफिया और उपद्रव से मुक्त है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान को पिछली सरकारों की कार्यशैली से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर भी राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में सरकारी योजनाओं और रोजगार व्यवस्था में आम युवाओं के सामने कई बाधाएं थीं।


नियुक्ति पत्र वितरण भी रहा मुख्य मुद्दा

28 सितंबर के कार्यक्रम में 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। कार्यक्रम के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना विभाग ने पहले ही आधिकारिक सूचना जारी की थी।

सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले युवाओं को बधाई दी और रोजगार तथा ग्रामीण प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नियुक्ति पत्र वितरण को सरकार के मिशन रोजगार से भी जोड़ा गया।


2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का संदर्भ

2017 से पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस लंबे समय से जारी रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सार्वजनिक भाषणों में उस अवधि को अक्सर माफिया, दंगे, वसूली और असुरक्षा से जोड़ते रहे हैं। मई 2026 में भी उन्होंने इसी संदर्भ में हर जिले में माफिया के सक्रिय होने की बात कही थी।

जुलाई 2026 में बुलंदशहर के एक कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि 2017 से पहले हर जिले में माफिया और थानों में वसूली का सिंडिकेट सक्रिय था।

इन बयानों से स्पष्ट है कि 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री के मौजूदा राजनीतिक नैरेटिव का एक प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।


आंकड़ों का संदर्भ क्या कहता है

2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में 2,82,171 IPC अपराध दर्ज हुए थे। यह उस वर्ष देश में दर्ज कुल IPC अपराधों का 9.5% था। आधिकारिक आंकड़ों में हत्या, दंगा, डकैती और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी अलग-अलग श्रेणियां दर्ज हैं।

हालांकि इन आधिकारिक अपराध आंकड़ों में “हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार” जैसी कोई अलग सांख्यिकीय श्रेणी नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री के इस विशिष्ट दावे की पुष्टि केवल सामान्य अपराध आंकड़ों से नहीं की जा सकती।

यह अंतर पत्रकारिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अपराध के आंकड़े किसी राज्य में दर्ज आपराधिक घटनाओं की तस्वीर देते हैं, जबकि “माफिया की समानांतर सरकार” एक राजनीतिक और प्रशासनिक आकलन है।


मौजूदा स्थिति पर सरकार का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में बदलाव आया है। उनके हालिया बयानों में माफिया के खिलाफ कार्रवाई, दंगों में कमी और व्यापारियों तथा महिलाओं की सुरक्षा को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया गया है।

इन दावों का आकलन करते समय अपराध के अलग-अलग वर्गों, FIR, आरोपपत्र, दोषसिद्धि, पुलिस कार्रवाई और न्यायिक परिणामों को अलग-अलग देखना जरूरी है। केवल राजनीतिक बयान के आधार पर कानून-व्यवस्था की पूरी तस्वीर तय नहीं होती।


राजनीतिक संदर्भ

मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2017 से पहले और बाद की तुलना लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है। सरकार अपने कार्यकाल को कानून-व्यवस्था, निवेश और रोजगार के मुद्दों से जोड़ती है, जबकि विपक्ष सरकार के दावों पर अलग राजनीतिक दृष्टिकोण रखता है।

इसलिए “2017 से पहले माफिया राज” और “2017 के बाद माफिया मुक्त यूपी” जैसे नैरेटिव को राजनीतिक दावे के रूप में देखना अधिक सटीक है। वास्तविक स्थिति समझने के लिए अपराध आंकड़ों, पुलिस कार्रवाई, न्यायिक फैसलों और जिला स्तर के रिकॉर्ड का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक होगा।


महत्वपूर्ण तारीख और आंकड़े

28 सितंबर 2026 को लखनऊ में 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए।

कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने कार्यक्रम की आधिकारिक सूचना जारी की थी।

2016 में उत्तर प्रदेश में 2,82,171 IPC अपराध दर्ज हुए थे। राष्ट्रीय स्तर पर उस वर्ष कुल IPC अपराध 29,75,711 थे।


आगे क्या

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था को लेकर ऐसे बयान आगे भी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने रहने की संभावना है। इस मुद्दे पर तथ्यात्मक समीक्षा के लिए अलग-अलग वर्षों के अपराध आंकड़े, माफिया से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई, संपत्ति जब्ती, आरोपपत्र और अदालतों में हुए फैसलों को साथ रखकर देखना जरूरी होगा।

वहीं, 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों की नियुक्ति के बाद ग्रामीण प्रशासन में इन अधिकारियों की भूमिका और उनके कामकाज का असर भी आगे महत्वपूर्ण रहेगा।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 सितंबर 2026 को कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के हर जिले में माफिया सक्रिय था और समानांतर सरकार चलती थी। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध आधिकारिक अपराध आंकड़े उस दौर में उत्तर प्रदेश में दर्ज अपराधों की गंभीर तस्वीर जरूर दिखाते हैं, लेकिन “हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार” जैसी व्यापक राजनीतिक व्याख्या को सीधे आंकड़ों से प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

इसलिए इस बयान का सही पत्रकारिता संदर्भ यही है कि मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर यह आरोप लगाया है, जबकि इसके व्यापक दावे का स्वतंत्र मूल्यांकन अलग-अलग अपराध और न्यायिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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