भारत की पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में एक ऐसा पौधा है जिसे सदियों से रोगों का प्रबल शत्रु माना गया है—चित्रक। ग्रामीण अंचलों से लेकर आयुर्वेदिक औषधालयों तक, इसके फूल और जड़ को “बीमारियों का काल” कहा जाता है। आखिर क्या है इस उपाधि के पीछे का विज्ञान और विश्वास?
क्यों है चित्रक ओषधीय शक्ति का केंद्र
चित्रक एक झाड़ीदार औषधीय पौधा है, जिसके सफेद (कभी-कभी लाल) फूल और तीक्ष्ण जड़ विशेष रूप से उपयोग में लाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसका रस कटु (तीखा), गुण उष्ण और प्रभाव अत्यंत तीव्र होता है। यही कारण है कि इसे शरीर में जमे “आम” (टॉक्सिन) को नष्ट करने वाला माना जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार चित्रक में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व प्लम्बाजिन जीवाणुरोधी, सूजनरोधी और पाचनशक्ति बढ़ाने वाले गुणों से युक्त होता है।
किन बीमारियों में किया जाता है उपयोग?
जोड़ों के दर्द से राहत
दूसरा, अगर जोड़ों में दर्द की परेशानी है या फिर सूजन की परेशानी है, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा दर्द में राहत पाने के लिए प्रभावित स्थान पर लेप भी लगाया जा सकता है.
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।