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लगातार मोबाइल देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Neelam Saini • 2026-07-11 08:35:55
लगातार मोबाइल देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

लगातार मोबाइल देखने से आंखें हो सकती हैं प्रभावित, जानिए बचाव के उपाय

मोबाइल स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल आंखों के लिए कितना सुरक्षित? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

क्या घंटों मोबाइल चलाना आंखों की रोशनी कम करता है? जानिए वैज्ञानिक तथ्य

स्मार्टफोन आज जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन घंटों तक लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन और डिजिटल आई स्ट्रेन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही स्क्रीन आदतें अपनाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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📍 Location: भारत
📰 Date: 11 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini

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लगातार मोबाइल देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है? आइए जानते हैं

डिजिटल दौर में बढ़ती चुनौती

स्मार्टफोन अब केवल बातचीत का माध्यम नहीं रहा, बल्कि पढ़ाई, नौकरी, मनोरंजन, बैंकिंग और सोशल मीडिया तक हर काम का हिस्सा बन चुका है। इसके साथ ही स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय भी लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम आंखों की सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि मोबाइल स्क्रीन सीधे आंखों की स्थायी रोशनी कम कर देती है। लेकिन लंबे समय तक बिना ब्रेक के स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव जरूर बढ़ता है।

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डिजिटल आई स्ट्रेन क्या है?

विशेषज्ञ इस समस्या को डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहते हैं। यह तब होता है जब व्यक्ति लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट की स्क्रीन पर लगातार नजरें टिकाए रखता है। ऐसी स्थिति में आंखों की मांसपेशियां लगातार काम करती रहती हैं, जिससे थकान महसूस होने लगती है।

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आंखों में सूखापन बढ़ सकता है

मोबाइल देखते समय व्यक्ति सामान्य से कम पलकें झपकाता है। इससे आंखों की सतह पर मौजूद प्राकृतिक नमी तेजी से कम होने लगती है। इसके कारण आंखों में जलन, खुजली, लालपन और सूखापन महसूस हो सकता है। एयर कंडीशनर वाले कमरों में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से यह समस्या और बढ़ सकती है।

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धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द

कई लोगों को लंबे समय तक मोबाइल चलाने के बाद कुछ देर के लिए धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके साथ सिरदर्द और आंखों के आसपास भारीपन भी महसूस हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आंखों पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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क्या मोबाइल से आंखों की रोशनी कम हो जाती है?

यह एक आम धारणा है कि मोबाइल चलाने से स्थायी रूप से आंखों की रोशनी चली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान वैज्ञानिक शोध इस दावे की पुष्टि नहीं करते। हालांकि लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान बढ़ सकती है और जिन लोगों को पहले से दृष्टि संबंधी समस्या है, उनमें लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

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बच्चों पर अधिक असर क्यों?

बच्चों की आंखें अभी विकास की अवस्था में होती हैं। इसलिए विशेषज्ञ बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित रखने की सलाह देते हैं। लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से उनकी बाहरी गतिविधियां कम हो सकती हैं। कई शोधों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम और बढ़ती मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के बीच संबंध पर चर्चा की गई है, हालांकि इसके पीछे केवल मोबाइल नहीं बल्कि बाहरी खेलकूद में कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।

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नींद की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है असर

रात में सोने से ठीक पहले मोबाइल का इस्तेमाल केवल आंखों को ही नहीं बल्कि नींद को भी प्रभावित कर सकता है। स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है, जिससे देर से नींद आने या नींद की गुणवत्ता खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।

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बचाव कैसे करें?

नेत्र विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यानी हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसके अलावा स्क्रीन की ब्राइटनेस वातावरण के अनुसार रखें, मोबाइल को आंखों से लगभग 16 से 18 इंच की दूरी पर रखें, पर्याप्त रोशनी में ही स्क्रीन का उपयोग करें और समय-समय पर पलकें झपकाते रहें।

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कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि आंखों में लगातार दर्द, धुंधलापन, बार-बार सिरदर्द, लालपन या देखने में परेशानी बनी रहती है, तो स्वयं इलाज करने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से कई गंभीर नेत्र रोगों का भी शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।

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विशेषज्ञों की राय

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार डिजिटल स्क्रीन का अधिक उपयोग आंखों में अस्थायी असुविधा पैदा कर सकता है, लेकिन स्थायी नुकसान से बचने के लिए सही स्क्रीन आदतें अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मोबाइल का उपयोग आवश्यकतानुसार करें और स्क्रीन टाइम को संतुलित रखें।

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निष्कर्ष

लगातार मोबाइल देखने से आंखों पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से कम हो जाएगी। सबसे बड़ा खतरा डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों का सूखापन, सिरदर्द और नींद में बाधा जैसी समस्याओं का है। यदि स्क्रीन टाइम को नियंत्रित रखा जाए, नियमित ब्रेक लिया जाए और आंखों की समय-समय पर जांच कराई जाए, तो इन समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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