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अवैध धर्मांतरण मामले में 12 मुजरिमों को उम्रकैद

None 2024-09-12 08:53:32
अवैध धर्मांतरण मामले में 12 मुजरिमों को उम्रकैद

 एनआईए एटीएस कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण मामले में मौलाना उमर गौतम, मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 16 मुजरिमों को कसूरवार करार दिया है।कोर्ट ने इनमें से 12 को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मुजफ्फरनगर, (शाह टाइम्स)। अवैध धर्मांतरण मामले में विशेष एनआईए-एटीएस कोर्ट ने मौलाना उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 12 अन्य मुजरिमों को कसूरवार पाए जाने पर उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

कोर्ट ने अन्य 4 मुजरिमों राहुल भोला, मन्नू यादव, कुणाल अशोक चौधरी और सलीम पर लगाई गई धाराओं के मुताबिक 10 साल कैद के साथ जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने कल सभी को दोषी करार दिया था और आज सजा का ऐलान किया। एनआईए एटीएस कोर्ट के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 417, 120बी, 153ए, 153बी, 295ए, 121ए, 123 और अवैध धर्मांतरण अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत दोषी ठहराया। इन धाराओं के तहत आरोपियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई है। अवैध धर्मांतरण के इस मामले में कुल 17 आरोपी थे, जिनमें से 16 को दोषी करार दिया जा चुका है।  17वें आरोपी इदरीस कुरैशी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्थगन मिल गया है।

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र के फुलत गांव निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी ने पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली। इसके बाद वह दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा।

 एमबीबीएस की पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामिक स्कॉलर बन गया। मौलाना ने 18 साल तक दिल्ली के शाहीन बाग में अपना ठिकाना बनाया था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को उत्तर प्रदेश एटीएस ने 22 सितंबर 2021 की रात दिल्ली-देहरादून हाईवे पर दौराला-मटौर के बीच गिरफ्तार किया था। उसे और उसके साथियों को बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 562 दिन जेल में रहने के बाद अप्रैल 2023 में कलीम को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी।

 हाईकोर्ट के इस फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई शुरू हुई, जिसमें कलीम सिद्दीकी की जमानत पर शर्तें लगाई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी की गतिविधियों पर रोक लगा दी।  उन्हें एनसीआर छोड़ने पर रोक लगा दी गई है और अदालत ने उन्हें अपने फोन की लोकेशन हमेशा ऑन रखने का भी निर्देश दिया है ताकि जांच अधिकारी उन्हें ट्रैक कर सकें।

 मौलाना कलीम सिद्दीकी ने वर्ष 1991 में जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया मदरसा की स्थापना की थी। उन्होंने गांव में पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए स्कूल की स्थापना की थी, लेकिन बाद में इसे केरल की एक संस्था को सौंप दिया। वह ग्लोबल पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर रहे थे।

 इस मामले में कलीम सिद्दीकी के अन्य सहयोगियों मौलाना उमर गौतम और मुफ्ती काजी की भी गिरफ्तारी हुई थी। उत्तर प्रदेश एटीएस ने आरोप लगाया था कि ये सभी धर्मांतरण की साजिश रच रहे थे और विदेशी फंडिंग की मदद से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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