लोकसभा में गुरुवार को भी विपक्षी दलों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका। विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सांसदों से अपने स्थान पर लौटकर प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन लगातार नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
📍 स्थान: नई दिल्ली
📰 तारीख: 6 अगस्त 2026
✍️ By: Apurva Choudhary
अयोध्या चढ़ावा विवाद और छात्रों के मुद्दे पर संसद में जोरदार विरोध
गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसके चलते प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं चल सकी और अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की बैठक दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही की शुरुआत हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की 81वीं बरसी पर श्रद्धांजलि के साथ हुई। अध्यक्ष ओम बिरला ने इस ऐतिहासिक त्रासदी में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके बाद सदन ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि के बाद जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। विपक्ष का आरोप था कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए।
हंगामे के कारण कोई भी सांसद अपना प्रश्न नहीं पूछ सका और सरकार भी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकी। संसद का प्रश्नकाल वह समय माना जाता है जब सांसद सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं और विभिन्न मंत्रालयों की जवाबदेही तय होती है।
स्थिति बिगड़ती देख अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से शांत रहने और अपने स्थान पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल संसद की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाही होती है और देश की जनता अपने प्रतिनिधियों के प्रश्न तथा सरकार के उत्तर सुनना चाहती है।
उन्होंने विपक्ष से कहा कि यदि किसी विषय पर चर्चा करनी है तो उसके लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन लगातार हंगामा करना संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। बावजूद इसके विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे और कार्यवाही सामान्य नहीं हो सकी।
अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां संवाद तथा स्वस्थ चर्चा के माध्यम से जनता के मुद्दों का समाधान खोजा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल चलने दें, क्योंकि यह समय सीधे तौर पर जनता के हितों से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि देश की जनता यह जानना चाहती है कि उनके प्रतिनिधि सरकार से क्या सवाल पूछ रहे हैं और सरकार उनका क्या जवाब दे रही है।
स्पीकर ने कहा कि संसद की कार्यवाही को बार-बार बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की गरिमा बनाए रखते हुए अपने मुद्दे नियमों के तहत उठाए। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले प्रत्येक विषय पर चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
हालांकि अध्यक्ष की अपील का विपक्षी सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ा। वे लगातार नारेबाजी करते रहे और सदन के वेल में डटे रहे। शोर-शराबे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। आखिरकार अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही शुरू होने के लगभग पांच मिनट बाद ही सदन की बैठक दोपहर 2 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
विपक्ष किन मुद्दों पर कर रहा है विरोध?
विपक्षी दलों ने मुख्य रूप से दो मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। पहला, अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला और दूसरा, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इन दोनों मामलों पर संसद में विस्तृत जवाब देना चाहिए और चर्चा करानी चाहिए।
प्रश्नकाल क्यों होता है महत्वपूर्ण?
संसद का प्रश्नकाल लोकतांत्रिक जवाबदेही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस दौरान सांसद विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछते हैं और सरकार को तथ्यात्मक जवाब देना होता है। लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल प्रभावित होने से कई महत्वपूर्ण जनहित के प्रश्न सदन में नहीं उठ पाते, जिससे संसदीय कार्य प्रभावित होता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर दोपहर 2 बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही पर रहेगी। यदि विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध समाप्त नहीं होता, तो संसद की कार्यवाही फिर से बाधित हो सकती है। दूसरी ओर, यदि सहमति बनती है तो सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष सदन में रख सकते हैं। ऐसे में मानसून सत्र के आगामी दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।