मायावती का परिवारवाद पर नया फैसला, भतीजों को जिम्मेदारी नहीं, भतीजी दीपिका के लिए खुला रास्ता
Mohammad Naved
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2026-09-16 12:39:55
बसपा प्रमुख मायावती ने परिवारवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश और ईशान को पार्टी में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं देने की बात कही। साथ ही उन्होंने जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार की बेटी दीपिका को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना खुली रखी है।
📍 लखनऊ 🗓️ 16 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
मायावती के नए बयान से बसपा की सियासत में फिर परिवारवाद का सवाल
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर अपना रुख एक बार फिर सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को बसपा में किसी भी राजनीतिक पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी उनके बच्चों को राजनीतिक पद से दूर रखने की बात कही है।
इसी बयान में मायावती ने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद के लिए अलग संभावना रखी है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी बेटी की मदद ले सकते हैं और उसकी ईमानदारी, वफादारी तथा कार्यक्षमता को देखते हुए भविष्य में उसे पार्टी में जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है।
आकाश आनंद का राजनीतिक सफर फिर चर्चा में
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब आकाश आनंद को लेकर बसपा में लगातार बड़े बदलाव हुए हैं। आकाश आनंद को पहले मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था। अगस्त 2026 में वे लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक अभियान में फिर सक्रिय हुए थे।
इसके बाद सितंबर 2026 में घटनाक्रम तेजी से बदला। 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया और 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी मुक्त कर दिया।
मायावती ने आकाश आनंद को लेकर परिवार को पार्टी से अधिक प्राथमिकता देने और पार्टी लाइन के अनुरूप काम नहीं करने जैसे आरोप लगाए थे। ये आरोप मायावती के अपने सार्वजनिक बयानों का हिस्सा हैं।
ईशान आनंद को लेकर भी साफ किया रुख
आकाश आनंद के साथ ही मायावती ने अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को लेकर भी भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर रोक लगाने की बात कही है।
मायावती के मुताबिक आनंद कुमार के दोनों बेटों को बसपा में छोटा या बड़ा कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था भविष्य में उनके बच्चों पर भी लागू रहने की बात कही गई है।
इस फैसले से बसपा में आनंद कुमार के परिवार के पुरुष सदस्यों की औपचारिक राजनीतिक भूमिका पर फिलहाल विराम लगता दिखाई देता है।
फिर दीपिका आनंद का नाम क्यों आया?
मायावती के बयान का सबसे अहम हिस्सा दीपिका आनंद से जुड़ा है। आनंद कुमार की बेटी दीपिका फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने उन्हें तत्काल पार्टी पद देने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने केवल भविष्य में जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी देने की संभावना रखी है।
मायावती ने यह भी कहा कि यदि दीपिका जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी की सहमति से किसी अन्य दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दीपिका के नाम को उन्होंने एक संभावित विकल्प के रूप में रखा है, अंतिम उत्तराधिकारी के तौर पर घोषित नहीं किया है।
परिवारवाद पर मायावती की दलील
मायावती ने अपने बयान में कहा कि वह बसपा संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का पालन करते हुए परिवारवाद के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि पार्टी और बहुजन आंदोलन को किसी एक परिवार तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन में युवाओं को अधिक भागीदारी देने की प्रक्रिया जारी है। आगामी विधानसभा चुनावों में युवा चेहरों को प्राथमिकता देने की बात भी उनके बयान में सामने आई है।
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। मायावती ने दीपिका को तत्काल कोई राजनीतिक पद देने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने योग्यता और जरूरत के आधार पर भविष्य में जिम्मेदारी की संभावना जताई है।
आकाश आनंद को लेकर पहले क्या हुआ?
आकाश आनंद का मामला बसपा में नेतृत्व और परिवारवाद की बहस का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्हें मायावती ने सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ाया और बाद में पार्टी के प्रमुख पदों की जिम्मेदारी भी मिली।
हालांकि उनके राजनीतिक सफर में कई बार बदलाव हुए। उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया गया, फिर वापस लाया गया और बाद में सितंबर 2026 में दोबारा पार्टी से बाहर कर दिया गया।
10 सितंबर के घटनाक्रम में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का मामला भी जुड़ा रहा। अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। इसके बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी में बनाए रखने के बजाय उन्हें बाहर करने का फैसला किया।
परिवारवाद की बहस का दूसरा पहलू
मायावती के ताजा बयान पर राजनीतिक चर्चा का केंद्र यही है कि उन्होंने परिवार के पुरुष सदस्यों को राजनीतिक पद से बाहर रखने की स्पष्ट घोषणा की है, जबकि परिवार की एक महिला सदस्य के लिए भविष्य में जिम्मेदारी की संभावना रखी है।
इसे सीधे तौर पर परिवारवाद की पुष्टि या खंडन मानना राजनीतिक टिप्पणी का विषय है। तथ्यात्मक रूप से इतना स्पष्ट है कि मायावती ने आकाश और ईशान के लिए राजनीतिक पदों का रास्ता बंद करने की बात कही है, जबकि दीपिका के लिए सशर्त संभावना खुली रखी है।
यही अंतर इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से अहम बनाता है।
बसपा की अगली पीढ़ी पर फोकस
मायावती के बयान में केवल परिवार का मुद्दा नहीं है। उन्होंने संगठन में युवा भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने संगठन में युवाओं को करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने और आगामी चुनावों में युवा चेहरों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
यह रुख उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है। बसपा के सामने संगठन को सक्रिय करने और नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को जोड़ने की चुनौती भी है।
कांशीराम की विरासत का संदर्भ
बसपा की राजनीति में कांशीराम की विरासत केंद्रीय मुद्दा रही है। मायावती ने अपने ताजा बयान में भी कांशीराम के परिवारवाद विरोधी सिद्धांत का हवाला दिया है।
उनका कहना है कि पार्टी को परिवार आधारित राजनीतिक उत्तराधिकार से अलग रखना जरूरी है, ताकि बहुजन समाज और आंदोलन से जुड़े दूसरे कार्यकर्ताओं को भी नेतृत्व का अवसर मिल सके।
लेकिन दीपिका को लेकर रखी गई सशर्त संभावना ने इस बहस को और जटिल बना दिया है। अब असल सवाल यह है कि भविष्य में दीपिका को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलती है या नहीं और यदि मिलती है तो उसका स्वरूप क्या होता है।
अभी उत्तराधिकारी का औपचारिक ऐलान नहीं
मौजूदा स्थिति में दीपिका आनंद को मायावती का औपचारिक राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उन्हें भविष्य के नेतृत्व से जोड़कर देखा गया है, लेकिन मायावती के उपलब्ध बयान में तत्काल उत्तराधिकार की घोषणा नहीं है।
इसलिए दीपिका को अभी से बसपा की अगली प्रमुख या उत्तराधिकारी के रूप में पेश करना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।
आगे क्या होगा?
आने वाले महीनों में बसपा की संगठनात्मक नियुक्तियां इस पूरे मामले की दिशा स्पष्ट करेंगी। यदि दीपिका को कोई औपचारिक जिम्मेदारी मिलती है, तो उसके मानदंड और भूमिका पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
दूसरी तरफ यदि पार्टी परिवार से बाहर किसी मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देती है, तो मायावती के परिवारवाद विरोधी दावे का संगठनात्मक मॉडल अलग रूप में सामने आएगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि मायावती ने आकाश और ईशान आनंद के लिए राजनीतिक पदों का रास्ता बंद करने की घोषणा की है, जबकि दीपिका आनंद के मामले में योग्यता और आवश्यकता आधारित भविष्य की संभावना रखी है।
बसपा की राजनीति में इस फैसले का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि पार्टी आने वाले समय में नेतृत्व, संगठन और उत्तराधिकार को किस तरह संरचित करती है।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।