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(शाह टाइम्स)। नीति आयोग की बैठक में कर्नाटक, पंजाब, केरल, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, और दिल्ली की सरकारें ने अपना विरोध प्रकट किया है, जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया है कि नए बजट में उनके प्रति भेदभावपूर्ण अन्याय किया गया है। उनके अनुसार, नई योजनाओं और वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में उनके राज्यों के लिए विशेष प्रावधान नहीं किए गए हैं, जो कि उनकी अर्थव्यवस्थाओं और विकास को असामान्य नुकसान पहुंचा सकता है।
कई राज्यों का मानना है कि इस तरह के अपेक्षाओं को नकारने से उनके सामर्थ्य और विकास की गति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो भविष्य में समाज की समृद्धि और सामाजिक न्याय को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने नीति आयोग से अपनी मांगों को समझाया है और बजट तैयारी में उनकी राज्यों के विकास को ध्यान में रखने की अपेक्षा जताई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति ने विवाद को उजागर किया है। बैठक के बीच में वे नीति आयोग के विरुद्ध आपत्ति जताते हुए बैठक को छोड़ दिया था। उन्होंने इस संदर्भ में यह भी कहा कि उन्हें बैठक में बोलने का मौका नहीं दिया गया था, जिसे वे अपमानजनक मानती हैं।
ममता बनर्जी ने विवादित स्थिति पर गंभीर रूप से आपत्ति जताई और कहा कि केंद्र सरकार मनमानी कर रही है। उन्होंने बताया कि बैठक में उन्हें केवल 5 मिनट के लिए बोलने का अवसर मिला था, जबकि अन्य सदस्यों को 10-20 मिनट तक बोलने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा, विपक्षी दलों के उम्मीदवारों के बीच उनके साथ भेदभाव किया गया, जो उन्हें अपमानजनक माना गया। उन्होंने इसे केवल बंगाल की नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रीय दलों का अपमान बताया।
नीति आयोग की इस बैठक में कई विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बजट में भेदभाव का आरोप लगाते हुए बहिष्कार का ऐलान किया है। इस बहिष्कार में शामिल हैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब और दिल्ली सरकार। इसके अतिरिक्त, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी बैठक में भाग लेने से इंकार किया है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।