मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के 49 किग्रा भारोत्तोलन वर्ग में 198 किग्रा कुल भार उठाकर रजत पदक जीता। यह उनका पहला एशियन गेम्स पदक है। इस नतीजे से भारत को भारोत्तोलन में 1998 के बाद पहला एशियन गेम्स पदक मिला और प्रतियोगिता में देश की कुल पदक संख्या 11 हुई।
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📍 नागोया, जापान | 📰 23 सितंबर 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
मीराबाई चानू का इंतज़ार खत्म
भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स में अपना पहला पदक हासिल कर लिया। नागोया में महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में चानू ने कुल 198 किग्रा भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया।
चानू के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि एशियन गेम्स का पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की उन उपलब्धियों में शामिल था, जो अब तक उनके रिकॉर्ड से गायब था। इससे पहले वह ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत चुकी थीं, लेकिन एशियाई खेलों में पोडियम फिनिश नहीं कर पाई थीं।
49 किग्रा मुकाबले में चानू की वापसी
मुकाबले के स्नैच चरण में चानू ने 83 किग्रा से शुरुआत की और इसके बाद 85 तथा 87 किग्रा के प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए। 87 किग्रा के सर्वश्रेष्ठ स्नैच के बाद वह पहले चरण के अंत में तीसरे स्थान पर थीं।
क्लीन एंड जर्क में चानू ने 111 किग्रा का सफल प्रयास किया। इस प्रदर्शन ने उनका कुल स्कोर 198 किग्रा तक पहुंचाया और उन्हें सिल्वर मेडल की स्थिति में पहुंचा दिया। उपलब्ध प्रतियोगिता रिपोर्टों के मुताबिक, वह स्नैच के बाद तीसरे स्थान से क्लीन एंड जर्क के बाद दूसरे स्थान पर आईं।
उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने 215 किग्रा के कुल स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रि विजायाना ने 191 किग्रा के कुल स्कोर के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। इस तरह चानू 17 किग्रा के अंतर से स्वर्ण से पीछे रहीं।
भारत के भारोत्तोलन में 28 साल बाद पदक
मीराबाई चानू का सिल्वर भारत के लिए भी लंबे इंतज़ार का अंत है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, एशियन गेम्स में भारत का पिछला भारोत्तोलन पदक 1998 के बैंकॉक खेलों में कर्णम मल्लेश्वरी ने जीता था। इसलिए नागोया में चानू का पदक भारत के भारोत्तोलन इतिहास में 28 साल बाद एशियन गेम्स पोडियम वापसी है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 1998 के पदक को लेकर कुछ मौजूदा रिपोर्टें मल्लेश्वरी के पदक का रंग अलग-अलग बताती हैं। उपलब्ध प्रमुख रिपोर्टों में अधिक संगत विवरण सिल्वर मेडल का है, इसलिए इस रिपोर्ट में उसी विवरण को आधार बनाया गया है।
एशियन गेम्स में चानू का सफर
चानू का एशियन गेम्स सफर सीधा पोडियम तक नहीं पहुंचा। 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में उन्होंने 48 किग्रा वर्ग में हिस्सा लिया और नौवें स्थान पर रहीं। 2018 के जकार्ता-पालेमबांग खेलों में चोट के कारण वह हिस्सा नहीं ले सकीं।
2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्होंने 49 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा की, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं। उस प्रतियोगिता में अंतिम क्लीन एंड जर्क प्रयास पूरा नहीं कर पाने के कारण वह पदक से बाहर हो गई थीं।
नागोया में सिल्वर जीतने के साथ यह सिलसिला खत्म हुआ। एशियन गेम्स का पदक अब उनके अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में ओलंपिक सिल्वर, वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स की उपलब्धियों के साथ जुड़ गया है।
गोल्ड की दौड़ में क्या हुआ
गोल्ड मेडल उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम के नाम रहा। उन्होंने कुल 215 किग्रा उठाया, जिसमें 94 किग्रा स्नैच और 121 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल था। उनकी बढ़त इतनी रही कि चानू के 198 किग्रा कुल स्कोर के बावजूद स्वर्ण की स्थिति नहीं बदली।
चानू की चुनौती का सबसे अहम हिस्सा यह था कि स्नैच के बाद उन्हें पोडियम की ऊंची स्थिति हासिल करने के लिए क्लीन एंड जर्क में मजबूत प्रदर्शन करना था। 111 किग्रा के सफल प्रयास ने उन्हें दूसरे स्थान तक पहुंचाया और सिल्वर सुरक्षित किया। उपलब्ध रिकॉर्ड इस नतीजे को किसी विवादित फैसले के बजाय प्रदर्शन के आधार पर हासिल हुआ पदक दिखाते हैं।
2026 में चानू की निरंतरता
एशियन गेम्स से पहले भी 2026 चानू के लिए महत्वपूर्ण साल रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इसी वर्ष ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में अपना तीसरा लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड जीता था। वहां उनका कुल भार 190 किग्रा रहा था।
इस पृष्ठभूमि में नागोया का 198 किग्रा प्रदर्शन उनके मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्तर की निरंतरता को दिखाता है। हालांकि अलग-अलग प्रतियोगिताओं के परिणामों की सीधी तुलना करते समय प्रतियोगिता, तैयारी और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए एशियन गेम्स के इस परिणाम को उसी प्रतियोगिता के संदर्भ में देखना अधिक उपयुक्त है।
भारत की पदक तालिका में इज़ाफा
मीराबाई चानू का सिल्वर 23 सितंबर को भारत के पदक अभियान में एक और महत्वपूर्ण इज़ाफा रहा। उसी दिन की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, चानू के पदक के बाद भारत की कुल संख्या 11 हो गई, जिसमें एक गोल्ड, पांच सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज शामिल थे।
एक दिन पहले, 22 सितंबर तक भारत के खाते में एक गोल्ड, चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज यानी सात पदक दर्ज थे। महिला क्रिकेट टीम के गोल्ड ने भारत का खाता खोला था, जबकि शूटिंग और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स से भी पदक मिले थे।
इसलिए 23 सितंबर की संख्या को लाइव प्रतियोगिता के बीच का अपडेट समझना चाहिए। एशियन गेम्स के दौरान पदक तालिका लगातार बदलती रहती है और अलग-अलग समय पर प्रकाशित रिपोर्टों में कुल संख्या अलग हो सकती है। उपलब्ध ताज़ा रिपोर्ट में चानू के सिल्वर के बाद 11 पदकों का आंकड़ा दर्ज है।
आम धारणा से आगे की तस्वीर
मीराबाई चानू के पदक को केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में देखना अधूरा होगा, लेकिन इसे भारतीय भारोत्तोलन की व्यापक वापसी का निर्णायक प्रमाण मानना भी जल्दबाज़ी होगी। 28 साल के अंतराल के बाद एक पदक निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, मगर किसी खेल की दीर्घकालिक स्थिति का आकलन करने के लिए लगातार कई प्रतियोगिताओं के परिणाम, नई प्रतिभाओं की मौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन देखना जरूरी होगा।
चानू का परिणाम यह जरूर दिखाता है कि भारत के पास अभी भी विश्वस्तरीय अनुभव रखने वाली भारोत्तोलक मौजूद है। दूसरी ओर, एशियन गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजन में एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पूरे खेल की संरचना या भविष्य की स्थिति का अकेला पैमाना नहीं बन सकता।