मुजफ्फरनगर में आयोजित समीक्षा बैठक केवल विभागीय प्रगति का जायज़ा भर नहीं थी, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, विकास परियोजनाओं की रफ्तार और कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को परखने का मंच भी बनी। प्रभारी मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने जलापूर्ति, अतिक्रमण, अवैध कॉलोनियों, सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था पर स्पष्ट निर्देश दिए। साथ ही 5 से 21 जून तक चलने वाले विकास, सेवा, सुशासन और जनकल्याण अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया।
📍 Muzaffarnagar 📰 4 June 2026 ✍️ Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर में आयोजित डॉ. सोमेंद्र तोमर की समीक्षा बैठक प्रशासनिक कैलेंडर का एक नियमित कार्यक्रम भर नहीं थी। इस बैठक का नज़रिया व्यापक था। इसमें विकास, कानून व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और आगामी जनसंपर्क अभियान को एक साथ जोड़कर देखा गया। सवाल यह है कि क्या ऐसे निर्देश ज़मीन पर वास्तविक बदलाव ला पाते हैं या फिर वे सरकारी फाइलों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रह जाते हैं।
यही वह बिंदु है जहां इस बैठक का विश्लेषण महत्वपूर्ण हो जाता है।
विकास भवन सभागार में हुई बैठक के दौरान जलापूर्ति परियोजनाओं से लेकर सड़कों की स्थिति तक कई मुद्दे सामने आए। डॉ. सोमेंद्र तोमर ने स्पष्ट किया कि जहां भी जलापूर्ति के कार्य पूरे हो चुके हैं, वहां सड़कें खुली नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
यह निर्देश सुनने में सामान्य लगता है, लेकिन नागरिकों की सबसे बड़ी शिकायतों में से एक यही रही है कि विकास कार्यों के बाद सड़कों की मरम्मत समय पर नहीं होती। परिणामस्वरूप लोगों को महीनों तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
यहीं से प्रशासनिक क्रेडिबिलिटी का सवाल भी जुड़ता है। विकास केवल परियोजना शुरू करने का नाम नहीं है। विकास तब दिखाई देता है जब उसका असर आम नागरिक महसूस करे।
मीनाक्षी चौक, महावीर चौक, झांसी की रानी चौक और बकरा मंडी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अतिक्रमण को लेकर मंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा।
यह मुद्दा नया नहीं है। लगभग हर शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलता है और कुछ समय बाद वही स्थिति फिर लौट आती है। डॉ. सोमेंद्र तोमर ने अधिकारियों को दोबारा निरीक्षण और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है। क्या केवल अभियान चलाने से समस्या खत्म होगी या फिर स्थायी वेंडिंग ज़ोन, बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग और स्थानीय संवाद की भी आवश्यकता है?
कई शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। पुनर्वास और नियोजन भी उतना ही जरूरी होता है।
बैठक में अवैध कॉलोनियों का विषय भी प्रमुखता से उठा। विकास प्राधिकरण को निर्देश दिए गए कि जिन कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, वहां दोबारा निर्माण तो नहीं हो रहा, इसकी निगरानी की जाए।
यह निर्देश प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को सामने लाता है। अक्सर कार्रवाई के बाद भी अवैध निर्माण फिर शुरू हो जाते हैं।
यदि दोबारा निर्माण पाया जाता है तो जिम्मेदारी केवल निर्माणकर्ता की नहीं बल्कि निगरानी तंत्र की भी बनती है। इसी वजह से मंत्री ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
उत्तर प्रदेश में सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने का एजेंडा लंबे समय से सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
मुजफ्फरनगर समीक्षा बैठक में भी लोक निर्माण विभाग को स्पष्ट संदेश दिया गया कि कोई भी सड़क गड्ढों से प्रभावित नहीं रहनी चाहिए।
हालांकि वास्तविक स्थिति का आकलन केवल बैठकों से नहीं बल्कि स्वतंत्र फील्ड निरीक्षणों से ही संभव है। जनता के लिए सड़क की गुणवत्ता किसी भी शासन व्यवस्था का सबसे प्रत्यक्ष संकेतक होती है।
बैठक का दूसरा बड़ा हिस्सा कानून व्यवस्था से जुड़ा रहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विभिन्न कार्रवाइयों की जानकारी दी, जबकि प्रभारी मंत्री ने कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर विशेष चिंता व्यक्त की।
यह विषय केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध युवा पीढ़ी के भविष्य से है।
विश्लेषण के स्तर पर देखें तो ड्रग्स और नशीले पदार्थों की उपलब्धता किसी भी जिले के सामाजिक ढांचे को प्रभावित करती है। इसलिए ऐसे मामलों में केवल छापेमारी नहीं बल्कि लगातार इंटेलिजेंस और सामुदायिक सहयोग की भी जरूरत होती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गांवों में बढ़ती बीमारियों की जांच के निर्देश दिए गए।
बरसात से पहले यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि इसी अवधि में जलजनित और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
यह संकेत देता है कि प्रशासन अब स्वास्थ्य, पर्यावरण और विकास को अलग-अलग विषयों के बजाय एक साझा एजेंडा के रूप में देखने की कोशिश कर रहा है।
बैठक का सबसे राजनीतिक और रणनीतिक पहलू 5 जून से 21 जून तक चलने वाला विकास, सेवा, सुशासन और जनकल्याण अभियान रहा।
इस अभियान के तहत जनसंपर्क कार्यक्रम, संवाद, मीडिया इंटरैक्शन, जनकल्याण मेले, विकसित भारत संकल्प सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे आयोजन होंगे।
सरकारी पक्ष का तर्क है कि इससे योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचेगी और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा।
दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि ऐसे अभियानों का बड़ा हिस्सा सरकार की उपलब्धियों के प्रचार पर केंद्रित होता है।
दोनों दृष्टिकोणों के बीच संतुलन तभी बन सकता है जब कार्यक्रमों के दौरान जनता की वास्तविक शिकायतों को भी समान महत्व मिले।
डॉ. सोमेंद्र तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक केवल प्रशासनिक समीक्षा नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी देती है।
विकास, सुशासन और कानून व्यवस्था ऐसे मुद्दे हैं जिन पर किसी भी सरकार की सार्वजनिक छवि निर्भर करती है। इसलिए अधिकारियों को दिए गए निर्देशों को आगामी महीनों की प्रशासनिक प्राथमिकताओं के रूप में भी देखा जा सकता है।
विशेष रूप से जनसंपर्क अभियान का समय और उसका व्यापक स्वरूप इस बात का संकेत देता है कि सरकार उपलब्धियों को सीधे जनता तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
हर समीक्षा बैठक में निर्देश दिए जाते हैं। हर विभाग अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब नागरिक अपने मोहल्ले, गांव और कस्बे में बदलाव महसूस करें।
यदि अतिक्रमण वास्तव में कम होता है, सड़कें बेहतर होती हैं, जलापूर्ति व्यवस्थित रहती है और कानून व्यवस्था मजबूत होती है, तभी ऐसी बैठकों की सफलता का दावा मजबूत माना जाएगा।
वरना निर्देशों और वास्तविकता के बीच का फासला बना रहेगा।
मुजफ्फरनगर में हुई डॉ. सोमेंद्र तोमर की समीक्षा बैठक ने प्रशासन के सामने कई स्पष्ट लक्ष्य रखे हैं। विकास परियोजनाओं की निगरानी, अतिक्रमण नियंत्रण, स्वास्थ्य सुरक्षा, कानून व्यवस्था और जनसंपर्क अभियान जैसे मुद्दों पर सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं।
अब निगाहें इस बात पर होंगी कि ये निर्देश कितनी तेजी से ज़मीन पर उतरते हैं। लोकतांत्रिक शासन में सफलता का पैमाना बैठकों की संख्या नहीं बल्कि जनता के जीवन में दिखने वाला वास्तविक असर होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।