क्या नाभि में तेल डालना सच में फायदेमंद है? जानिए विशेषज्ञों की राय
नाभि में तेल डालने से शरीर को क्या होता है फायदा, जानिए सच
नाभि में तेल डालने के दावों की पड़ताल, क्या कहता है विज्ञान?
नाभि में तेल डालना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन इससे जुड़े कई स्वास्थ्य दावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। यह त्वचा को नमी देने और आराम का एहसास कराने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी के उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता।
📍 भारत
📰 23 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini
नाभि में तेल डालने की परंपरा और वर्तमान परिप्रेक्ष्य
भारतीय घरों में नाभि में तेल डालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। दादी-नानी के घरेलू नुस्खों से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल होते स्वास्थ्य दावों तक, इस अभ्यास को कई प्रकार के लाभों से जोड़कर देखा जाता है। दावा किया जाता है कि इससे फटे होंठों की समस्या दूर होती है, त्वचा में निखार आता है, पाचन बेहतर होता है और यहां तक कि जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को स्वीकार करने से पहले उसका वैज्ञानिक तजज़िया करना आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों का मानना है कि पारंपरिक उपायों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ समझना सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।
नाभि में तेल डालने को लेकर क्या कहता है विज्ञान?
वर्तमान वैज्ञानिक शोध यह स्वीकार करते हैं कि त्वचा कुछ पदार्थों को सीमित मात्रा में अवशोषित कर सकती है। यही कारण है कि कई प्रकार की दवाओं के ट्रांसडर्मल पैच त्वचा के माध्यम से काम करते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि नाभि में तेल डालने से वह सीधे शरीर के सभी अंगों तक पहुंचकर चिकित्सीय प्रभाव उत्पन्न करता है। अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है, जो यह प्रमाणित करता हो कि नाभि में तेल डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है, बालों का झड़ना बंद हो जाता है या पाचन संबंधी सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। विशेषज्ञ इस विषय पर संतुलित और तथ्य आधारित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हैं।
त्वचा को नमी देने में हो सकता है लाभ
यदि आपकी नाभि के आसपास की त्वचा अत्यधिक शुष्क है, तो नारियल तेल जैसे मॉइस्चराइजिंग तेल का सीमित मात्रा में प्रयोग त्वचा को नमी प्रदान कर सकता है। कुछ लोगों को इससे आराम और रिलैक्सेशन का अनुभव भी हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं की देखभाल से जुड़ी छोटी-छोटी आदतें मानसिक सुकून प्रदान कर सकती हैं। हालांकि, यह व्यक्तिगत अनुभव हो सकता है और इसके परिणाम हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं।
सोशल मीडिया के दावों की पड़ताल जरूरी
डिजिटल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि नाभि में घी या तेल डालने से शरीर की लगभग हर समस्या का समाधान हो सकता है। कुछ पोस्ट्स इसे आंखों, घुटनों, हार्मोनल असंतुलन और बालों की समस्याओं के उपचार से भी जोड़ती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन दावों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। किसी भी पारंपरिक उपाय को सार्वभौमिक उपचार के रूप में प्रस्तुत करना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जाता। यदि कोई उपाय किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वही परिणाम सभी लोगों में दिखाई देंगे।
कौन-सा तेल हो सकता है उपयुक्त?
नारियल तेल अपने मॉइस्चराइजिंग गुणों के कारण त्वचा की देखभाल में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। तिल का तेल आयुर्वेदिक मालिश पद्धतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वहीं, सरसों का तेल भी कई घरों में प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसकी तीक्ष्ण प्रकृति संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन उत्पन्न कर सकती है। किसी भी तेल का प्रयोग करने से पहले उसकी शुद्धता और स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। दूषित या सुगंधित उत्पादों का प्रयोग संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
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कब नहीं करना चाहिए नाभि में तेल का प्रयोग?
यदि नाभि में किसी प्रकार का संक्रमण, दर्द, लालिमा, सूजन या पस दिखाई दे रही हो, तो उसमें किसी भी प्रकार का तेल डालने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार के बजाय चिकित्सकीय परामर्श अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसी प्रकार, यदि तेल लगाने के बाद खुजली, जलन या एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, तो उसका प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में बिना विशेषज्ञ सलाह के किसी भी घरेलू उपाय का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
क्या यह पाचन तंत्र को प्रभावित करता है?
यह धारणा भी काफी लोकप्रिय है कि नाभि में तेल डालने से पाचन शक्ति बेहतर हो जाती है। हालांकि, वर्तमान चिकित्सा विज्ञान इस दावे की पुष्टि नहीं करता। पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से हमारे खान-पान, जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि और संपूर्ण स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं।
परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलन आवश्यक
भारतीय चिकित्सा परंपराओं में कई ऐसी विधियां मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक आराम भी प्रदान करना रहा है। नाभि में तेल डालने की परंपरा को भी इसी दृष्टिकोण से समझा जा सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय इस बात पर जोर देता है कि पारंपरिक उपायों को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि कोई स्वास्थ्य समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो उसका उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।
भविष्य की दिशा क्या कहती है?
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के बीच संवाद लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में इस प्रकार के घरेलू उपायों पर और अधिक गुणवत्तापूर्ण शोध किए जाने की आवश्यकता है। इससे उनके वास्तविक प्रभाव और सीमाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। जब तक पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक स्वास्थ्य संबंधी बड़े दावों को सावधानीपूर्वक और तथ्य आधारित दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
नाभि में तेल डालना एक पारंपरिक घरेलू अभ्यास है, जो कुछ लोगों में त्वचा को नमी देने और मानसिक आराम का अनुभव कराने में सहायक हो सकता है। लेकिन इससे जुड़े अधिकांश स्वास्थ्य दावों के समर्थन में वर्तमान समय में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे किसी बीमारी के उपचार के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत देखभाल की एक सीमित और वैकल्पिक पद्धति के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्वस्थ जीवन की सबसे विश्वसनीय बुनियाद आज भी संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और समय पर चिकित्सकीय सलाह ही है।