भारत की 4 विकेट से जीत के बावजूद वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी पर सवाल उठ रहे हैं। रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि नंबर-3 की भूमिका युवा बल्लेबाज की स्वाभाविक शैली के अनुकूल नहीं रही।
📍 क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड
🗓️ 25 अक्टूबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
शाह टाइम्स डिजिटल। भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया ने 4 विकेट से जीत हासिल की। क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर खेले गए इस मैच में भारतीय टीम की कामयाबी के बावजूद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया।
15 वर्षीय वैभव को चोटिल ईशान किशन की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिला। हालांकि, उन्हें अपनी पसंदीदा ओपनिंग पोजीशन के बजाय नंबर-3 पर बल्लेबाजी करनी पड़ी। वैभव 8 गेंदों में 4 रन बनाकर आउट हो गए।
मैच के बाद पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इस फैसले पर सवाल उठाए। उनका मानना है कि वैभव को ऐसे बल्लेबाजी क्रम में भेजना सही रणनीतिक फैसला साबित नहीं हुआ।
मैच के बाद प्रसारित अपने विश्लेषण में अश्विन ने वैभव की बल्लेबाजी के दौरान दिखाई दी तकनीकी और मानसिक चुनौतियों का ज़िक्र किया।
उनके मुताबिक, छठे ओवर में बल्लेबाजी के लिए उतरने के बाद वैभव अपनी स्वाभाविक लय हासिल नहीं कर पाए। वह गेंदों पर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी टाइमिंग सही नहीं बैठ रही थी।
अश्विन ने यह भी महसूस किया कि युवा बल्लेबाज को उस समय किसी अनुभवी साथी की सलाह की ज़रूरत थी।
उनकी राय में सीनियर बल्लेबाज को वैभव से बातचीत करके उन्हें संयम रखने और गेंद को शरीर के करीब खेलकर अपनी पारी आगे बढ़ाने की सलाह देनी चाहिए थी।
अश्विन ने साथ ही स्पष्ट किया कि वैभव के भविष्य या उनकी क्षमता पर अभी कोई अंतिम फैसला देना जल्दबाजी होगी।
मुकाबला: भारत बनाम न्यूजीलैंड, दूसरा टी20
मैदान: हेगले ओवल, क्राइस्टचर्च
नतीजा: भारत ने 4 विकेट से जीत दर्ज की
वैभव सूर्यवंशी की उम्र: 15 वर्ष
बल्लेबाजी क्रम: नंबर-3
वैभव का स्कोर: 8 गेंदों में 4 रन
टीम में मौका: चोटिल ईशान किशन की जगह
विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया: रविचंद्रन अश्विन ने बल्लेबाजी क्रम बदलने का सुझाव दिया
अश्विन ने भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर को बल्लेबाजी क्रम पर पुनर्विचार करने की सलाह दी।
उनके मुताबिक, अगर टीम संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी को एक साथ अंतिम एकादश में शामिल करना चाहती है, तो एक विकल्प यह है कि संजू सैमसन नंबर-3 पर उतरें।
इस स्थिति में वैभव को पारी की शुरुआत करने का मौका मिलेगा।
अश्विन की दलील का आधार यह है कि वैभव आक्रामक ओपनिंग बल्लेबाज हैं। पारी की शुरुआत में उन्हें अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी करने के लिए अलग परिस्थितियां मिलती हैं।
हालांकि, यह अश्विन का रणनीतिक सुझाव है। भारतीय टीम मैनेजमेंट की ओर से इस बदलाव पर किसी फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।
टी20 क्रिकेट में ओपनिंग और नंबर-3 की भूमिका के बीच अहम फर्क होता है।
ओपनर को नई गेंद के साथ बल्लेबाजी शुरू करने का मौका मिलता है। शुरुआती ओवरों में फील्डिंग प्रतिबंधों का फायदा उठाकर आक्रामक शॉट खेलने की गुंजाइश रहती है।
इसके उलट नंबर-3 पर उतरने वाले बल्लेबाज को मैच की मौजूदा स्थिति के हिसाब से अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है।
कभी शुरुआती विकेट गिरने के कारण दबाव होता है, तो कभी पावरप्ले समाप्त होने के करीब होता है।
वैभव के मामले में अश्विन की टिप्पणी इसी अंतर की तरफ इशारा करती है।
फिर भी केवल एक पारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि नंबर-3 पर बल्लेबाजी करना ही उनके जल्दी आउट होने की एकमात्र वजह थी।
वैभव की बल्लेबाजी पर सवाल उठाने के साथ अश्विन ने भारतीय टीम के निचले मध्यक्रम की सराहना भी की।
उन्होंने तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर की आक्रामक बल्लेबाजी क्षमता को टीम के लिए अहम बताया।
अश्विन के मुताबिक, इन बल्लेबाजों की बड़े शॉट लगाने की क्षमता भारतीय टीम को मध्य और अंतिम ओवरों में मजबूती देती है।
उनकी टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय टीम के सामने केवल वैभव की पोजीशन का सवाल नहीं है, बल्कि पूरी बल्लेबाजी इकाई का संतुलन बनाए रखना भी एक चुनौती है।
इस मुकाबले के बाद टीम मैनेजमेंट के सामने बल्लेबाजी क्रम को लेकर कुछ अहम सवाल रहेंगे।
क्या वैभव सूर्यवंशी को अगली बार ओपनिंग में उतारा जाएगा? क्या संजू सैमसन नंबर-3 पर बल्लेबाजी करेंगे? और ईशान किशन की फिटनेस के बाद अंतिम एकादश का समीकरण किस तरह बदलेगा?
इन सवालों पर टीम की आधिकारिक रणनीति सामने आना बाकी है।
फिलहाल अश्विन की प्रतिक्रिया ने एक नई चर्चा को जन्म दिया है। युवा बल्लेबाज की क्षमता को लेकर फैसला करने से पहले उसकी भूमिका और परिस्थितियों को भी समझना ज़रूरी है।
इस पूरे मामले में 3 पहलुओं को समझना ज़रूरी है।
पहला, वैभव की पहचान आक्रामक बल्लेबाज के रूप में है। ऐसे खिलाड़ी को नई भूमिका में उतारने पर उससे तुरंत समान प्रदर्शन की उम्मीद रखना हमेशा व्यावहारिक नहीं होता।
दूसरा, नंबर-3 पर बल्लेबाजी करना अपने आप में गलत फैसला नहीं है। टीम मैनेजमेंट को खिलाड़ियों की उपलब्धता, विपक्षी गेंदबाजी और मैच की परिस्थितियों के आधार पर बदलाव करने पड़ते हैं।
तीसरा, अश्विन की आलोचना को युवा खिलाड़ी के समर्थन में दिया गया तकनीकी सुझाव समझना अधिक उचित होगा। इसे टीम मैनेजमेंट द्वारा जानबूझकर नाइंसाफी करने का सबूत नहीं माना जा सकता।
सबसे अहम बात यह है कि 8 गेंदों की पारी किसी बल्लेबाज की अंतरराष्ट्रीय क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं होती।
वैभव के भविष्य का आकलन उनकी लगातार पारियों, अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन और टीम की रणनीति के आधार पर होना चाहिए।
इसलिए फिलहाल सवाल नाइंसाफी साबित होने का नहीं, बल्कि वैभव के लिए सबसे उपयुक्त बल्लेबाजी भूमिका तय करने का है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।