उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव की शुरुआत हुई।
देश भर से आए टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय पर्यटन संगठनों और सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी रही।
📍Uttarkashi ✍️ Asif Khan
शीतकालीन चारधाम यात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को वर्षभर रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्तराखण्ड में तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया।
इस कॉनक्लेव का उद्देश्य उत्तराखण्ड को केवल सीमित महीनों का पर्यटन राज्य न बनाकर पूरे वर्ष सक्रिय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए टूर ऑपरेटर्स, राज्य और स्थानीय स्तर के ट्रैवल स्टेकहोल्डर्स, होटल उद्योग, ट्रेकिंग संगठन और पर्यटन से जुड़े अन्य समूहों ने भाग लिया।
इस विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव में एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया के सहयोग से देश के विभिन्न राज्यों से 50 टूर ऑपरेटर्स ने हिस्सा लिया। इसके अलावा राज्य स्तर से 50 और स्थानीय स्तर से 50 टूर ऑपरेटर्स कार्यक्रम में शामिल हुए।
होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी और बड़कोट, ट्रेकिंग संगठन उत्तरकाशी और सांकरी के पंजीकृत प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस सहभागिता का उद्देश्य शीतकालीन पर्यटन से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी साझा करना और क्षेत्रीय संभावनाओं को सामने लाना रहा।
कॉनक्लेव के तहत टूर ऑपरेटर्स को विभिन्न शीतकालीन गंतव्यों का भ्रमण कराया जाएगा। इनमें मां गंगा का शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा, मां यमुना का खरसाली और सांकरी स्थित केदारकांठा ट्रैक बेस कैंप शामिल हैं।
इस भ्रमण का उद्देश्य यह है कि देशभर से आए टूर ऑपरेटर्स इन स्थलों की जमीनी स्थिति, कनेक्टिविटी, होम स्टे, होटल और स्थानीय सुविधाओं को देखकर अपने टूर पैकेज में शामिल कर सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक संवाद नहीं बल्कि उत्तराखण्ड के पर्यटन को नई दिशा देने का एक साझा प्रयास है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि पर्यटन से जुड़े हर वर्ग को पूरे साल रोजगार के अवसर मिलें।
सरकार की शीतकालीन पर्यटन नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में होटल बंद न हों, टैक्सियां खड़ी न रहें, होम स्टे खाली न रहें और स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तराखण्ड को केवल चार या छह महीने का नहीं बल्कि 12 महीने का टूरिज्म स्टेट बनाया जाए। इसके लिए सरकार कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल परमिशन सिस्टम और मार्केटिंग सपोर्ट को लगातार मजबूत कर रही है।
सरकार द्वारा पर्यटन विभाग के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल अप्रूवल और निवेशकों के लिए फास्ट ट्रैक सपोर्ट विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन का मतलब केवल बड़े होटल नहीं है। जब गांव की महिलाएं होम स्टे चलाएं, स्थानीय युवा टैक्सी ड्राइवर और ट्रेकिंग गाइड बनें, लोक कलाकारों को मंच मिले और किसानों के उत्पाद सीधे पर्यटक तक पहुंचे, तभी पर्यटन का वास्तविक लाभ समाज तक पहुंचेगा।
इसी दिशा में सरकार ने होम स्टे नीति को सरल किया है, महिला समूहों को लखपति दीदी योजना से जोड़ा है और स्थानीय गाइड ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किए हैं।
सरकार ने यह स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति की कीमत पर नहीं होगा। रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म मॉडल के तहत पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति की रक्षा और सीमांत गांवों को पर्यटन से जोड़ने की नीति अपनाई जा रही है।



मुख्यमंत्री ने टूर ऑपरेटर्स से आग्रह किया कि वे अपने पैकेज में उत्तरकाशी, हर्षिल, मुखबा, नेलांग, चमोली, औली, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, चम्पावत, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और सीमांत गांवों को शामिल करें।
इस अवसर पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, दर्जा राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल, जगत सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ स्वराज विद्वान, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, जिलाध्यक्ष भाजपा नागेंद्र चौहान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी जयभारत सिंह, रजिस्ट्रार निम विशाल रंजन और जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी उपस्थित रहे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।