अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब Middle East crisis, oil tension और बदलते global equations ने दुनिया की राजनीति को और संवेदनशील बना दिया है। Energy Security, QUAD strategy और China factor को लेकर भारत-अमेरिका रिश्तों पर दुनिया की नज़र टिक गई है।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio का भारत दौरा ऐसे दौर में हो रहा है, जब दुनिया की सियासत तेज़ी से करवट बदल रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल सप्लाई, समुद्री रास्तों और ग्लोबल ट्रेड को लेकर नई बेचैनी पैदा कर दी है। भारत पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। पेट्रोलियम कीमतों से लेकर सप्लाई चेन तक, हर मोर्चे पर दबाव बढ़ रहा है।
इसी बीच वॉशिंगटन और नई दिल्ली के रिश्ते फिर से दुनिया के फोकस में आ गए हैं।
भारत और अमेरिका पिछले कुछ सालों में सिर्फ स्ट्रैटेजिक पार्टनर नहीं रहे। दोनों देश अब टेक्नोलॉजी, डिफेंस, इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी और एनर्जी सेक्टर में भी एक-दूसरे के करीब आए हैं।
लेकिन मौजूदा हालात पहले जैसे नहीं हैं।
एक तरफ चीन अपनी आक्रामक मौजूदगी बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया संकट ने ऊर्जा बाज़ार को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि भारत Indo-Pacific रणनीति में और मजबूत भूमिका निभाए।
भारत भी इस समय अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर बेहद सतर्क है।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सीधे भारत के तेल आयात पर पड़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। समुद्री रूट्स में रुकावट या तेल कीमतों में तेज़ उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकता है।
इसीलिए माना जा रहा है कि मार्को रूबियो के दौरे में Energy Security बड़ा मुद्दा रह सकता है।
एलएनजी सप्लाई, वैकल्पिक ऊर्जा साझेदारी और सप्लाई चेन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का QUAD गठबंधन लगातार मजबूत हो रहा है।
अमेरिका चाहता है कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाया जाए।
भारत अब खुलकर किसी ब्लॉक राजनीति का हिस्सा नहीं दिखना चाहता। लेकिन वह अपनी रणनीतिक ताकत भी कमज़ोर नहीं करना चाहता।
यही वजह है कि नई दिल्ली “Strategic Autonomy” की लाइन पर आगे बढ़ रही है।
अमेरिका में चुनावी माहौल भी इस दौरे को खास बना रहा है।
पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump लगातार चीन और ग्लोबल ट्रेड को लेकर सख्त बयान दे रहे हैं। ऐसे में अमेरिका की एशिया रणनीति आने वाले महीनों में और बदल सकती है।
भारत इस बदलाव को करीब से देख रहा है।
नई दिल्ली की कोशिश है कि वह अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत रखे, लेकिन अपनी स्वतंत्र विदेश नीति भी बरकरार रखे।
मार्को रूबियो का यह दौरा सिर्फ डिप्लोमैटिक मीटिंग नहीं माना जा रहा।
यह दौरा दुनिया को यह संकेत दे सकता है कि बदलते ग्लोबल संकट के बीच भारत और अमेरिका किस दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।
Energy, Security और Geopolitics, तीनों मोर्चों पर यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब Middle East crisis, oil tension और बदलते global equations ने भारत-अमेरिका रिश्तों को और अहम बना दिया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।