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ड्यूटी से गैरहाजिर निलंबित सिपाही की सियासी सक्रियता, धनघटा से सपा टिकट की दावेदारी

Mohammad Naved • 2026-10-03 11:21:49
ड्यूटी से गैरहाजिर निलंबित सिपाही की सियासी सक्रियता, धनघटा से सपा टिकट की दावेदारी

गोरखपुर में निलंबित सिपाही श्याम सुंदर चौहान धनघटा से सपा टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से गैरहाजिर हैं और मामले की जांच जारी है।


📍

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

🗓️

03 अक्टूबर 2026

✍️ Mohd Naved


गोरखपुर से सामने आया सिपाही की सियासी सक्रियता का मामला

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच गोरखपुर से पुलिस विभाग और राजनीति से जुड़ा एक मामला सामने आया है। डायल-112 में तैनात रहे सिपाही श्याम सुंदर चौहान संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान उनके लंबे समय से ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और निलंबन के बाद भी पुलिस लाइन में उपस्थित नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौहान फिलहाल निलंबित हैं। उनके लगातार गैरहाजिर रहने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। गोरखपुर के एसपी क्राइम अयोध्या सिंह ने बताया है कि उनसे संपर्क कर गैरहाजिरी की वजह जानने का प्रयास किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगी।


धनघटा सीट से टिकट की दावेदारी

श्याम सुंदर चौहान मूल रूप से संतकबीर नगर के महुली थाना क्षेत्र के नैना झाला गांव के रहने वाले बताए जाते हैं। वह उत्तर प्रदेश पुलिस के 1994 बैच के सिपाही हैं। वर्ष 2023 में कुशीनगर से स्थानांतरण के बाद उनकी तैनाती गोरखपुर में डायल-112 में हुई थी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार गोरखपुर में तैनाती के दौरान ही उनकी धनघटा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता बढ़ी। सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी सामने आने के बाद अब उनका नाम सपा की टिकट दावेदारी से जोड़ा जा रहा है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी में सपा की ओर से चौहान को धनघटा सीट का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं है। फिलहाल मामला टिकट की दावेदारी और राजनीतिक सक्रियता तक सीमित है।


लंबे समय से गैरहाजिरी का विभागीय मामला

पुलिस के अनुसार चौहान लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थे। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी गैरहाजिरी की अवधि को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, जबकि यह तथ्य एक समान है कि अधिकारियों की जानकारी में आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया और इसके बाद भी वह पुलिस लाइन में हाजिर नहीं हुए।

गोरखपुर पुलिस के अधिकारी ने बताया कि चौहान काफी समय से निलंबित हैं और हाजिरी नहीं लगा रहे हैं। विभाग उनसे संपर्क कर गैरहाजिर रहने का कारण जानने की कोशिश कर रहा है। उचित कारण सामने आने या विभागीय जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।


राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रियता का दावा

चौहान की सपा से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों का भी उल्लेख सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों में दिखाई दिए, मंच से संबोधन किया और सोशल मीडिया पर राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी पोस्ट साझा कीं। धनघटा क्षेत्र में पार्टी संगठन से जुड़े कार्यक्रम में उनके संबोधन की जानकारी भी सामने आई है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि उन्होंने अखिलेश यादव के समर्थन में सार्वजनिक अपील की। हालांकि इस राजनीतिक सक्रियता का अंतिम कानूनी और विभागीय प्रभाव जांच तथा लागू सेवा नियमों के आधार पर तय होगा।


पुलिस सेवा और राजनीतिक गतिविधियों के बीच नियमों की स्थिति

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली में सरकारी कर्मचारियों के आचरण और राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नियमावली सरकारी सेवकों के लिए आचरण संबंधी नियमों को दर्ज करती है।

पुलिस विभाग की आधिकारिक सामग्री में सरकारी कर्मचारियों की सेवा संबंधी आचरण व्यवस्था और पुलिस कर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े निर्देश भी उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में किसी कर्मचारी की राजनीतिक गतिविधि और उसकी सेवा स्थिति का परीक्षण संबंधित नियमों तथा विभागीय प्रक्रिया के आधार पर होता है।

इसलिए केवल किसी राजनीतिक कार्यक्रम में दिखाई देने को अंतिम विभागीय दोष सिद्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। चौहान के मामले में निलंबन, गैरहाजिरी और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े तथ्यों पर विभागीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।


हाजिरी को लेकर भी उठे सवाल

मामले का एक अलग पहलू ड्यूटी रिकॉर्ड से जुड़ा है। कुछ रिपोर्टों में सवाल उठाया गया है कि लंबे समय तक अनुपस्थिति के दौरान उनकी हाजिरी किस प्रक्रिया के तहत दर्ज होती रही। इस बिंदु पर विभागीय स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

इसलिए इस हिस्से में किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यदि विभागीय जांच में रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितता सामने आती है, तभी उसकी जिम्मेदारी और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।


पुलिस विभाग के लिए मामला क्यों अहम है

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक साथ तीन अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। पहला, सरकारी सेवा से लंबी गैरहाजिरी। दूसरा, निलंबन के बाद भी पुलिस लाइन में उपस्थित नहीं होना। तीसरा, एक राजनीतिक दल के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी और विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी।

पुलिस सेवा में अनुशासन और सेवा आचरण से जुड़े नियमों की भूमिका अहम होती है। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक नियमावली और प्रशिक्षण दस्तावेजों में पुलिसकर्मियों के लिए सेवा नियमों और आचरण संबंधी प्रावधानों को शामिल किया गया है।


चौहान का पक्ष भी महत्वपूर्ण

उपलब्ध रिपोर्टों में चौहान की ओर से यह बात सामने आई है कि उन्होंने नौकरी छोड़ी नहीं है। उन्होंने राजनीतिक भूमिका के जरिए लोगों की मदद करने की इच्छा जताई है। उनकी सेवा स्थिति और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विभागीय जांच अलग प्रक्रिया है।

इसलिए मामले की रिपोर्टिंग में उनके पक्ष को भी शामिल करना जरूरी है। अभी तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि विभागीय कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या होगा।


आगे क्या हो सकता है

अब निगाह विभागीय जांच पर है। पुलिस अधिकारियों ने चौहान से संपर्क कर उनकी गैरहाजिरी का कारण जानने की बात कही है। उनके निलंबन की स्थिति, सेवा रिकॉर्ड, नोटिस के जवाब और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े तथ्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

दूसरी तरफ धनघटा विधानसभा सीट से उनकी राजनीतिक दावेदारी को लेकर भी तस्वीर अभी अंतिम नहीं है। टिकट की दावेदारी और आधिकारिक उम्मीदवार घोषित होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।


गोरखपुर के सिपाही श्याम सुंदर चौहान का मामला फिलहाल पुलिस अनुशासन और राजनीतिक सक्रियता के बीच खड़ा है। वह निलंबित हैं, लंबे समय से गैरहाजिरी का विभागीय मामला उनके खिलाफ चल रहा है और इसी दौरान धनघटा सीट से सपा टिकट की दावेदारी सामने आई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच जारी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच और आधिकारिक फैसले के बाद ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड यही बताता है कि मामला जांच के चरण में है और राजनीतिक टिकट को लेकर भी कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है।


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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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