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सफेद या काला नमक नही अब पहाड़ी नमक को बनाएं अपनी रसोई का हिस्सा?

None 2026-02-06 21:33:48
सफेद या काला नमक नही अब पहाड़ी नमक को बनाएं अपनी रसोई का हिस्सा?
सफेद या काला नमक नही अब पहाड़ी नमक को बनाएं अपनी रसोई का हिस्सा?
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खान–पान को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। लोग अब सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि सेहतमंद रहने के लिए भी भोजन चुन रहे हैं। इसी कड़ी में नमक को लेकर भी सोच बदली है। लंबे समय से रसोई में इस्तेमाल होने वाला सफेद रिफाइंड नमक और स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला काला नमक अब सवालों के घेरे में हैं। विशेषज्ञों और पोषण जानकारों के अनुसार, पहाड़ी नमक एक बेहतर और प्राकृतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। क्या है पहाड़ी नमक? पहाड़ी नमक, जिसे सेंधा नमक या हिमालयन रॉक सॉल्ट भी कहा जाता है, प्राकृतिक रूप से पहाड़ों से प्राप्त होता है। यह नमक बिना अधिक रासायनिक प्रसंस्करण के सीधे चट्टानों से निकाला जाता है। यही कारण है कि इसमें प्राकृतिक खनिज तत्व अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हैं। सफेद नमक से क्यों अलग है पहाड़ी नमक? सफेद नमक आमतौर पर रिफाइंड होता है। इसे चमकदार और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें कई रसायन मिलाए जाते हैं। लगातार अधिक मात्रा में इसके सेवन को उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। वहीं पहाड़ी नमक कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म खनिज पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए उपयोगी माने जाते हैं। काला नमक से तुलना काला नमक स्वाद और पाचन के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जिससे कुछ लोगों को गैस या एसिडिटी की समस्या हो सकती है। पहाड़ी नमक का स्वाद अपेक्षाकृत हल्का होता है और यह रोज़मर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है। सेहत के लिए है फायदेमंद। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित मात्रा में पहाड़ी नमक का सेवन शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, मांसपेशियों के कार्य को सहारा देने और शरीर को आवश्यक खनिज देने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी भी प्रकार का नमक अधिक मात्रा में न लिया जाए। खाने में कैसे करें शामिल? पहाड़ी नमक का उपयोग आप दाल, सब्ज़ी, सलाद, रायता और यहां तक कि छाछ में भी कर सकते हैं। इसका हल्का स्वाद भोजन के असली स्वाद को दबाता नहीं, बल्कि उसे निखारता है। व्रत या उपवास में तो यह पहले से ही एक लोकप्रिय विकल्प रहा है। निष्कर्ष बदलती जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बड़ा असर डाल सकते हैं। अगर आप अपनी रसोई में सफेद या काले नमक की जगह पहाड़ी नमक को शामिल करते हैं, तो यह सेहत की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है। स्वाद और स्वास्थ्य के इस संतुलन को अपनाकर आप अपने भोजन को और भी बेहतर बना सकते हैं।
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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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