दिल्ली SIR में मतदाता रिकॉर्ड की विसंगतियों पर 31.63 लाख से अधिक नोटिस जारी हुए। आडवाणी, जयशंकर और केजरीवाल समेत कई प्रमुख मतदाताओं से दस्तावेज मांगे गए हैं।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 21 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मतदाता रिकॉर्ड की जांच का दायरा काफी बड़ा हो गया है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई चर्चित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, नोटिस का आधार मतदाता विवरण में सामने आई विसंगतियां हैं। इसका अर्थ अपने आप मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है। संबंधित मतदाताओं को रिकॉर्ड और दस्तावेजों के जरिए अपनी पात्रता स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।
एसआईआर का पूरा नाम विशेष गहन पुनरीक्षण है। निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची की शुद्धता और अद्यतन स्थिति सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया शुरू की है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कवायद का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर न रहने देना और अपात्र लोगों को सूची में शामिल होने से रोकना है। इसके तहत घर-घर जाकर मतदाता विवरण जुटाए गए और पुराने निर्वाचन रिकॉर्ड से उनका मिलान किया गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में 31.63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इन मामलों में पुराने रिकॉर्ड से विवरण का मिलान नहीं होना या रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
इस प्रक्रिया में कई वरिष्ठ राजनेताओं, पूर्व संवैधानिक पदाधिकारियों और अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़, मनीष सिसोदिया और अन्य प्रमुख मतदाता शामिल हैं।
लालकृष्ण आडवाणी और एस. जयशंकर का नाम उन मतदाताओं में शामिल है जिनके रिकॉर्ड को एसआईआर के दौरान अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत बताई गई है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी पत्नी के.एस. जयशंकर का नाम भी नोटिस सूची में सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मतदाता रिकॉर्ड की जांच और पुराने विवरण से संबंधित विसंगतियों की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू समेत अन्य वरिष्ठ नाम भी इस प्रक्रिया में सामने आए हैं।
अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों को भी एसआईआर के तहत नोटिस मिला है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, केजरीवाल परिवार के मामले को पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से वर्तमान रिकॉर्ड के मैप नहीं होने वाली श्रेणी से जोड़ा गया है।
इस श्रेणी में नोटिस मिलने का आशय यह है कि निर्वाचन अधिकारी संबंधित मतदाता से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज लेकर रिकॉर्ड की पुष्टि करना चाहते हैं। नोटिस अपने आप नाम हटाने का अंतिम आदेश नहीं है।
केजरीवाल परिवार के मामले पर आम आदमी पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी की आपत्तियों और आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। इन्हें निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सूची में सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके रिकॉर्ड में उम्र से जुड़ी एक विसंगति को लेकर सत्यापन किया गया।
बाद में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद उनके विवरण का सत्यापन हो गया और उनकी मतदाता सूची में मौजूदगी की पुष्टि की गई। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि नोटिस की प्रक्रिया का एक मकसद रिकॉर्ड में मौजूद असंगतियों को दूर करना है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात नोटिस और नाम हटाए जाने के बीच का फर्क है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर नोटिस मिलना अपने आप मतदाता सूची से नाम हटने का संकेत नहीं है। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज देने का अवसर दिया जाता है।
यानी किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना प्रक्रिया का एक चरण है। अंतिम फैसला दस्तावेजों और निर्वाचन रिकॉर्ड की जांच के बाद होता है।
दिल्ली में एसआईआर की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं से विवरण जुटाया। मौजूदा रिकॉर्ड को पुराने निर्वाचन रिकॉर्ड से जोड़ने की कोशिश की गई।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक एसआईआर जानकारी के मुताबिक, प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हुई थी। निर्धारित कार्यक्रम में 5 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन, 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां तथा 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक नोटिस और उनके निस्तारण का चरण रखा गया था। अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता चुनावी प्रक्रिया की बुनियादी जरूरत है। दिल्ली में पुराने निर्वाचन रिकॉर्ड का इस्तेमाल वर्तमान मतदाता विवरण के सत्यापन के लिए किया जा रहा है।
दिल्ली की अंतिम गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची 2002 से संबंधित रिकॉर्ड भी निर्वाचन विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए मतदाता अपने पुराने विवरण की तलाश कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए पुराने रिकॉर्ड में नाम खोजने और नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस पहले से जारी है। विपक्षी दलों ने अलग-अलग मौकों पर मतदाता सूची के सत्यापन और संभावित नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन का मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। इसलिए इस विवाद में एक तरफ राजनीतिक दलों की आपत्तियां हैं, जबकि दूसरी तरफ निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक नियम और सत्यापन की व्यवस्था है। दोनों को अलग-अलग संदर्भ में समझना जरूरी है।
यदि किसी मतदाता को एसआईआर के तहत नोटिस मिला है, तो उसे नोटिस में दिए निर्देशों के अनुसार संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा करने चाहिए।
निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए दस्तावेज जमा करने और अपने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं।
मतदाता अपने नाम और पुराने रिकॉर्ड की स्थिति भी आधिकारिक निर्वाचन पोर्टल पर जांच सकते हैं।
अब नोटिस पाने वाले मतदाताओं के दस्तावेज और दावे निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर जांचे जाएंगे। जिन मामलों में रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां दूर हो जाती हैं, वहां मतदाता की पात्रता के अनुरूप रिकॉर्ड को अंतिम सूची में रखा जा सकता है।
दिल्ली एसआईआर का अगला अहम चरण नोटिसों का निस्तारण और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन है। आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक अंतिम सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी है।
दिल्ली में आडवाणी, जयशंकर, केजरीवाल और अन्य प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने से यह मामला सार्वजनिक चर्चा में जरूर आया है, लेकिन प्रक्रिया का मूल मुद्दा मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन है। इसलिए नोटिस को अंतिम निष्कासन आदेश मानना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और निर्वाचन अधिकारियों के निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।