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उत्तराखंड के मदरसों में अब संस्कृत का भी होगा अध्ययन

None • 2023-09-14 14:02:40
उत्तराखंड के मदरसों में अब संस्कृत का भी होगा अध्ययन

Report by- Mohd. Shahnazar

देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) में संचालित मदरसों में आने वाले दिनों में बच्चे अरबी के साथ-साथ संस्कृत का भी अध्ययन करेंगे। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) इसकी पहल करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स (Shadab Shams) ने घोषणा की, कि उत्तराखंड में 117 मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार अन्य विषयों के साथ-साथ संस्कृत भी पढ़ाई जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह कार्यक्रम चार मदरसों से शुरू होगा। चेयरमैन शम्स ने संस्कृत की मुस्लिम विद्वान रजिया सुल्ताना (Razia Sultana) का उदाहरण देते हुए कहा, ''उत्तराखंड एक देवभूमि है, अगर यहां संस्कृत नहीं पढ़ाई जाएगी तो कहां पढ़ाई जाएगी?'' मुस्लिम समाज (Muslim community) बदलाव चाहता है; वे मदरसों के उन्नयन से खुश हैं।”

अब तक मुस्लिम छात्र केवल इस्लामी और अरबी अध्ययन से संबंधित धर्मशास्त्र का अध्ययन कर रहे हैं। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने से मदरसा छात्रों को अन्य विषयों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

“माता-पिता और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया किसी क्रांति से कम नहीं है। शम्स ने कहा, हमें उम्मीद थी कि राज्य में मदरसा शिक्षा में सुधार के किसी भी कदम पर मुस्लिम परिवार, खासकर मौलवियों के दबाव में, कड़ा विरोध करेंगे, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है, बल्कि इस फैसले का दिल खोल कर स्वागत किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) ने राज्य के 117 वक्फ बोर्ड मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है. एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में संस्कृत भी शामिल है।
जब हमारे बच्चे हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और अरबी सीख सकते हैं, तो वे संस्कृत भी पढ़ सकते हैं… मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए किसी भी मदद की आवश्यकता होगी, सरकार इसके लिए तैयार है… वे एपीजे अब्दुल कलाम के रास्ते पर भी चलेंगे… हम सकारात्मक भावनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं…''

उन्होंने उन चार मदरसों का भी उल्लेख किया जहां परीक्षण पहल शुरू की जाएगी। उन्हें सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने देहरादून (Dehradun) की मुस्लिम कॉलोनी, रूड़की (Haridwar) में रहमानिया मदरसा, यूएस नगर के खटीमा में रहमानिया मदरसा और नैनीताल (Nainital) जिले के रामनगर (Ramnagar) में जामा मस्जिद मदरसा का नाम लिया।

अध्यक्ष ने कहा कि वक्फ बोर्ड से पंजीकृत मदरसों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। छात्रों को तकनीकी कौशल सीखने में मदद करने के लिए इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में आईपैड और कंप्यूटर भी दिए जाएंगे।

#ShahTimes

Report by- Mohd. Shahnazar

देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) में संचालित मदरसों में आने वाले दिनों में बच्चे अरबी के साथ-साथ संस्कृत का भी अध्ययन करेंगे। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) इसकी पहल करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स (Shadab Shams) ने घोषणा की, कि उत्तराखंड में 117 मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार अन्य विषयों के साथ-साथ संस्कृत भी पढ़ाई जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह कार्यक्रम चार मदरसों से शुरू होगा। चेयरमैन शम्स ने संस्कृत की मुस्लिम विद्वान रजिया सुल्ताना (Razia Sultana) का उदाहरण देते हुए कहा, ''उत्तराखंड एक देवभूमि है, अगर यहां संस्कृत नहीं पढ़ाई जाएगी तो कहां पढ़ाई जाएगी?'' मुस्लिम समाज (Muslim community) बदलाव चाहता है; वे मदरसों के उन्नयन से खुश हैं।”

अब तक मुस्लिम छात्र केवल इस्लामी और अरबी अध्ययन से संबंधित धर्मशास्त्र का अध्ययन कर रहे हैं। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने से मदरसा छात्रों को अन्य विषयों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

“माता-पिता और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया किसी क्रांति से कम नहीं है। शम्स ने कहा, हमें उम्मीद थी कि राज्य में मदरसा शिक्षा में सुधार के किसी भी कदम पर मुस्लिम परिवार, खासकर मौलवियों के दबाव में, कड़ा विरोध करेंगे, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है, बल्कि इस फैसले का दिल खोल कर स्वागत किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) ने राज्य के 117 वक्फ बोर्ड मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है. एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में संस्कृत भी शामिल है।
जब हमारे बच्चे हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और अरबी सीख सकते हैं, तो वे संस्कृत भी पढ़ सकते हैं… मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए किसी भी मदद की आवश्यकता होगी, सरकार इसके लिए तैयार है… वे एपीजे अब्दुल कलाम के रास्ते पर भी चलेंगे… हम सकारात्मक भावनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं…''

उन्होंने उन चार मदरसों का भी उल्लेख किया जहां परीक्षण पहल शुरू की जाएगी। उन्हें सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने देहरादून (Dehradun) की मुस्लिम कॉलोनी, रूड़की (Haridwar) में रहमानिया मदरसा, यूएस नगर के खटीमा में रहमानिया मदरसा और नैनीताल (Nainital) जिले के रामनगर (Ramnagar) में जामा मस्जिद मदरसा का नाम लिया।

अध्यक्ष ने कहा कि वक्फ बोर्ड से पंजीकृत मदरसों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। छात्रों को तकनीकी कौशल सीखने में मदद करने के लिए इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में आईपैड और कंप्यूटर भी दिए जाएंगे।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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