पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तल्ख़ी बढ़ गई है। तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस्लामाबाद की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। जवाब में पाकिस्तान ने सुरक्षा कार्रवाई की चेतावनी दी है।
📍 इस्लामाबाद/काबुल
🗓️ 1 नवंबर 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच आतंकवाद, सरहदी सुरक्षा और आपसी बातचीत को लेकर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने 31 अक्टूबर को एक रेडियो इंटरव्यू में पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस्लामाबाद दोनों देशों के विवाद को बातचीत के ज़रिये हल करने के लिए पर्याप्त संजीदगी नहीं दिखा रहा।
मुजाहिद ने दावा किया कि अफगानिस्तान की ओर से तनाव कम करने की कोशिशें की गईं, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को आपसी रिश्तों में आई गिरावट के लिए ज़िम्मेदार ठहराया।
तालिबान प्रवक्ता के बयान के बाद पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को कड़ी प्रतिक्रिया दी।
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अफगान तालिबान प्रशासन अपने क्षेत्र से संचालित आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है।
पाकिस्तान ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही।
हालांकि, इस बयान का अर्थ किसी नए सैन्य अभियान की औपचारिक घोषणा नहीं है।
दोनों देशों के बीच तनाव का एक अहम मुद्दा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी है।
इस्लामाबाद का आरोप है कि टीटीपी से जुड़े लड़ाके अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए करते हैं।
दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है कि वह अफगान ज़मीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों के लिए होने देता है।
दोनों पक्षों के इन परस्पर दावों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है। पाकिस्तान के आरोप अपने आप में तालिबान प्रशासन की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं।
ताज़ा बयानबाज़ी ऐसे समय सामने आई है, जब दोनों देशों की सीमा पर हाल के दिनों में हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं।
29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के दक्षिण वज़ीरिस्तान क्षेत्र में अंगूर अड्डा के पास मोर्टार गोलाबारी में 1 नागरिक की मौत और 5 लोगों के घायल होने की जानकारी पाकिस्तानी अधिकारियों ने दी थी।
पाकिस्तानी प्रशासन ने इस गोलाबारी के लिए अफगान तालिबान बलों को ज़िम्मेदार ठहराया। घटना के तत्काल कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।
यह घटना दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य जोखिम की गंभीर मिसाल है। हालांकि 1 नवंबर को किसी नए बड़े सैन्य अभियान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
तालिबान प्रवक्ता मुजाहिद के मुताबिक, तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ और मध्यस्थ देशों ने भी कोशिश की, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका।
1 नवंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान में भी पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं का ज़िक्र सामने आया। अमेरिका ने परिस्थितियों के अनुरूप सकारात्मक भूमिका निभाने की संभावना जताई है।
इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि सरहदी विवाद अब केवल द्विपक्षीय बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके शांतिपूर्ण समाधान में दिलचस्पी दिखाई दे रही है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर अस्थिरता का असर सुरक्षा के अलावा व्यापार, आवाजाही और सीमावर्ती आबादी पर भी पड़ता है।
दोनों देशों के बीच हिंसा बढ़ने से कारोबारी गतिविधियों में रुकावट, परिवहन संबंधी मुश्किलें और नागरिक सुरक्षा का संकट गहरा सकता है।
इसलिए किसी भी नई सैन्य कार्रवाई के संभावित परिणाम केवल दोनों सरकारों तक सीमित नहीं रहेंगे।
मौजूदा विवाद में 3 सवाल सबसे अहम हैं।
क्या अफगान तालिबान प्रशासन टीटीपी के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई करेगा जिसे पाकिस्तान स्वीकार करे?
क्या इस्लामाबाद सैन्य चेतावनियों के बजाय कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता देगा?
क्या मध्यस्थ देश दोनों पक्षों को किसी स्थायी सुरक्षा समझौते तक पहुंचा पाएंगे?
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सख़्त बयान सामने आए हैं। मगर किसी स्थायी समझौते या ताज़ा सैन्य कार्रवाई की पुष्टि के बिना नए युद्ध की घोषणा करना जल्दबाज़ी होगी।
शाह टाइम्स का संपादकीय आकलन है कि इस विवाद का समाधान केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं निकलेगा। इसके लिए सुरक्षा संबंधी दावों की जांच, सीमा पर संयम और प्रभावी कूटनीतिक संवाद आवश्यक है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।