पाकिस्तान सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नूर खान एयरबेस को नुकसान हुआ था। उप प्रधानमंत्री इशाक़ डार ने प्रेस ब्रीफिंग में जवानों के घायल होने की पुष्टि की।
📍Islamabad ✍️ Asif Khan
मई 2025 में दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात तेजी से बदले थे। अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र की बैसरन घाटी में 26 नागरिकों की हत्या की घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत पाकिस्तान और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। उस समय दोनों देशों की ओर से आधिकारिक बयान आए, लेकिन कई दावों और प्रतिदावों पर स्पष्टता नहीं थी।
पाकिस्तान का आधिकारिक स्वीकार
28 दिसंबर 2025 को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के मंत्री इशाक़ डार ने इस्लामाबाद में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि मई 2025 में नूर खान एयरबेस को नुकसान पहुंचा था। उन्होंने बताया कि यह एयरबेस रावलपिंडी के चकलाला क्षेत्र में स्थित है और पाकिस्तान वायुसेना का एक प्रमुख सैन्य ठिकाना माना जाता है। डार के अनुसार, हमले के कारण वहां तैनात कई जवान घायल हुए थे।
ड्रोन गतिविधि का उल्लेख
प्रेस ब्रीफिंग में इशाक़ डार ने कहा कि 36 घंटों के भीतर पाकिस्तान की सीमा में कई ड्रोन देखे गए। उन्होंने दावा किया कि कुल 80 ड्रोन भेजे गए, जिनमें से 79 को सुरक्षा बलों ने निष्क्रिय कर दिया। डार ने बताया कि एक ड्रोन नूर खान एयरबेस परिसर में गिरा, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ और कुछ कर्मियों को चोटें आईं।
सरकार और सैन्य नेतृत्व की बैठक
डार ने यह भी जानकारी दी कि 9 मई 2025 की रात प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में सरकार और सैन्य नेतृत्व की बैठक हुई थी। इस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और आगे के कदमों पर चर्चा की गई। डार के मुताबिक, 10 मई की सुबह नूर खान एयरबेस पर हमला हुआ, जिसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी सुरक्षा कदम उठाए।
अंतरराष्ट्रीय संपर्क और कूटनीतिक प्रयास
प्रेस ब्रीफिंग में यह भी कहा गया कि उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बनाए गए थे। डार के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारियों ने तनाव कम करने के प्रयास किए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रुख संघर्ष से बचने का रहा है और सरकार ने कूटनीतिक माध्यमों से स्थिति संभालने की कोशिश की।
नूर खान एयरबेस का महत्व
नूर खान एयरबेस को पाकिस्तान वायुसेना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह एयरबेस रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां से कई सैन्य संचालन संचालित होते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन सैन्य ठिकानों पर हमले की बात कही गई, उनमें नूर खान के अलावा सरगोधा, रफीकी, जैकोबाबाद और मुरीदके के एयरबेस के नाम भी सामने आए थे।
पहले के संकेत और बयान
इससे पहले भी पाकिस्तान के कुछ नेताओं के बयानों में नूर खान एयरबेस का जिक्र आया था। ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने संसद में कहा था कि उन्हें 9 और 10 मई की रात सैन्य नेतृत्व से स्थिति की जानकारी दी गई थी। जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री के सलाहकार राना सनाउल्लाह ने भी सार्वजनिक मंच पर कहा था कि उस दौरान एक क्रूज़ मिसाइल की दिशा नूर खान एयरबेस की ओर बताई गई थी।
सैटेलाइट तस्वीरों का संदर्भ
मई 2025 में जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर संरचनात्मक नुकसान दिखाई देने की जानकारी सामने आई थी। 25 अप्रैल 2025 और 10 मई 2025 की तस्वीरों की तुलना में नूर खान, मुशाफ, भोलारी और शाहबाज़ एयरबेस पर बदलाव देखे गए। इन तस्वीरों में रनवे, हैंगर और अन्य सैन्य ढांचों पर असर का उल्लेख किया गया था।
सैन्य प्रवक्ता की जानकारी
10 मई 2025 को पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि नूर खान, मुरीदके और रफीकी एयरबेस को निशाना बनाया गया था। उस समय उन्होंने नुकसान के स्तर पर विस्तृत जानकारी नहीं दी थी, लेकिन सुरक्षा स्थिति पर नजर रखने की बात कही थी।
हताहतों से जुड़ी जानकारी
पाकिस्तान में अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मरणोपरांत वीरता पुरस्कारों की घोषणा की गई थी। मीडिया रिपोर्टों में 138 जवानों के नाम प्रकाशित हुए थे, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद होने के बाद सम्मानित किया गया। सरकार की ओर से उस समय इन आंकड़ों पर आधिकारिक टिप्पणी सीमित रही थी।
मौजूदा बयान का महत्व
इशाक़ डार का ताजा बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब पाकिस्तान सरकार ने सार्वजनिक रूप से नूर खान एयरबेस को हुए नुकसान और जवानों के घायल होने की बात स्वीकार की है। इससे पहले अधिकतर बयान सामान्य शब्दों में सुरक्षा स्थिति पर केंद्रित थे।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
मई 2025 की घटनाओं के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय बढ़ाए थे। नियंत्रण रेखा के आसपास निगरानी बढ़ाई गई और ड्रोन रोधी प्रणालियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, बाद के महीनों में दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई की कोई नई पुष्टि नहीं हुई।
आधिकारिक रुख
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देती है। भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताया गया था। दोनों पक्षों के बयानों के बीच कई अंतर रहे, लेकिन मौजूदा स्वीकार से मई 2025 की घटनाओं को लेकर कुछ तथ्यों की पुष्टि हुई है।
आगे की स्थिति
फिलहाल, दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य तनाव कम बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर क्षेत्र पर बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मई 2025 की घटनाएं भविष्य की रणनीतिक गणनाओं में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखी जा रही हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।