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पलटू राम ने एक बार फिर बदले बिहार के सियासी मोहरें

None • 2024-01-28 13:15:58
पलटू राम ने एक बार फिर बदले बिहार के सियासी मोहरें

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बतौर पीएम उम्मीदवार प्रस्तावित किए जाने से नीतीश कुमार नाराज हो गए, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसी समय अपना दांव चला और नीतिश को एनडीए में वापस लाने के लिए खुद अप्रोच किया

मोदी की भाजपा तीसरी बार फिर केन्द्र में सत्ता चाहती है इसके लिए किसी के पास जाना पड़़े या कुछ और तरीका अपना कर लाना पड़े इससे कोई गुरेज नहीं है राम मन्दिर में आन्नन फान्नन में की गई प्राण प्रतिष्ठा भी सत्ता में वापसी की चाबी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है लगता हैं कि बिहार में राम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा भी काम नहीं कर पा रही है।पलटू राम को एक बार फिर पलटी मारने के लिए कहा गया और पलटी राम ने पलटी मार मोदी की भाजपा की डूबती नय्या के खेवनहार बनने को तैयार हो गए है।बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम काफी तेजी से बदला है।

हालांकि, इसकी शुरूआत काफी पहले हो गई थी, जब जातिगत जनगणना के बाद भाजपा ने राज्य में एक आंतरिक सर्वे कराया था। उस सर्वे के नतीजे ने भाजपा के होश ही उड़ा दिए। पता चला कि बिहार के अति पिछड़ों के 36 फीसदी वोट पर नीतिश कुमार की मजबूत पकड़ है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव का पूरा समीकरण बिगड़ जाएगा। इसके बाद बिहार में पर्दे के पीछे भाजपा की गुणा-गणित के साथ तोड़फोड़ की राजनीति शुरू हो गई।गत एक सप्ताह से बिहार में नीतिश कुमार के राजद का दामन छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ने की खबरें चलवाईं गई थीं।

गत दो दिनों में गतिविधियां काफी तेज हो गईं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इंटरनल सर्वे ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को नीतिश कुमार पर डोरे डालने पर मजबूर कर दिया। भाजपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ दिनों पहले पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर इंटरनल सर्वे कराया था, जिसके आंकड़ों ने भाजपा नेताओं के माथे पर शिकन ला दी। इसके बाद अमित शाह पर्दे के पीछे सक्रिय हो गए।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस सर्वे में ये सामने आया कि बिहार में अति पिछड़ा वर्ग के ज्यादातर वोटर लोकसभा चुनाव के दौरान भी नीतिश कुमार के साथ जुड़े हुए होंगे, जिसकी वजह से भाजपा को बिहार में 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है। भाजपा ये मानती रही है कि पीएम मोदी के करिश्मे और केंद्र सरकार की नीति-योजनाओं की वजह से उन्होंने अति पिछड़ा वोटबैंक में सेंधमारी की है, लेकिन सर्वे के सामने आने के बाद आलाकमान को झटका लगा। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में सबसे ज्यादा 36 फीसदी आबादी अति पिछड़ा वर्ग की है। भाजपा के सीनियर लीडर ने दावा किया कि फिलहाल भाजपा शीर्ष नेतृत्व का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर है और उनका लक्ष्य पीएम मोदी के ट्रैक रिकॉर्ड को बनाए रखना है। यानी 2024 में 2019 से भी ज्यादा सीटें लाना। ये तभी संभव है जब एनडीए बिहार में अपने पिछले प्रदर्शन (40 में से 39 सीट) से बेहतर करे या उसे बरकरार रखे। भाजपा के इंटरनल सर्वे से ये साफ था कि ये तभी संभव है जब नीतिश कुमार भाजपा के साथ रहें। अति पिछड़ा वोट बैंक पर नीतिश कुमार की इतनी मजबूत पकड़ को देखते हुए ही भाजपा आलाकमान ने उन्हें अपने पाले में लाने का फैसला लिया। मीडिया में नीतिश की नाराजगी की खबर आने के बाद भाजपा ने अपनी मुहिम तेज कर दी।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बतौर पीएम उम्मीदवार प्रस्तावित किए जाने से नीतिश नाराज हो गए। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसी समय अपना दांव चला और नीतिश को एनडीए में वापस लाने के लिए खुद अप्रोच किया। बिहार में जारी सियासी सरगर्मी के बीच पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकें होने लगीं। नीतिश कुमार की एनडीए में वापसी का जिम्मा खुद केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने अपने कंधों पर ले लिया। बीते दो दिनों में उन्होंने बिहार भाजपा और केंद्रीय नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इसके बाद दिल्ली से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का निर्णय लेकर बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े और पूर्व उप मुख्यमंत्री कल शनिवार को पटना पहुंचे। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि ‘भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले 160 सीटें जीत सकती है, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें नीतिश कुमार की जरूरत है। नीतिश कुमार अति पिछड़ा वोटबैंक के ब्रांड हैं और भाजपा को इस ब्रांड का फायदा मिलेगा।कुल मिलाकर मोदी की भाजपा बिहार ही नहीं पूरे देश में चाहे कुछ भी करना पड़े सविधान से खिलवाड़ करना हो सिद्धांतों से खिलवाड़ हो या किसी से भी सब किया जाएगा बस सत्ता की चाहत पूरी होनी चाहिए।नीतीश कुमार अब BJP के सहयोग से फिर CM पद की शपथ लेगे। आज ही नई सरकार का शपथग्रहण होगा। फिर BJP गठबंधन मे शामिल। वापसी पर लगी मोहर।

सूत्रों के मुताबिक़ दोपहर 4:00 बजे नौवीं बार सीएम पद की लेंगे शपथ नीतीश कुमार.

पिछले 25 वर्ष नीतिश कुमार का सफर

2000 चुनाव के बाद 10 दिन
2005 चुनाव के बाद 5 साल
2010 चुनाव के बाद 3.5 साल
2015 मांझी को हटाकर 9 महीना
2015 चुनाव बाद 1.5 साल
2017 पलटकर सीएम 3.5 साल
2020 चुनाव बाद 20 माह
2022 पलटकर 16 महीना
2024 कब तक ?

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बतौर पीएम उम्मीदवार प्रस्तावित किए जाने से नीतीश कुमार नाराज हो गए, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसी समय अपना दांव चला और नीतिश को एनडीए में वापस लाने के लिए खुद अप्रोच किया

मोदी की भाजपा तीसरी बार फिर केन्द्र में सत्ता चाहती है इसके लिए किसी के पास जाना पड़़े या कुछ और तरीका अपना कर लाना पड़े इससे कोई गुरेज नहीं है राम मन्दिर में आन्नन फान्नन में की गई प्राण प्रतिष्ठा भी सत्ता में वापसी की चाबी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है लगता हैं कि बिहार में राम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा भी काम नहीं कर पा रही है।पलटू राम को एक बार फिर पलटी मारने के लिए कहा गया और पलटी राम ने पलटी मार मोदी की भाजपा की डूबती नय्या के खेवनहार बनने को तैयार हो गए है।बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम काफी तेजी से बदला है।

हालांकि, इसकी शुरूआत काफी पहले हो गई थी, जब जातिगत जनगणना के बाद भाजपा ने राज्य में एक आंतरिक सर्वे कराया था। उस सर्वे के नतीजे ने भाजपा के होश ही उड़ा दिए। पता चला कि बिहार के अति पिछड़ों के 36 फीसदी वोट पर नीतिश कुमार की मजबूत पकड़ है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव का पूरा समीकरण बिगड़ जाएगा। इसके बाद बिहार में पर्दे के पीछे भाजपा की गुणा-गणित के साथ तोड़फोड़ की राजनीति शुरू हो गई।गत एक सप्ताह से बिहार में नीतिश कुमार के राजद का दामन छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ने की खबरें चलवाईं गई थीं।

गत दो दिनों में गतिविधियां काफी तेज हो गईं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इंटरनल सर्वे ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को नीतिश कुमार पर डोरे डालने पर मजबूर कर दिया। भाजपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ दिनों पहले पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर इंटरनल सर्वे कराया था, जिसके आंकड़ों ने भाजपा नेताओं के माथे पर शिकन ला दी। इसके बाद अमित शाह पर्दे के पीछे सक्रिय हो गए।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस सर्वे में ये सामने आया कि बिहार में अति पिछड़ा वर्ग के ज्यादातर वोटर लोकसभा चुनाव के दौरान भी नीतिश कुमार के साथ जुड़े हुए होंगे, जिसकी वजह से भाजपा को बिहार में 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है। भाजपा ये मानती रही है कि पीएम मोदी के करिश्मे और केंद्र सरकार की नीति-योजनाओं की वजह से उन्होंने अति पिछड़ा वोटबैंक में सेंधमारी की है, लेकिन सर्वे के सामने आने के बाद आलाकमान को झटका लगा। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में सबसे ज्यादा 36 फीसदी आबादी अति पिछड़ा वर्ग की है। भाजपा के सीनियर लीडर ने दावा किया कि फिलहाल भाजपा शीर्ष नेतृत्व का पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर है और उनका लक्ष्य पीएम मोदी के ट्रैक रिकॉर्ड को बनाए रखना है। यानी 2024 में 2019 से भी ज्यादा सीटें लाना। ये तभी संभव है जब एनडीए बिहार में अपने पिछले प्रदर्शन (40 में से 39 सीट) से बेहतर करे या उसे बरकरार रखे। भाजपा के इंटरनल सर्वे से ये साफ था कि ये तभी संभव है जब नीतिश कुमार भाजपा के साथ रहें। अति पिछड़ा वोट बैंक पर नीतिश कुमार की इतनी मजबूत पकड़ को देखते हुए ही भाजपा आलाकमान ने उन्हें अपने पाले में लाने का फैसला लिया। मीडिया में नीतिश की नाराजगी की खबर आने के बाद भाजपा ने अपनी मुहिम तेज कर दी।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बतौर पीएम उम्मीदवार प्रस्तावित किए जाने से नीतिश नाराज हो गए। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसी समय अपना दांव चला और नीतिश को एनडीए में वापस लाने के लिए खुद अप्रोच किया। बिहार में जारी सियासी सरगर्मी के बीच पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकें होने लगीं। नीतिश कुमार की एनडीए में वापसी का जिम्मा खुद केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने अपने कंधों पर ले लिया। बीते दो दिनों में उन्होंने बिहार भाजपा और केंद्रीय नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इसके बाद दिल्ली से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का निर्णय लेकर बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े और पूर्व उप मुख्यमंत्री कल शनिवार को पटना पहुंचे। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि ‘भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले 160 सीटें जीत सकती है, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें नीतिश कुमार की जरूरत है। नीतिश कुमार अति पिछड़ा वोटबैंक के ब्रांड हैं और भाजपा को इस ब्रांड का फायदा मिलेगा।कुल मिलाकर मोदी की भाजपा बिहार ही नहीं पूरे देश में चाहे कुछ भी करना पड़े सविधान से खिलवाड़ करना हो सिद्धांतों से खिलवाड़ हो या किसी से भी सब किया जाएगा बस सत्ता की चाहत पूरी होनी चाहिए।नीतीश कुमार अब BJP के सहयोग से फिर CM पद की शपथ लेगे। आज ही नई सरकार का शपथग्रहण होगा। फिर BJP गठबंधन मे शामिल। वापसी पर लगी मोहर।

सूत्रों के मुताबिक़ दोपहर 4:00 बजे नौवीं बार सीएम पद की लेंगे शपथ नीतीश कुमार.

पिछले 25 वर्ष नीतिश कुमार का सफर

2000 चुनाव के बाद 10 दिन
2005 चुनाव के बाद 5 साल
2010 चुनाव के बाद 3.5 साल
2015 मांझी को हटाकर 9 महीना
2015 चुनाव बाद 1.5 साल
2017 पलटकर सीएम 3.5 साल
2020 चुनाव बाद 20 माह
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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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