संसद गतिरोध पर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया। छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से बयान की मांग की। मामला जवाबदेही और संसदीय प्रक्रिया पर केंद्रित है।
📍 नई दिल्ली
📰 06 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
संसद गतिरोध अब सियासी टकराव का अहम मसला बन चुका है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे तौर पर सत्तापक्ष पर इल्ज़ाम लगाया है कि सदन की कार्यवाही बाधित होने के लिए सरकार जिम्मेदार है। उनका कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर छात्रों पर हुई कार्रवाई पर बयान दें, तो गतिरोध खत्म हो सकता है।
दिल्ली स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में खरगे ने साफ किया कि विपक्ष पिछले करीब 15 दिनों से इस मुद्दे को उठा रहा है। उनका दावा है कि सरकार इस पर चर्चा से बच रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मानसून सत्र का अहम हिस्सा लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है।
खरगे ने जिस मसले को केंद्र में रखा है, वह छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई है। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।
विपक्ष का नज़रिया है कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध के हक से जुड़ा सवाल है। वहीं सरकार की तरफ से अब तक इस पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
संसद गतिरोध के बीच सबसे बड़ा मुद्दा जवाबदेही का बन गया है। खरगे ने कहा कि अगर गृह मंत्री सदन में आकर स्थिति स्पष्ट कर देते, तो बहस होती और कामकाज सामान्य रहता। उनका यह भी कहना है कि सभापति की ओर से भी सरकार को संकेत दिया गया कि सदन गृह मंत्री का बयान चाहता है।
संसदीय परंपरा के तहत, बड़े राष्ट्रीय मसलों पर सरकार का सदन में जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में विपक्ष का तर्क है कि सरकार इस जिम्मेदारी से बच रही है।
यह टकराव सिर्फ प्रक्रिया का नहीं, बल्कि नैरेटिव का भी है। विपक्ष इसे छात्रों के दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के तौर पर पेश कर रहा है। दूसरी तरफ सत्तापक्ष आम तौर पर ऐसे मामलों को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णय बताता रहा है।
खरगे ने यह भी कहा कि विपक्ष संसद को बाधित नहीं करना चाहता, बल्कि सार्थक चर्चा चाहता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री छात्रों और उनके अभिभावकों से माफी मांगें और गृह मंत्री सदन में बयान दें, तो गतिरोध खत्म हो सकता है।
झारखंड से जुड़े सवाल पर खरगे ने साफ किया कि कांग्रेस सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों का भी जिक्र किया और कहा कि जहां भी छात्रों के साथ अन्याय होगा, पार्टी आवाज उठाएगी।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे आने वाले दिनों में यह मसला और राजनीतिक रंग ले सकता है।
संसद गतिरोध का असर सीधे तौर पर विधायी कामकाज पर पड़ता है। महत्वपूर्ण बिल, नीतिगत फैसले और बहसें प्रभावित होती हैं। इससे शासन प्रक्रिया धीमी होती है और जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
दूसरी तरफ, छात्रों का मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से संवेदनशील है। युवा वर्ग देश की बड़ी आबादी का हिस्सा है, ऐसे में इस पर उठने वाला हर सवाल व्यापक असर डालता है।
इस पूरे विवाद में दो पक्ष साफ दिखते हैं। विपक्ष जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है। सरकार की तरफ से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया का अभाव दिख रहा है, जिससे सवाल बढ़ रहे हैं।
तजज़िया यह भी बताता है कि अगर सरकार सदन में बयान देती है, तो बहस का रास्ता खुल सकता है। वहीं विपक्ष के लिए भी जरूरी है कि वह विरोध के साथ ठोस बहस में हिस्सा ले, ताकि समाधान की दिशा बन सके।
आने वाले दिनों में संसद गतिरोध खत्म होगा या और गहराएगा, यह सरकार और विपक्ष दोनों के रुख पर निर्भर करेगा। अगर गृह मंत्री सदन में बयान देते हैं, तो स्थिति बदल सकती है।
सियासी तौर पर यह मुद्दा लंबा खिंच सकता है, खासकर अगर इसे व्यापक छात्र आंदोलन या राष्ट्रीय बहस का रूप मिलता है। इससे राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।
संसद गतिरोध अब सिर्फ सदन की कार्यवाही का मसला नहीं रहा। यह जवाबदेही, लोकतांत्रिक अधिकार और सियासी नैरेटिव की जंग बन चुका है। समाधान संवाद में है, टकराव में नहीं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।