गुरुवार, 08 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Advertisement Advertisement
None

पतंजलि आयुर्वेद ने फिर मांगी माफी पर नहीं पसीजा सुप्रीम कोर्ट ,बाबा रामदेव को दिया यह हुक्म

None • 2024-04-23 17:42:24
पतंजलि आयुर्वेद ने फिर मांगी माफी पर नहीं पसीजा सुप्रीम कोर्ट ,बाबा रामदेव को दिया यह हुक्म

 सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव के माफीनामे को एक बार फिर से कबूल नहीं किया और कहा कि मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी और अगली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण को पेश होना होगा।

नई दिल्ली,(Shah Times) । एलोपैथी मेडिसिन के खिलाफ विज्ञापन और पतंजलि आयुर्वेद द्वारा अपनी दवाओं के लिए ‘भ्रामक दावों’ पर अदालत की अवमानना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई  ।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने जब इस मामले की सुनवाई की, तब कोर्ट रूम में बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण मौजूद थे ।

बाबा रामदेव की मौजूदगी में पतंजलि आयुर्वेद की ओर से पेश हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पतंजलि ने 67 अखबारों में माफीनामा दिया है, जिसमें कंपनी के 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव के माफीनामे को एक बार फिर से कबूल नहीं किया और कहा कि मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी और अगली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण को पेश होना होगा।

जब इस मामले की मंगलवार को सुनवाई हो रही थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आखिर कल माफीनामा दाखिल क्यों किया गया है, यह तो पहले ही कर दिया जाना चाहिए था. इस पर पतंजलि आयुर्वेद की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी की तरफ से कहा गया कि हमने 67 अखबारों में हमने माफीनामा दिया है. इस पर हमने 10 लाख रुपए खर्च किए हैं. इसके बाद विज्ञापन पर अदालत ने पूछा कि ये उतने ही साइज का माफीनामा है, जितना बड़ा आप विज्ञापन देते हैं? अदालत ने पूछा क्या आप हमेशा इतने साइज का ही विज्ञापन देते है? जब पतंजलि के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी ने विज्ञापन पर लाखों खर्च किए हैं, तो अदालत ने जवाब दिया कि इसकी हमें कोई चिंता नहीं है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि वह इस मामले की याचिका में कंजूमर एक्ट को भी शामिल कर सकते हैं. ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय का क्या? हमनें देखा है कि पतंजलि मामले में टीवी पर दिखाया जा रहा है कि कोर्ट क्या कह रहा है. ठीक उसी समय एक हिस्से में पतंजलि का विज्ञापन चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आयुष मंत्रालय ने नियम 170 (राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की मंजूरी के बिना आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के विज्ञापन पर रोक) को वापस लेने का फैसला क्यों किया? क्या आपके पास यह कहने का अधिकार है कि मौजूदा नियम का पालन न करें? क्या यह मनमाना नहीं है? क्या आपको प्रकाशित होने वाली चीडों की बजाय राजस्व की अधिक चिंता नहीं है?

 सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव के माफीनामे को एक बार फिर से कबूल नहीं किया और कहा कि मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी और अगली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण को पेश होना होगा।

नई दिल्ली,(Shah Times) । एलोपैथी मेडिसिन के खिलाफ विज्ञापन और पतंजलि आयुर्वेद द्वारा अपनी दवाओं के लिए ‘भ्रामक दावों’ पर अदालत की अवमानना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई  ।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने जब इस मामले की सुनवाई की, तब कोर्ट रूम में बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण मौजूद थे ।

बाबा रामदेव की मौजूदगी में पतंजलि आयुर्वेद की ओर से पेश हुए वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पतंजलि ने 67 अखबारों में माफीनामा दिया है, जिसमें कंपनी के 10 लाख रुपए खर्च हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव के माफीनामे को एक बार फिर से कबूल नहीं किया और कहा कि मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी और अगली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण को पेश होना होगा।

जब इस मामले की मंगलवार को सुनवाई हो रही थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आखिर कल माफीनामा दाखिल क्यों किया गया है, यह तो पहले ही कर दिया जाना चाहिए था. इस पर पतंजलि आयुर्वेद की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी की तरफ से कहा गया कि हमने 67 अखबारों में हमने माफीनामा दिया है. इस पर हमने 10 लाख रुपए खर्च किए हैं. इसके बाद विज्ञापन पर अदालत ने पूछा कि ये उतने ही साइज का माफीनामा है, जितना बड़ा आप विज्ञापन देते हैं? अदालत ने पूछा क्या आप हमेशा इतने साइज का ही विज्ञापन देते है? जब पतंजलि के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी ने विज्ञापन पर लाखों खर्च किए हैं, तो अदालत ने जवाब दिया कि इसकी हमें कोई चिंता नहीं है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि वह इस मामले की याचिका में कंजूमर एक्ट को भी शामिल कर सकते हैं. ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय का क्या? हमनें देखा है कि पतंजलि मामले में टीवी पर दिखाया जा रहा है कि कोर्ट क्या कह रहा है. ठीक उसी समय एक हिस्से में पतंजलि का विज्ञापन चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आयुष मंत्रालय ने नियम 170 (राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की मंजूरी के बिना आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी दवाओं के विज्ञापन पर रोक) को वापस लेने का फैसला क्यों किया? क्या आपके पास यह कहने का अधिकार है कि मौजूदा नियम का पालन न करें? क्या यह मनमाना नहीं है? क्या आपको प्रकाशित होने वाली चीडों की बजाय राजस्व की अधिक चिंता नहीं है?

-->
ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर