सोमवार, 24 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
None

पीएम मोदी का दफ्तर बदलेगा,सेवा तीर्थ परिसर में होगा नया पीएमओ

None 2026-01-12 15:47:50
पीएम मोदी का दफ्तर बदलेगा,सेवा तीर्थ परिसर में होगा नया पीएमओ

पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और एनएसए एक छत के नीचे सेवा तीर्थ में


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी 2026 को अपने कार्यालय को नए सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित करेंगे।
पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तर एक ही परिसर में काम करेंगे।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

सेवा तीर्थ में पीएमओ का स्थानांतरण

नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत तैयार किया गया नया सेवा तीर्थ परिसर अब पूरी तरह संचालन के लिए तैयार है। सरकारी जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के दिन, अपने कार्यालय को यहां स्थानांतरित करेंगे। इस बदलाव के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय एक ही जगह पर कार्य करेगा। यह व्यवस्था सरकारी कामकाज को एकीकृत और समन्वित बनाने के लिए बनाई गई है।

सेवा तीर्थ परिसर विजय चौक के नजदीक रायसीना हिल के नीचे स्थित है। यह एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव भाग एक में विकसित किया गया है। तीन अलग अलग आधुनिक इमारतों को सेवा तीर्थ एक, सेवा तीर्थ दो और सेवा तीर्थ तीन नाम दिया गया है। इन भवनों का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया है कि सरकार के प्रमुख विभाग एक छत के नीचे काम कर सकें।

सेवा तीर्थ की संरचना

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार सेवा तीर्थ एक में प्रधानमंत्री कार्यालय स्थापित किया गया है। सेवा तीर्थ दो में कैबिनेट सचिवालय के दफ्तर हैं, जहां सितंबर 2025 से काम शुरू हो चुका है। सेवा तीर्थ तीन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के दफ्तर होंगे। यहां से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक कामकाज का संचालन किया जाएगा।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि नीति निर्माण, प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा से जुड़े निर्णय तेजी से और एक ही स्थान से लिए जा सकें। पहले ये दफ्तर अलग अलग इमारतों में स्थित थे, जिससे कई बार समन्वय में समय लगता था।

नया पीएमओ और उसकी सुविधाएं

प्रधानमंत्री का नया कार्यालय सेवा तीर्थ एक में बनाया गया है। यह भवन आधुनिक ऑफिस स्पेस, डिजिटल कनेक्टिविटी और मीटिंग सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां बड़े कॉन्फ्रेंस रूम, औपचारिक भेंट कक्ष और वर्क स्टेशंस बनाए गए हैं। इमारत का लेआउट इस तरह तैयार किया गया है कि कामकाज खुले फ्लोर सिस्टम में हो सके, जिससे अधिकारियों के बीच संपर्क आसान रहे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक यहां सुरक्षा व्यवस्था भी नई तकनीक के अनुसार तैयार की गई है। एक्सेस कंट्रोल, डिजिटल एंट्री और इमरजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में संचालन बाधित न हो।

ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से विदाई

आजादी के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में स्थित रहा है। दशकों तक यहीं से देश की कार्यकारी सरकार का संचालन हुआ। अब पीएमओ के वहां से हटने के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को एक सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा। इस प्रस्तावित संग्रहालय का नाम युगे युगीन भारत संग्रहालय रखा गया है।

सरकार के अनुसार इस संग्रहालय में भारत की सभ्यता, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक भारत की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। आम नागरिकों के लिए यह परिसर खुला होगा, जिससे वे ऐतिहासिक इमारतों के भीतर जाकर देश के इतिहास को देख सकेंगे।

सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा

सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक अहम हिस्सा है। इस परियोजना के तहत नया संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और मंत्रालयों के लिए कर्तव्य भवन पहले ही तैयार हो चुके हैं। आठ नए कर्तव्य भवनों में से कई में मंत्रालयों ने काम शुरू कर दिया है।

इस परियोजना का लक्ष्य सरकारी दफ्तरों को एक ही क्षेत्र में आधुनिक ढांचे के साथ स्थापित करना है। इससे फाइल मूवमेंट, बैठकों और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाई जा सके।

निर्माण और लागत

सेवा तीर्थ परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया है। परियोजना की कुल लागत लगभग एक हजार एक सौ नवासी करोड़ रुपये बताई गई है। कुल निर्मित क्षेत्र दो लाख छब्बीस हजार वर्ग फीट से अधिक है। इस परिसर के पास ही प्रधानमंत्री के नए आवास का निर्माण भी जारी है, जिसे एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव भाग दो कहा जा रहा है।

नया आवास तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री का निवास सात लोक कल्याण मार्ग से यहां स्थानांतरित किया जाएगा। इससे प्रधानमंत्री का कार्यालय और आवास एक ही क्षेत्र में होगा।

दिसंबर में नाम परिवर्तन

सरकारी जानकारी के अनुसार इस परिसर का प्रारंभिक नाम एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव रखा गया था। दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ परिसर किया गया। इसी दौरान कई सरकारी इमारतों और भवनों के नामों में भी बदलाव किए गए।

नए नामों का उद्देश्य प्रशासनिक परिसरों को भारतीय सांस्कृतिक शब्दों से जोड़ना बताया गया है। सेवा तीर्थ नाम के तहत इस परिसर को एक ऐसे केंद्र के रूप में देखा जा रहा है जहां से देश की सेवा से जुड़े कार्य संचालित होंगे।

अत्याधुनिक कक्ष और व्यवस्थाएं

सेवा तीर्थ परिसर में गणमान्य अतिथियों के लिए विशेष भेंट कक्ष बनाए गए हैं। इन कमरों में भारतीय कला, परंपरा और विरासत से जुड़े डिज़ाइन एलिमेंट शामिल किए गए हैं। कैबिनेट की बैठकों के लिए अलग से कॉन्फ्रेंस हॉल बनाए गए हैं, जहां उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जा सकेंगी।

अधिकारियों के लिए ओपन फ्लोर ऑफिस सिस्टम तैयार किया गया है, जैसा कि कर्तव्य भवनों में अपनाया गया है। इससे कर्मचारियों के बीच संवाद आसान होगा और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी।

पहले से शिफ्ट हो चुके विभाग

कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में सेवा तीर्थ दो में स्थानांतरित हो चुका है। कई वरिष्ठ अधिकारी वहां से नियमित रूप से काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय भी सेवा तीर्थ तीन में जल्द पूरी तरह शुरू होने वाला है।

इन दोनों कार्यालयों के पहले से वहां काम करने से पीएमओ के शिफ्ट होने के बाद पूरा कार्यकारी ढांचा एक जगह पर केंद्रित हो जाएगा।

प्रशासनिक समन्वय का नया केंद्र

सरकारी अधिकारियों के अनुसार एक ही परिसर में तीनों प्रमुख दफ्तरों के होने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा। सुरक्षा, विदेश नीति, कैबिनेट फैसले और प्रधानमंत्री से जुड़े दैनिक कार्यों में समय की बचत होगी।

पहले ये विभाग अलग अलग स्थानों पर होने के कारण बैठकों और फाइलों के आवागमन में समय लगता था। नई व्यवस्था में डिजिटल और भौतिक दोनों स्तर पर कामकाज तेज होने की उम्मीद जताई गई है।

आम लोगों के लिए बदलाव का असर

पीएमओ के साउथ ब्लॉक से हटने के बाद उस इलाके में आम नागरिकों के लिए पहुंच बढ़ेगी। युगे युगीन भारत संग्रहालय के बनने से लोग ऐतिहासिक इमारतों को करीब से देख सकेंगे। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में पहले से ही कर्तव्य पथ और नया संसद भवन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।

सेवा तीर्थ परिसर सुरक्षा कारणों से आम लोगों के लिए खुला नहीं होगा, लेकिन इसके आसपास का क्षेत्र सुव्यवस्थित और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए तैयार किया गया है।

आने वाले दिनों की तैयारी

14 जनवरी को पीएमओ के शिफ्ट होने से पहले तकनीकी परीक्षण, नेटवर्क ट्रांसफर और फाइल मूवमेंट की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आईटी सिस्टम, कम्युनिकेशन लाइन और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार शिफ्टिंग चरणबद्ध तरीके से होगी ताकि कामकाज में कोई बाधा न आए। पहले डिजिटल सिस्टम और फिर स्टाफ का स्थानांतरण किया जाएगा।

निष्कर्षात्मक जानकारी

सेवा तीर्थ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के शुरू होने के साथ सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक बड़ा चरण पूरा हो जाएगा। पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तरों का एक साथ काम करना प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

-->

पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और एनएसए एक छत के नीचे सेवा तीर्थ में


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी 2026 को अपने कार्यालय को नए सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित करेंगे।
पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तर एक ही परिसर में काम करेंगे।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

सेवा तीर्थ में पीएमओ का स्थानांतरण

नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत तैयार किया गया नया सेवा तीर्थ परिसर अब पूरी तरह संचालन के लिए तैयार है। सरकारी जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के दिन, अपने कार्यालय को यहां स्थानांतरित करेंगे। इस बदलाव के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय एक ही जगह पर कार्य करेगा। यह व्यवस्था सरकारी कामकाज को एकीकृत और समन्वित बनाने के लिए बनाई गई है।

सेवा तीर्थ परिसर विजय चौक के नजदीक रायसीना हिल के नीचे स्थित है। यह एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव भाग एक में विकसित किया गया है। तीन अलग अलग आधुनिक इमारतों को सेवा तीर्थ एक, सेवा तीर्थ दो और सेवा तीर्थ तीन नाम दिया गया है। इन भवनों का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया है कि सरकार के प्रमुख विभाग एक छत के नीचे काम कर सकें।

सेवा तीर्थ की संरचना

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार सेवा तीर्थ एक में प्रधानमंत्री कार्यालय स्थापित किया गया है। सेवा तीर्थ दो में कैबिनेट सचिवालय के दफ्तर हैं, जहां सितंबर 2025 से काम शुरू हो चुका है। सेवा तीर्थ तीन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के दफ्तर होंगे। यहां से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक कामकाज का संचालन किया जाएगा।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि नीति निर्माण, प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा से जुड़े निर्णय तेजी से और एक ही स्थान से लिए जा सकें। पहले ये दफ्तर अलग अलग इमारतों में स्थित थे, जिससे कई बार समन्वय में समय लगता था।

नया पीएमओ और उसकी सुविधाएं

प्रधानमंत्री का नया कार्यालय सेवा तीर्थ एक में बनाया गया है। यह भवन आधुनिक ऑफिस स्पेस, डिजिटल कनेक्टिविटी और मीटिंग सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां बड़े कॉन्फ्रेंस रूम, औपचारिक भेंट कक्ष और वर्क स्टेशंस बनाए गए हैं। इमारत का लेआउट इस तरह तैयार किया गया है कि कामकाज खुले फ्लोर सिस्टम में हो सके, जिससे अधिकारियों के बीच संपर्क आसान रहे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक यहां सुरक्षा व्यवस्था भी नई तकनीक के अनुसार तैयार की गई है। एक्सेस कंट्रोल, डिजिटल एंट्री और इमरजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में संचालन बाधित न हो।

ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से विदाई

आजादी के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में स्थित रहा है। दशकों तक यहीं से देश की कार्यकारी सरकार का संचालन हुआ। अब पीएमओ के वहां से हटने के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को एक सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा। इस प्रस्तावित संग्रहालय का नाम युगे युगीन भारत संग्रहालय रखा गया है।

सरकार के अनुसार इस संग्रहालय में भारत की सभ्यता, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक भारत की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। आम नागरिकों के लिए यह परिसर खुला होगा, जिससे वे ऐतिहासिक इमारतों के भीतर जाकर देश के इतिहास को देख सकेंगे।

सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा

सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक अहम हिस्सा है। इस परियोजना के तहत नया संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और मंत्रालयों के लिए कर्तव्य भवन पहले ही तैयार हो चुके हैं। आठ नए कर्तव्य भवनों में से कई में मंत्रालयों ने काम शुरू कर दिया है।

इस परियोजना का लक्ष्य सरकारी दफ्तरों को एक ही क्षेत्र में आधुनिक ढांचे के साथ स्थापित करना है। इससे फाइल मूवमेंट, बैठकों और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाई जा सके।

निर्माण और लागत

सेवा तीर्थ परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया है। परियोजना की कुल लागत लगभग एक हजार एक सौ नवासी करोड़ रुपये बताई गई है। कुल निर्मित क्षेत्र दो लाख छब्बीस हजार वर्ग फीट से अधिक है। इस परिसर के पास ही प्रधानमंत्री के नए आवास का निर्माण भी जारी है, जिसे एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव भाग दो कहा जा रहा है।

नया आवास तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री का निवास सात लोक कल्याण मार्ग से यहां स्थानांतरित किया जाएगा। इससे प्रधानमंत्री का कार्यालय और आवास एक ही क्षेत्र में होगा।

दिसंबर में नाम परिवर्तन

सरकारी जानकारी के अनुसार इस परिसर का प्रारंभिक नाम एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव रखा गया था। दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ परिसर किया गया। इसी दौरान कई सरकारी इमारतों और भवनों के नामों में भी बदलाव किए गए।

नए नामों का उद्देश्य प्रशासनिक परिसरों को भारतीय सांस्कृतिक शब्दों से जोड़ना बताया गया है। सेवा तीर्थ नाम के तहत इस परिसर को एक ऐसे केंद्र के रूप में देखा जा रहा है जहां से देश की सेवा से जुड़े कार्य संचालित होंगे।

अत्याधुनिक कक्ष और व्यवस्थाएं

सेवा तीर्थ परिसर में गणमान्य अतिथियों के लिए विशेष भेंट कक्ष बनाए गए हैं। इन कमरों में भारतीय कला, परंपरा और विरासत से जुड़े डिज़ाइन एलिमेंट शामिल किए गए हैं। कैबिनेट की बैठकों के लिए अलग से कॉन्फ्रेंस हॉल बनाए गए हैं, जहां उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जा सकेंगी।

अधिकारियों के लिए ओपन फ्लोर ऑफिस सिस्टम तैयार किया गया है, जैसा कि कर्तव्य भवनों में अपनाया गया है। इससे कर्मचारियों के बीच संवाद आसान होगा और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी।

पहले से शिफ्ट हो चुके विभाग

कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में सेवा तीर्थ दो में स्थानांतरित हो चुका है। कई वरिष्ठ अधिकारी वहां से नियमित रूप से काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय भी सेवा तीर्थ तीन में जल्द पूरी तरह शुरू होने वाला है।

इन दोनों कार्यालयों के पहले से वहां काम करने से पीएमओ के शिफ्ट होने के बाद पूरा कार्यकारी ढांचा एक जगह पर केंद्रित हो जाएगा।

प्रशासनिक समन्वय का नया केंद्र

सरकारी अधिकारियों के अनुसार एक ही परिसर में तीनों प्रमुख दफ्तरों के होने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा। सुरक्षा, विदेश नीति, कैबिनेट फैसले और प्रधानमंत्री से जुड़े दैनिक कार्यों में समय की बचत होगी।

पहले ये विभाग अलग अलग स्थानों पर होने के कारण बैठकों और फाइलों के आवागमन में समय लगता था। नई व्यवस्था में डिजिटल और भौतिक दोनों स्तर पर कामकाज तेज होने की उम्मीद जताई गई है।

आम लोगों के लिए बदलाव का असर

पीएमओ के साउथ ब्लॉक से हटने के बाद उस इलाके में आम नागरिकों के लिए पहुंच बढ़ेगी। युगे युगीन भारत संग्रहालय के बनने से लोग ऐतिहासिक इमारतों को करीब से देख सकेंगे। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में पहले से ही कर्तव्य पथ और नया संसद भवन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।

सेवा तीर्थ परिसर सुरक्षा कारणों से आम लोगों के लिए खुला नहीं होगा, लेकिन इसके आसपास का क्षेत्र सुव्यवस्थित और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए तैयार किया गया है।

आने वाले दिनों की तैयारी

14 जनवरी को पीएमओ के शिफ्ट होने से पहले तकनीकी परीक्षण, नेटवर्क ट्रांसफर और फाइल मूवमेंट की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आईटी सिस्टम, कम्युनिकेशन लाइन और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार शिफ्टिंग चरणबद्ध तरीके से होगी ताकि कामकाज में कोई बाधा न आए। पहले डिजिटल सिस्टम और फिर स्टाफ का स्थानांतरण किया जाएगा।

निष्कर्षात्मक जानकारी

सेवा तीर्थ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के शुरू होने के साथ सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक बड़ा चरण पूरा हो जाएगा। पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तरों का एक साथ काम करना प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर